सोनम वांगचुक को हिरासत में लिए जाने पर राजनीतिक विवाद तेज, डिंपल यादव ने लोकतंत्र और संविधान पर उठाए सवाल

नई दिल्ली। पर्यावरण कार्यकर्ता और लद्दाख के सामाजिक सुधारक सोनम वांगचुक को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स (पूर्व ट्विटर) पर सरकार की कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध की आवाज़ को दबाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
डिंपल यादव ने अपने संदेश में कहा कि “सोनम वांगचुक जी को जबरन हटाना सिर्फ एक कार्रवाई नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान को कुचलना है। भाजपा सरकार को अब शांतिपूर्ण विरोध भी बर्दाश्त नहीं है।” इसके साथ ही उन्होंने यह भी लिखा कि “जब शांतिपूर्ण आवाज़ों को दबाया जाता है, तो संविधान और लोकतंत्र भी आहत होते हैं। सोनम वांगचुक जैसे लोगों की आवाज़ दबाना, देश की आत्मा को दबाना है।”
इस बीच विपक्षी दलों ने सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन का आरोप लगाया है। कई नेताओं का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद हैं और इनका सम्मान किया जाना चाहिए।
वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से अब तक इस बयान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सरकार का पूर्व रुख रहा है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं के तहत प्रशासन आवश्यक कदम उठाता है।
सोनम वांगचुक पिछले कुछ समय से लद्दाख से जुड़े संवैधानिक और पर्यावरणीय मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उनके समर्थन में देश और विदेश के कई पर्यावरणविद, सामाजिक संगठनों तथा नागरिक समूहों ने भी आवाज़ उठाई है।
यह मामला अब केवल भारत की आंतरिक राजनीति तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि मानवाधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों के संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनता जा रहा है।
रिपोर्ट|लाइव भारत समाचार