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livebharatsamachar.com ब्यूरो: रायपुर स्थित पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (PRSU) में एक शोधार्थी छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने जिस जांच समिति का गठन सात दिनों में रिपोर्ट सौंपने के लिए किया था, वह समय सीमा बीते 40 दिन से अधिक हो चुकी है, लेकिन अब तक जांच रिपोर्ट का कोई अता-पता नहीं है। इस देरी ने न केवल विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि मृतक के परिजनों के सब्र का बांध भी तोड़ दिया है।

क्या है पूरा मामला?

विश्वविद्यालय परिसर में शोधार्थी की मौत के बाद हड़कंप मच गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए आनन-फानन में एक उच्च स्तरीय जांच समिति बनाई गई थी। प्रशासन ने दावा किया था कि एक सप्ताह के भीतर पूरी घटना की सच्चाई सामने आ जाएगी। हालांकि, 40 दिन बीत जाने के बाद भी फाइलें धूल फांक रही हैं और जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।

प्रशासन की यह सुस्ती बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। एक छात्र की जान चली गई और विश्वविद्यालय प्रशासन जांच के नाम पर केवल समय काट रहा है। यदि जल्द ही रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई, तो हम उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। - मृतक के परिजन

जांच में देरी के मुख्य कारण

छात्र संगठनों का आक्रोश

इस मामले में अब छात्र संगठनों ने भी मोर्चा खोल दिया है। उनका आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन किसी बड़े चेहरे को बचाने की कोशिश कर रहा है, जिसके कारण जांच को जानबूझकर लटकाया जा रहा है। परिसर में व्याप्त इस अनिश्चितता के माहौल ने छात्रों के बीच असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन आने वाले कुछ दिनों में रिपोर्ट पेश करता है या यह मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

सोमवार, 7 सितम्बर , 2026

पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय छात्र मौत मामला: एक हफ्ते की जांच 40 दिन बाद भी अधूरी, परिजनों का फूटा गुस्सा

livebharatsamachar.com ब्यूरो: रायपुर स्थित पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (PRSU) में एक शोधार्थी छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने जिस जांच समिति का गठन सात दिनों में रिपोर्ट सौंपने के लिए किया था, वह समय सीमा बीते 40 दिन से अधिक हो चुकी है, लेकिन अब तक जांच रिपोर्ट का कोई अता-पता नहीं है। इस देरी ने न केवल विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि मृतक के परिजनों के सब्र का बांध भी तोड़ दिया है।

क्या है पूरा मामला?

विश्वविद्यालय परिसर में शोधार्थी की मौत के बाद हड़कंप मच गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए आनन-फानन में एक उच्च स्तरीय जांच समिति बनाई गई थी। प्रशासन ने दावा किया था कि एक सप्ताह के भीतर पूरी घटना की सच्चाई सामने आ जाएगी। हालांकि, 40 दिन बीत जाने के बाद भी फाइलें धूल फांक रही हैं और जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।

प्रशासन की यह सुस्ती बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। एक छात्र की जान चली गई और विश्वविद्यालय प्रशासन जांच के नाम पर केवल समय काट रहा है। यदि जल्द ही रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई, तो हम उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। – मृतक के परिजन

जांच में देरी के मुख्य कारण

  • प्रशासनिक स्तर पर फाइलों का एक मेज से दूसरी मेज पर घूमना।
  • जांच समिति के सदस्यों की बैठकों में निरंतर देरी।
  • पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक साक्ष्यों के मिलान में तकनीकी अड़चनें।
  • विश्वविद्यालय के उच्च अधिकारियों की ओर से स्पष्ट दिशा-निर्देशों का अभाव।

छात्र संगठनों का आक्रोश

इस मामले में अब छात्र संगठनों ने भी मोर्चा खोल दिया है। उनका आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन किसी बड़े चेहरे को बचाने की कोशिश कर रहा है, जिसके कारण जांच को जानबूझकर लटकाया जा रहा है। परिसर में व्याप्त इस अनिश्चितता के माहौल ने छात्रों के बीच असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन आने वाले कुछ दिनों में रिपोर्ट पेश करता है या यह मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

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