livebharatsamachar.com ब्यूरो: पाकिस्तान क्रिकेट एक बार फिर गहरे संकट और विवादों के भंवर में फंस गया है। इंग्लैंड के खिलाफ जारी टेस्ट सीरीज के बीच टीम में किए गए बड़े बदलावों ने न केवल प्रशंसकों को हैरान किया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत में फिक्सिंग के पुराने जख्मों को भी ताजा कर दिया है। टीम से सात प्रमुख खिलाड़ियों को बाहर का रास्ता दिखाना और दो कोचों की विदाई ने बोर्ड की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
हालिया घटनाक्रम में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने अचानक टीम में बड़े फेरबदल किए। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि खिलाड़ियों के मोबाइल फोन कथित तौर पर जब्त कर लिए गए। हालांकि बोर्ड ने इसे ‘अनुशासन और टीम की गोपनीयता’ का हिस्सा बताया है, लेकिन क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे की वजह कुछ और ही है। टीम के भीतर चल रही आंतरिक कलह और संदिग्ध गतिविधियों की खबरों ने इस विवाद को और हवा दे दी है।
फिक्सिंग का पुराना इतिहास
पाकिस्तान क्रिकेट का फिक्सिंग से पुराना नाता रहा है। 2010 का स्पॉट-फिक्सिंग कांड हो या उससे पहले के विवाद, पाकिस्तान क्रिकेट की साख पर हमेशा से सवाल उठते रहे हैं। मौजूदा स्थिति को देखते हुए पूर्व क्रिकेटरों ने चिंता जताई है कि क्या टीम में फिर से कोई बड़ी साजिश रची जा रही है।
बोर्ड के एक उच्च अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ‘खिलाड़ियों की सुरक्षा और मैच की अखंडता बनाए रखने के लिए हमने कुछ कड़े कदम उठाए हैं। इसे किसी गलत नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।’
मुख्य बिंदु:
- टीम से सात सीनियर खिलाड़ियों को बाहर किया गया।
- दो कोचों को तत्काल प्रभाव से रिलीज कर दिया गया।
- खिलाड़ियों के फोन जब्त करना सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी की ओर इशारा करता है।
- बोर्ड की ओर से कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान न आने से अटकलें तेज हैं।
भविष्य पर मंडराता खतरा
इस पूरे घटनाक्रम का असर खिलाड़ियों के मनोबल पर पड़ना तय है। इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम के खिलाफ सीरीज के बीच में इस तरह की अफरा-तफरी टीम के प्रदर्शन को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है। अब देखना यह होगा कि क्या पीसीबी आने वाले दिनों में इस मामले पर कोई पारदर्शी स्पष्टीकरण देता है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।