Livebharatsamachar ब्यूरो: दिग्गज गायिका आशा भोसले के निधन के बाद फिल्म जगत में शोक की लहर है। अभिनेता अंशुमन झा ने हाल ही में एक भावुक संस्मरण साझा किया है, जिसमें उन्होंने आशा ताई के साथ बिताए अपने आखिरी पलों और उनके अंतिम प्लेबैक रिकॉर्डिंग ‘ओम का हरि’ के अनुभव को याद किया है। 90 वर्ष की आयु में भी उनका संगीत के प्रति समर्पण और उत्साह किसी को भी प्रेरित करने के लिए काफी था।
संगीत के प्रति अटूट जुनून
अंशुमन झा ने बताया कि जब उन्होंने आशा जी को ‘ओम का हरि’ फिल्म के फुटेज दिखाए, तो उनकी आंखों में एक अलग ही चमक थी। 90 साल की उम्र में भी वे एक नई कलाकार की तरह उत्साहित थीं। अंशुमन के अनुसार, आशा जी ने न केवल उस गाने को पूरी शिद्दत से गाया, बल्कि वे उनके एक्शन फिल्म ‘लकड़बग्घा’ को देखकर भी काफी चकित और खुश थीं।
अंशुमन झा ने कहा, आशा ताई में सीखने की जो भूख थी, वह आज की पीढ़ी के लिए एक मिसाल है। रिकॉर्डिंग के दौरान उनकी वह बालसुलभ हंसी और हर सुर को बेहतर बनाने की कोशिश यह दर्शाती थी कि वे संगीत से कितना गहरा प्रेम करती थीं।
आशा भोसले की विरासत
- 90 वर्ष की आयु में रिकॉर्ड किया अपना आखिरी गाना ‘ओम का हरि’।
- अंशुमन झा की एक्शन फिल्म ‘लकड़बग्घा’ को लेकर जताई थी विशेष रुचि।
- जीवन के अंतिम पड़ाव तक संगीत के प्रति बनी रही उनकी बालसुलभ जिज्ञासा।
- 12 अप्रैल को 92 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस।
आशा भोसले का जाना भारतीय संगीत के एक युग का अंत है। उनकी आवाज की जादूगरी और काम के प्रति उनकी निष्ठा आने वाली कई पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। अंशुमन झा का यह खुलासा न केवल एक महान गायिका के प्रति सम्मान है, बल्कि उनके उस मानवीय पक्ष को भी सामने लाता है जो हमेशा सादगी और सीखने की ललक से भरा था।