Livebharatsamachar ब्यूरो: तहलका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल ने 2013 के बहुचर्चित दुष्कर्म मामले में आखिरकार गोवा की एक अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए उस निर्देश के बाद उठाया गया है, जिसमें उन्हें दो सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया गया था।
कानूनी लड़ाई और अदालती आदेश
तरुण तेजपाल ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें दोषी करार दिया गया था। हाई कोर्ट ने 6 अगस्त को अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में 2021 में गोवा सत्र अदालत द्वारा तेजपाल को दी गई बरी करने की रिहाई को पलट दिया था। हाई कोर्ट ने उन्हें दुष्कर्म का दोषी मानते हुए सजा सुनाई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने स्पष्ट निर्देश में कहा था कि तरुण तेजपाल को दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करना होगा, जिसके बाद ही उनकी अपील पर आगे की सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
मामले के मुख्य बिंदु
- 2013 में तहलका की एक पूर्व महिला सहकर्मी ने तरुण तेजपाल पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था।
- 2021 में गोवा की निचली अदालत ने सबूतों के अभाव में तेजपाल को बरी कर दिया था।
- बॉम्बे हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को खारिज करते हुए उन्हें दोषी ठहराया।
- सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, आत्मसमर्पण के बाद अब उन्हें सजा काटनी होगी, जो उनकी अपील के अंतिम परिणाम के अधीन होगी।
तरुण तेजपाल के आत्मसमर्पण के साथ ही अब कानूनी गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि उनकी अपील पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम रुख क्या होगा। फिलहाल, उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और अब मामला पूरी तरह से शीर्ष अदालत के विचाराधीन है।