Livebharatsamachar ब्यूरो: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने दलित मजदूर गुलजार सिंह की संदिग्ध मौत के मामले में पंजाब सरकार को कड़ा निर्देश जारी किया है। अदालत ने राज्य सरकार से इस पूरे घटनाक्रम पर एक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। यह मामला एक जनहित याचिका (PIL) के जरिए हाईकोर्ट पहुंचा है, जिसमें मामले की सीबीआई जांच की मांग की गई है।
क्या है पूरा मामला?
पीड़ित गुलजार सिंह, जो कि एक दलित मजदूर थे, ने कथित तौर पर जहर खाकर अपनी जान दे दी थी। इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब यह बात सामने आई कि मरने से पहले दिए गए अपने बयान (डाइंग डिक्लेरेशन) में गुलजार सिंह ने एक कैबिनेट मंत्री और गांव के सरपंच का नाम लिया था। आरोप है कि इन प्रभावशाली लोगों के दबाव और प्रताड़ना के कारण मजदूर को यह आत्मघाती कदम उठाना पड़ा।
अदालत का रुख और निर्देश
सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार से अब तक हुई जांच का ब्यौरा मांगा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जांच की वर्तमान स्थिति क्या है और अब तक किन बिंदुओं पर कार्रवाई की गई है, इसकी जानकारी 6 अक्टूबर तक हर हाल में पेश की जानी चाहिए।
अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह इस मामले में अब तक की गई जांच की स्थिति रिपोर्ट 6 अक्टूबर तक दाखिल करे, ताकि मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।
मुख्य बिंदु
- दलित मजदूर गुलजार सिंह की मौत के मामले में हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा।
- मृतक के कथित डाइंग डिक्लेरेशन में मंत्री और सरपंच का नाम शामिल होने का दावा।
- मामले की सीबीआई जांच के लिए दायर की गई है जनहित याचिका।
- हाईकोर्ट ने 6 अक्टूबर तक स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का दिया आदेश।
इस मामले पर पूरे राज्य की निगाहें टिकी हैं, क्योंकि इसमें एक मंत्री का नाम आने से राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। अब देखना यह होगा कि 6 अक्टूबर को सरकार की ओर से पेश की जाने वाली रिपोर्ट में क्या खुलासे होते हैं और क्या अदालत इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का निर्णय लेती है।