Livebharatsamachar ब्यूरो: असम में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ के मद्देनजर राज्य सरकार और जनगणना विभाग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए प्रभावित जिलों में हाउसलिस्टिंग और आवास जनगणना की समय सीमा को आगे बढ़ा दिया है। इस फैसले से उन हजारों परिवारों को बड़ी राहत मिली है, जो प्राकृतिक आपदा के कारण अपने घरों से विस्थापित हो गए थे या जिनके दस्तावेज बाढ़ के पानी में नष्ट हो गए थे।
प्रशासनिक तैयारी और राहत
असम के कई जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई थी, जिसके कारण सामान्य जनजीवन और प्रशासनिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई थीं। अधिकारियों का कहना है कि लोगों की सुरक्षा और उनकी सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है ताकि कोई भी परिवार इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया से वंचित न रहे।
असम सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य स्थिति बहाल करना हमारी प्राथमिकता है। हाउसलिस्टिंग के लिए अतिरिक्त समय देने से फील्ड कर्मचारियों को डेटा एकत्र करने में आसानी होगी और प्रभावित लोगों को अपने दस्तावेज जुटाने का पर्याप्त अवसर मिलेगा।’
मुख्य बिंदु
- बाढ़ प्रभावित जिलों में हाउसलिस्टिंग की प्रक्रिया अब नई समय सीमा के भीतर पूरी की जाएगी।
- विस्थापित परिवारों को अपने अस्थायी ठिकानों से पंजीकरण कराने की सुविधा दी गई है।
- स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए विशेष शिविर लगाएं।
- डेटा संग्रह के दौरान पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त पर्यवेक्षकों की तैनाती की गई है।
आगे की राह
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह विस्तार केवल उन विशिष्ट क्षेत्रों के लिए है जहां बाढ़ का प्रभाव सबसे अधिक रहा है। राज्य के अन्य हिस्सों में जनगणना का कार्य निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही जारी रहेगा। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे इस प्रक्रिया में सहयोग करें और अपने सही विवरण दर्ज कराएं ताकि भविष्य की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उन तक सही ढंग से पहुंच सके।