लाइव भारत समाचार में आपका स्वागत है

Livebharatsamachar ब्यूरो: इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने देश की शिक्षा प्रणाली में बड़े बदलावों का ऐलान किया है, जिसका उद्देश्य सांस्कृतिक एकीकरण और राष्ट्रीय पहचान को मजबूत करना है। सरकार ने स्कूलों में चेहरा ढंकने वाले परिधानों, जैसे बुर्का और नकाब पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है।

कक्षाओं में विदेशी छात्रों की संख्या पर सीमा

इस नई नीति के तहत, इटली के स्कूलों में विदेशी छात्रों की संख्या को सीमित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि कक्षाओं में विदेशी मूल के छात्रों की अत्यधिक संख्या से स्थानीय इतालवी बच्चे खुद को अपने ही देश में अल्पसंख्यक महसूस करने लगे हैं। इस कदम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इतालवी संस्कृति और भाषा का प्रभाव स्कूलों में बना रहे।

अभिभावकों के लिए इतालवी भाषा अनिवार्य

मेलोनी सरकार ने एक और महत्वपूर्ण शर्त रखी है, जिसके तहत विदेशी छात्रों के माता-पिता को इतालवी भाषा सीखना अनिवार्य होगा। प्रशासन का तर्क है कि यदि अभिभावक देश की मुख्य भाषा नहीं जानते, तो वे अपने बच्चों के एकीकरण की प्रक्रिया में बाधा बनते हैं।

सरकार का स्पष्ट मानना है कि स्कूलों को इतालवी मूल्यों का केंद्र होना चाहिए, जहाँ हर छात्र देश की संस्कृति और भाषा के साथ गहराई से जुड़ सके।

प्रमुख बिंदु:

इस निर्णय को इटली में दक्षिणपंथी राजनीति की एक और बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ मेलोनी लगातार 'इटली पहले' की नीति पर काम कर रही हैं। हालांकि, इस फैसले पर मानवाधिकार संगठनों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आने की भी संभावना जताई जा रही है।

रविवार, 20 सितम्बर , 2026

इटली का बड़ा फैसला: स्कूलों में बुर्का-हिजाब पर प्रतिबंध, विदेशी छात्रों की संख्या भी सीमित

Livebharatsamachar ब्यूरो: इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने देश की शिक्षा प्रणाली में बड़े बदलावों का ऐलान किया है, जिसका उद्देश्य सांस्कृतिक एकीकरण और राष्ट्रीय पहचान को मजबूत करना है। सरकार ने स्कूलों में चेहरा ढंकने वाले परिधानों, जैसे बुर्का और नकाब पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है।

कक्षाओं में विदेशी छात्रों की संख्या पर सीमा

इस नई नीति के तहत, इटली के स्कूलों में विदेशी छात्रों की संख्या को सीमित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि कक्षाओं में विदेशी मूल के छात्रों की अत्यधिक संख्या से स्थानीय इतालवी बच्चे खुद को अपने ही देश में अल्पसंख्यक महसूस करने लगे हैं। इस कदम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इतालवी संस्कृति और भाषा का प्रभाव स्कूलों में बना रहे।

अभिभावकों के लिए इतालवी भाषा अनिवार्य

मेलोनी सरकार ने एक और महत्वपूर्ण शर्त रखी है, जिसके तहत विदेशी छात्रों के माता-पिता को इतालवी भाषा सीखना अनिवार्य होगा। प्रशासन का तर्क है कि यदि अभिभावक देश की मुख्य भाषा नहीं जानते, तो वे अपने बच्चों के एकीकरण की प्रक्रिया में बाधा बनते हैं।

सरकार का स्पष्ट मानना है कि स्कूलों को इतालवी मूल्यों का केंद्र होना चाहिए, जहाँ हर छात्र देश की संस्कृति और भाषा के साथ गहराई से जुड़ सके।

प्रमुख बिंदु:

  • स्कूलों में बुर्का और नकाब पहनने पर पूर्ण प्रतिबंध।
  • कक्षाओं में विदेशी छात्रों के नामांकन के लिए निश्चित कोटा।
  • विदेशी छात्रों के अभिभावकों के लिए इतालवी भाषा का ज्ञान अनिवार्य।
  • सांस्कृतिक एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए नई गाइडलाइंस।

इस निर्णय को इटली में दक्षिणपंथी राजनीति की एक और बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ मेलोनी लगातार ‘इटली पहले’ की नीति पर काम कर रही हैं। हालांकि, इस फैसले पर मानवाधिकार संगठनों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आने की भी संभावना जताई जा रही है।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *