Livebharatsamachar ब्यूरो: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग द्वारा की जा रही मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर तीखा प्रहार किया है। खड़गे ने इस प्रक्रिया को ‘फ्रेंकेंस्टीन मॉन्स्टर’ करार देते हुए इसे भारतीयों को मताधिकार से वंचित करने का एक सुनियोजित तरीका बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग की यह कवायद लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने वाली है।
विपक्ष का गंभीर आरोप
खड़गे ने कहा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के नाम पर जिस तरह से नामों को हटाया जा रहा है, वह बेहद चिंताजनक है। उन्होंने इसे एक ऐसी व्यवस्था बताया है जो अपने ही नागरिकों के खिलाफ काम कर रही है। कांग्रेस का आरोप है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है और इसका सीधा असर आम जनता के वोटिंग अधिकारों पर पड़ रहा है।
यह प्रक्रिया न केवल त्रुटिपूर्ण है, बल्कि यह भारतीयों को मताधिकार से वंचित करने का एक खतरनाक उपकरण बन गई है। इसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
दिग्गज नेता भी दायरे में
इस विवादित पुनरीक्षण प्रक्रिया के कारण कई बड़े राजनेता भी प्रभावित हुए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, लालकृष्ण आडवाणी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर जैसे वरिष्ठ नेताओं को भी इस प्रक्रिया के दौरान नोटिस प्राप्त हुए हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि सत्यापन की प्रक्रिया में गंभीर खामियां हैं, जिसके कारण देश के शीर्ष नेतृत्व को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मुख्य बिंदु:
- चुनाव आयोग की मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया पर विपक्ष का कड़ा विरोध।
- मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे ‘फ्रेंकेंस्टीन मॉन्स्टर’ की संज्ञा दी।
- लालकृष्ण आडवाणी और एस. जयशंकर जैसे नेताओं को भी नोटिस मिलने की चर्चा।
- अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 4 नवंबर को निर्धारित है।
चुनाव आयोग फिलहाल अपनी सत्यापन प्रथाओं को लेकर राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर दबाव में है। अब सभी की निगाहें 4 नवंबर पर टिकी हैं, जब अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या आयोग इन आपत्तियों के बाद अपनी प्रक्रिया में कोई सुधार करता है या नहीं।