Livebharatsamachar ब्यूरो: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्य को नशामुक्त बनाने के अपने संकल्प को और अधिक व्यापक और आक्रामक रूप दे दिया है। सरकार ने अब केवल पुलिसिया कार्रवाई तक सीमित न रहकर, नशा विरोधी अभियान को एक जन-आंदोलन में बदलने की रणनीति तैयार की है। इस नई पहल का मुख्य उद्देश्य न केवल तस्करी को रोकना है, बल्कि जड़ से इस समस्या को खत्म करने के लिए सामाजिक और शैक्षणिक स्तर पर जागरूकता फैलाना है।
स्कूलों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी
राज्य सरकार की नई नीति के तहत स्कूलों को नशा विरोधी अभियान का केंद्र बनाया जा रहा है। छात्रों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में शिक्षित करने के लिए विशेष पाठ्यक्रम और कार्यशालाएं शुरू की गई हैं। मुख्यमंत्री का मानना है कि यदि युवा पीढ़ी को शुरुआत से ही जागरूक किया जाए, तो नशे की लत को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इसके अलावा, राज्य भर में युवा क्लबों को सक्रिय किया जा रहा है ताकि वे अपने समुदायों में निगरानी रख सकें।
पुलिस की सख्ती और बड़ी बरामदगी
प्रशासनिक स्तर पर पुलिस विभाग को पूरी छूट दी गई है। पिछले कुछ महीनों में राज्य भर में नशा तस्करों के खिलाफ बड़े पैमाने पर छापेमारी की गई है, जिसके परिणामस्वरूप भारी मात्रा में नशीले पदार्थों की बरामदगी हुई है और सैकड़ों तस्करों को सलाखों के पीछे भेजा गया है।
सरकार का लक्ष्य न केवल तस्करों को पकड़ना है, बल्कि नशे के शिकार हुए युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाना भी है। हमारी रणनीति ‘नशा रोको और नशा छोड़ो’ के दोहरे सिद्धांत पर आधारित है।
उपचार सुविधाओं का विस्तार
नशे की लत से जूझ रहे लोगों के लिए सरकार ने ओट (OOAT) क्लीनिकों और पुनर्वास केंद्रों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की है। इन केंद्रों में बेहतर सुविधाओं और डॉक्टरों की उपलब्धता के कारण उपचार के लिए आने वाले मरीजों की संख्या में भारी उछाल देखा गया है। सरकार का दावा है कि अब उपचार तक पहुंच पहले से कहीं अधिक सुलभ हो गई है।
अभियान के मुख्य बिंदु:
- स्कूलों में विशेष जागरूकता अभियान और नशा विरोधी समितियां।
- स्थानीय स्तर पर सामुदायिक निगरानी को बढ़ावा देना।
- नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और संपत्ति की कुर्की।
- उपचार केंद्रों (Rehab Centers) का आधुनिकीकरण और विस्तार।
- नशा पीड़ितों के लिए काउंसलिंग और कौशल विकास कार्यक्रम।