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Livebharatsamachar ब्यूरो: दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर ट्रैफिक व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए लगाए गए 'स्मार्ट' सिग्नल फिलहाल केवल नाम के साबित हो रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, क्षेत्र के 141 प्रमुख चौराहों पर लगे ये आधुनिक सिग्नल पीक आवर्स के दौरान भी प्री-सेट टाइमिंग पर चल रहे हैं, जिससे वाहन चालकों को घंटों जाम में फंसना पड़ रहा है।

स्मार्ट तकनीक पर भारी पड़ रही पुरानी व्यवस्था

स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (STMS) का मुख्य उद्देश्य सेंसर के जरिए ट्रैफिक के दबाव को भांपकर सिग्नल की अवधि को बदलना था। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि अधिकांश चौराहों पर ये सिस्टम या तो बंद पड़े हैं या फिर इन्हें मैन्युअल रूप से फिक्स्ड टाइमर पर सेट कर दिया गया है। इसका सीधा असर ऑफिस जाने वाले लोगों और स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है, जिन्हें रेड लाइट पर लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता है।

विशेषज्ञों की राय और अधिकारियों का पक्ष

ट्रैफिक विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सेंसर आधारित डेटा का वास्तविक समय में उपयोग नहीं होगा, तब तक स्मार्ट सिग्नल का कोई लाभ नहीं मिलेगा। सिस्टम को नियमित रखरखाव और सॉफ्टवेयर अपडेट की सख्त जरूरत है।

ट्रैफिक विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि तकनीकी खामियों और सेंसर में खराबी के कारण कई बार सिस्टम को प्री-सेट मोड पर डालना पड़ता है ताकि ट्रैफिक पूरी तरह से ठप न हो जाए। विभाग अब इन 141 चौराहों के ऑडिट की योजना बना रहा है।

प्रमुख समस्याएं जो सामने आई हैं:

आने वाले दिनों में प्रशासन इन चौराहों पर एआई-आधारित कैमरों को अपग्रेड करने की तैयारी कर रहा है, ताकि ट्रैफिक का दबाव कम किया जा सके। तब तक, वाहन चालकों को रेंगती हुई रफ्तार के साथ ही सफर तय करना होगा।

सोमवार, 21 सितम्बर , 2026

NCR में स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल बेअसर: 141 चौराहों पर जाम से जूझ रहे वाहन चालक

Livebharatsamachar ब्यूरो: दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर ट्रैफिक व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए लगाए गए ‘स्मार्ट’ सिग्नल फिलहाल केवल नाम के साबित हो रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, क्षेत्र के 141 प्रमुख चौराहों पर लगे ये आधुनिक सिग्नल पीक आवर्स के दौरान भी प्री-सेट टाइमिंग पर चल रहे हैं, जिससे वाहन चालकों को घंटों जाम में फंसना पड़ रहा है।

स्मार्ट तकनीक पर भारी पड़ रही पुरानी व्यवस्था

स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (STMS) का मुख्य उद्देश्य सेंसर के जरिए ट्रैफिक के दबाव को भांपकर सिग्नल की अवधि को बदलना था। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि अधिकांश चौराहों पर ये सिस्टम या तो बंद पड़े हैं या फिर इन्हें मैन्युअल रूप से फिक्स्ड टाइमर पर सेट कर दिया गया है। इसका सीधा असर ऑफिस जाने वाले लोगों और स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है, जिन्हें रेड लाइट पर लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता है।

विशेषज्ञों की राय और अधिकारियों का पक्ष

ट्रैफिक विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सेंसर आधारित डेटा का वास्तविक समय में उपयोग नहीं होगा, तब तक स्मार्ट सिग्नल का कोई लाभ नहीं मिलेगा। सिस्टम को नियमित रखरखाव और सॉफ्टवेयर अपडेट की सख्त जरूरत है।

ट्रैफिक विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि तकनीकी खामियों और सेंसर में खराबी के कारण कई बार सिस्टम को प्री-सेट मोड पर डालना पड़ता है ताकि ट्रैफिक पूरी तरह से ठप न हो जाए। विभाग अब इन 141 चौराहों के ऑडिट की योजना बना रहा है।

प्रमुख समस्याएं जो सामने आई हैं:

  • सेंसर का समय पर डेटा न भेज पाना।
  • ट्रैफिक लोड के अनुसार सिग्नल की अवधि में बदलाव न होना।
  • मेंटेनेंस की कमी के कारण तकनीकी उपकरणों का खराब होना।
  • मैन्युअल हस्तक्षेप से सिस्टम की स्मार्ट कार्यक्षमता का खत्म होना।

आने वाले दिनों में प्रशासन इन चौराहों पर एआई-आधारित कैमरों को अपग्रेड करने की तैयारी कर रहा है, ताकि ट्रैफिक का दबाव कम किया जा सके। तब तक, वाहन चालकों को रेंगती हुई रफ्तार के साथ ही सफर तय करना होगा।

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