Livebharatsamachar ब्यूरो: वैश्विक कूटनीति के मंच पर भारत की बढ़ती धमक का एक और प्रमाण सामने आया है। हाल ही में चार प्रमुख यूरोपीय देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का खुलकर समर्थन किया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस घटनाक्रम को भारत की विदेश नीति के लिए एक ‘ऐतिहासिक’ क्षण करार दिया है।
वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती स्वीकार्यता
लंबे समय से भारत संयुक्त राष्ट्र के ढांचे में सुधार और सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट की मांग करता रहा है। भारत का तर्क है कि बदलती दुनिया में 1945 के दौर की व्यवस्था अब अप्रासंगिक हो चुकी है। अब चार यूरोपीय देशों द्वारा इस समर्थन ने भारत की दावेदारी को नई ऊर्जा दी है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने बयान में कहा, ‘यह समर्थन न केवल भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को दर्शाता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि दुनिया अब भारत को एक जिम्मेदार और अनिवार्य वैश्विक शक्ति के रूप में देख रही है।’
प्रमुख बिंदु: क्यों महत्वपूर्ण है यह समर्थन?
- बहुपक्षीय कूटनीति: यह समर्थन भारत की उस कूटनीतिक मेहनत का परिणाम है, जिसमें उसने वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज बनने का प्रयास किया है।
- सुरक्षा परिषद में सुधार: भारत का मानना है कि सुरक्षा परिषद का विस्तार न होने से इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।
- रणनीतिक साझेदारी: यूरोपीय देशों के साथ भारत के गहरे होते आर्थिक और रणनीतिक संबंध इस समर्थन के पीछे एक बड़ी वजह माने जा रहे हैं।
आगे की राह
हालांकि, सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए केवल कुछ देशों का समर्थन पर्याप्त नहीं है, क्योंकि इसके लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर में व्यापक बदलाव की आवश्यकता है। फिर भी, प्रमुख वैश्विक शक्तियों का भारत के पक्ष में खड़ा होना इस बात का संकेत है कि भारत की दावेदारी को अब नजरअंदाज करना नामुमकिन है। आने वाले समय में भारत इस समर्थन को अन्य सदस्य देशों के बीच ले जाने की रणनीति पर काम करेगा।