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Livebharatsamachar ब्यूरो: आईआईटी बॉम्बे में छात्र साहिल वाकोडे की दुखद आत्महत्या के मामले ने एक बार फिर शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और भेदभाव के मुद्दों को लेकर बहस छेड़ दी है। इस मामले में अब संस्थान के एक वरिष्ठ प्रोफेसर ने बड़ा खुलासा करते हुए स्पष्ट किया है कि साहिल की ओर से एससी/एसटी सेल में किसी भी प्रकार की शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी।

प्रशासन का पक्ष और जांच की स्थिति

संस्थान के अधिकारियों का कहना है कि साहिल वाकोडे के मामले में आंतरिक जांच की प्रक्रिया जारी है, लेकिन अब तक के रिकॉर्ड के अनुसार, छात्र ने कभी भी भेदभाव या उत्पीड़न को लेकर एससी/एसटी सेल से संपर्क नहीं किया था। प्रोफेसर ने बताया कि संस्थान में छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए एक पारदर्शी तंत्र मौजूद है, लेकिन इस विशेष मामले में कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई थी।

संस्थान के एक प्रवक्ता ने कहा, 'हम साहिल के निधन से अत्यंत दुखी हैं। हमारी प्रारंभिक जांच और रिकॉर्ड की समीक्षा से पता चला है कि एससी/एसटी सेल को छात्र की ओर से कोई शिकायत नहीं मिली थी। हम इस मामले की गंभीरता को समझते हैं और पूरी जांच में सहयोग कर रहे हैं।'

छात्र संगठनों का विरोध

इस घटना के बाद से ही छात्र संगठनों ने संस्थान की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। छात्रों का आरोप है कि परिसर में जातिगत भेदभाव एक वास्तविकता है जिसे अक्सर दबा दिया जाता है। प्रदर्शनकारी छात्रों की मांग है कि इस मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच हो और परिसर में छात्रों के लिए एक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जाए।

मामले के मुख्य बिंदु:

फिलहाल, यह मामला अब कानूनी और प्रशासनिक जांच के दायरे में है। शिक्षाविदों का मानना है कि आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में छात्रों के मानसिक दबाव को कम करने के लिए काउंसलिंग और संवाद की प्रक्रिया को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

मंगलवार, 22 सितम्बर , 2026

IIT-बॉम्बे छात्र आत्महत्या मामला: SC/ST सेल को नहीं मिली थी साहिल वाकोडे की कोई शिकायत

Livebharatsamachar ब्यूरो: आईआईटी बॉम्बे में छात्र साहिल वाकोडे की दुखद आत्महत्या के मामले ने एक बार फिर शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और भेदभाव के मुद्दों को लेकर बहस छेड़ दी है। इस मामले में अब संस्थान के एक वरिष्ठ प्रोफेसर ने बड़ा खुलासा करते हुए स्पष्ट किया है कि साहिल की ओर से एससी/एसटी सेल में किसी भी प्रकार की शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी।

प्रशासन का पक्ष और जांच की स्थिति

संस्थान के अधिकारियों का कहना है कि साहिल वाकोडे के मामले में आंतरिक जांच की प्रक्रिया जारी है, लेकिन अब तक के रिकॉर्ड के अनुसार, छात्र ने कभी भी भेदभाव या उत्पीड़न को लेकर एससी/एसटी सेल से संपर्क नहीं किया था। प्रोफेसर ने बताया कि संस्थान में छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए एक पारदर्शी तंत्र मौजूद है, लेकिन इस विशेष मामले में कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई थी।

संस्थान के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘हम साहिल के निधन से अत्यंत दुखी हैं। हमारी प्रारंभिक जांच और रिकॉर्ड की समीक्षा से पता चला है कि एससी/एसटी सेल को छात्र की ओर से कोई शिकायत नहीं मिली थी। हम इस मामले की गंभीरता को समझते हैं और पूरी जांच में सहयोग कर रहे हैं।’

छात्र संगठनों का विरोध

इस घटना के बाद से ही छात्र संगठनों ने संस्थान की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। छात्रों का आरोप है कि परिसर में जातिगत भेदभाव एक वास्तविकता है जिसे अक्सर दबा दिया जाता है। प्रदर्शनकारी छात्रों की मांग है कि इस मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच हो और परिसर में छात्रों के लिए एक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जाए।

मामले के मुख्य बिंदु:

  • साहिल वाकोडे ने आईआईटी बॉम्बे के छात्रावास में अपनी जान दी।
  • संस्थान के अनुसार, एससी/एसटी सेल को कोई पूर्व शिकायत नहीं मिली थी।
  • छात्र संगठनों ने परिसर में भेदभाव के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है।
  • प्रशासन ने मामले की गहन जांच का आश्वासन दिया है।

फिलहाल, यह मामला अब कानूनी और प्रशासनिक जांच के दायरे में है। शिक्षाविदों का मानना है कि आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में छात्रों के मानसिक दबाव को कम करने के लिए काउंसलिंग और संवाद की प्रक्रिया को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

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