Livebharatsamachar ब्यूरो: ब्रिटिश फूड क्रिएटर जूलियस फिडलर ने हाल ही में भारत की अपनी यात्रा के दौरान भारतीय व्यंजनों की विविधता और उसमें छिपे ‘वीगन’ विकल्पों की जमकर तारीफ की है। फिडलर ने भारत को दुनिया का ‘सबसे बड़ा वीगन पैराडाइज’ करार दिया है, जो वैश्विक स्तर पर भारतीय खान-पान की एक नई पहचान को रेखांकित करता है।
परंपरा और स्वाद का अनूठा संगम
जूलियस फिडलर का मानना है कि भारत में वीगन (पौधों पर आधारित) भोजन ढूंढने के लिए किसी विशेष लेबल की आवश्यकता नहीं है। उनके अनुसार, भारतीय रसोई में सदियों से ऐसे व्यंजन मौजूद हैं जो स्वाभाविक रूप से वीगन हैं। फिडलर ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में धर्म और परंपरा का गहरा प्रभाव रहा है, जिसके कारण शाकाहार यहाँ जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा है।
स्ट्रीट फूड में छिपा है वीगन खजाना
फिडलर ने विशेष रूप से भारतीय स्ट्रीट फूड की सराहना की है। उन्होंने पाया कि कई लोकप्रिय व्यंजन, जो स्वाद में लाजवाब हैं, वे बिना किसी डेयरी उत्पाद या पशु-आधारित सामग्री के तैयार किए जाते हैं।
भारतीय व्यंजनों की सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि यहाँ वीगन होना कोई आधुनिक चलन नहीं, बल्कि एक पुरानी परंपरा है। यहाँ के स्ट्रीट फूड में ऐसे कई विकल्प मौजूद हैं जो अनजाने में ही वीगन डाइट के मानकों को पूरा करते हैं।
प्रमुख बिंदु:
- भारत में पारंपरिक रूप से बड़ी संख्या में व्यंजन पौधों पर आधारित हैं।
- धार्मिक मान्यताओं के कारण भारतीय भोजन में शाकाहार को प्राथमिकता दी जाती है।
- स्ट्रीट फूड में वीगन विकल्पों की प्रचुरता इसे पर्यटकों के लिए स्वर्ग बनाती है।
- भारतीय गैस्ट्रोनॉमी में वीगन डाइट को अब एक नई वैश्विक पहचान मिल रही है।
फिडलर का यह अवलोकन न केवल भारतीय भोजन की विविधता को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि भारत का पारंपरिक खान-पान आधुनिक स्वास्थ्य मानकों और वीगन जीवनशैली के लिए कितना अनुकूल है।