Livebharatsamachar ब्यूरो: देश की राजनीति में चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। बिहार, महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में हालिया चुनावी परिणामों और प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। विपक्ष ने मांग की है कि इन राज्यों में फिर से मतदान कराया जाए।
तेजस्वी यादव का सीधा हमला
राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग को सीधे तौर पर निशाने पर लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग भारतीय जनता पार्टी के प्रभाव में काम कर रहा है ताकि उन्हें चुनावी जीत दिलाई जा सके। तेजस्वी ने विशेष रूप से मतदान रिकॉर्ड के संरक्षण की अवधि में किए गए बदलावों पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए एक खतरनाक संकेत बताया है।
विपक्ष की एकजुटता और मांग
विपक्षी गठबंधन के अन्य नेताओं ने भी इस मुद्दे पर मोर्चा खोल दिया है। डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। स्टालिन का कहना है कि चुनावी विसंगतियों के कारण आयोग की विश्वसनीयता पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। वहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी आयोग की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं।
विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता का अभाव है और मतदान सूचियों के प्रबंधन में भारी गड़बड़ियां की गई हैं, जिससे जनादेश प्रभावित हुआ है।
मुख्य बिंदु
- विपक्ष ने बिहार, महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा और पश्चिम बंगाल में नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की है।
- मतदान रिकॉर्ड के संरक्षण की अवधि में बदलाव को लेकर आयोग से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
- डीएमके ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर मामले को और तूल दे दिया है।
- ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के प्रबंधन को पूरी तरह विफल करार दिया है।
फिलहाल, चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह मुद्दा आने वाले दिनों में और अधिक गरमाने के आसार हैं।