Livebharatsamachar ग्राउंड रिपोर्ट: यूरोप की सबसे बड़ी सेमीकंडक्टर उपकरण निर्माता कंपनी ASML ने यूरोपीय बाजार की वर्तमान स्थिति को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर बयान दिया है। कंपनी के शीर्ष अधिकारियों ने खुलासा किया है कि वर्तमान में यूरोप के भीतर एक भी चिप बनाने वाली मशीन नहीं बिक रही है। इस स्थिति के लिए सीधे तौर पर महाद्वीप में पूंजीगत निवेश की भारी कमी और नए सेमीकंडक्टर कारखानों के निर्माण में ठहराव को जिम्मेदार ठहराया गया है। जहां एक ओर अमेरिका, चीन और भारत जैसी वैश्विक महाशक्तियां अत्याधुनिक तकनीक हासिल करने के लिए ASML के साथ अनुबंध करने और अपनी जमीन पर कारखाने लगाने के लिए पुरजोर प्रयास कर रही हैं, वहीं यूरोप की अपनी ही नीतियां इस रेस में पिछड़ती हुई नजर आ रही हैं। ब्रसेल्स द्वारा पेश किया गया यूरोपीय संघ (EU) का महत्वाकांक्षी ‘चिप्स एक्ट’ भी वर्ष 2030 तक वैश्विक चिप बाजार में यूरोप की हिस्सेदारी को दोगुना करने के अपने निर्धारित लक्ष्यों से काफी पीछे छूटता हुआ प्रतीत हो रहा है। इस पूरी स्थिति ने यूरोपीय तकनीकी और आर्थिक गलियारों में खलबली मचा दी है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर उद्योग आधुनिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है।
ग्राउंड से मुख्य जानकारी (Key Takeaways)
- ASML के कार्यकारी फ्रैंक हीम्सकर्क के अनुसार, यूरोप में वर्तमान में कोई नई चिप निर्माण मशीन नहीं बेची जा रही है।
- महाद्वीप में नए सेमीकंडक्टर फैब्स (कारखानों) की स्थापना के लिए पर्याप्त निवेश का भारी अभाव देखा जा रहा है।
- अमेरिका, चीन और भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अपनी चिप निर्माण क्षमताओं को बढ़ाने के लिए आक्रामक रूप से निवेश कर रही हैं।
- यूरोपीय संघ का ‘चिप्स एक्ट’ अपने 2030 के लक्ष्यों को पूरा करने में असफल साबित हो रहा है।
- कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) क्रिस्टोफ फूक्वेट और मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) रोजर डैसेन ने ब्रसेल्स की नीतियों पर गहरी चिंता जताई है।
घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्योरा (Chronological Event Breakdown)
वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार में एकाधिकार जैसी स्थिति रखने वाली डच कंपनी ASML के लिए यूरोपीय बाजार का सूखा पड़ना एक बहुत बड़ा विरोधाभास है। वैश्विक स्तर पर जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इलेक्ट्रिक वाहनों और उन्नत डिजिटल उपकरणों के कारण चिप्स की मांग आसमान छू रही है, तब यूरोप में इस दिशा में सन्नाटा पसरा हुआ है। ASML के कार्यकारी फ्रैंक हीम्सकर्क ने एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक मंच पर इस बात को स्वीकार किया कि यूरोप की नीतियां निवेशकों को आकर्षित करने में विफल रही हैं। घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब यूरोपीय आयोग ने महाद्वीप को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए ‘यूरोपियन चिप्स एक्ट’ की घोषणा की थी, जिसके तहत अरबों यूरो का निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि, लाल फीताशाही, जटिल नियमों और अत्यधिक प्रशासनिक अनुमति प्रक्रियाओं के कारण निवेशकों का उत्साह ठंडा पड़ गया। दूसरी ओर, अमेरिका के ‘चिप्स एंड साइंस एक्ट’ और भारत की उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं ने वैश्विक स्तर पर निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। परिणामस्वरूप, ASML के उपकरण एशिया और उत्तरी अमेरिका के बाजारों में धड़ल्ले से बिक रहे हैं, जबकि इसके अपने घरेलू बाजार यानी यूरोप में सन्नाटा पसरा हुआ है।
प्रशासनिक व स्थानीय प्रतिक्रिया (Official Action & Public Reaction)
इस सनसनीखेज खुलासे के बाद ब्रसेल्स के नीति निर्माताओं और यूरोपीय संघ के अधिकारियों पर दबाव काफी बढ़ गया है। उद्योग जगत के जानकारों का मानना है कि यदि यूरोप ने अपनी नीतियों में तुरंत सुधार नहीं किया, तो वह भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था में पूरी तरह से अप्रासंगिक हो जाएगा। ASML के शीर्ष नेतृत्व ने यूरोपीय संघ की सख्त नियमों वाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) नीतियों और अत्यधिक तकनीकी संप्रभुता के दावों पर भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कंपनी का साफ कहना है कि अत्यधिक नियमों के कारण उद्योग जगत का दम घुट रहा है।
यूरोप में सेमीकंडक्टर विनिर्माण के मोर्चे पर निवेश की भारी कमी साफ दिखाई दे रही है। जब तक नए कारखाने नहीं लगेंगे और महाद्वीप में वास्तविक धरातल पर काम शुरू नहीं होगा, तब तक हमारी अत्याधुनिक मशीनें स्थानीय स्तर पर नहीं बिक सकेंगी। वर्तमान में यूरोप अपनी ही नीतियों के मकड़जाल में उलझकर रह गया है, जबकि वैश्विक शक्तियां हमसे बहुत आगे निकल चुकी हैं।
स्थानीय तकनीकी विश्लेषकों और औद्योगिक संघों ने भी सरकारों से आग्रह किया है कि वे अमेरिकी और एशियाई मॉडलों का अध्ययन करें और कर रियायतें तथा आसान ऋण उपलब्ध कराएं ताकि यूरोपीय धरती पर चिप निर्माण संयंत्रों की स्थापना में तेजी लाई जा सके।
आगे क्या? (What Lies Ahead)
आगामी समय में यूरोपीय संघ पर अपनी सेमीकंडक्टर नीतियों की समीक्षा करने का भारी दबाव रहेगा। यदि 2030 तक वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लक्ष्य को हासिल करना है, तो ब्रसेल्स को अपने ‘चिप्स एक्ट’ में बड़े बदलाव करने होंगे। ASML जैसी वैश्विक दिग्गज कंपनी की चेतावनी को यदि नजरअंदाज किया गया, तो यूरोप चिप निर्माण के क्षेत्र में पूरी तरह से बाहरी ताकतों पर निर्भर हो जाएगा, जिससे उसकी आर्थिक और सामरिक सुरक्षा दोनों पर गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है। आने वाले महीनों में यूरोपीय देशों की सरकारों और उद्योग जगत के बीच उच्च स्तरीय बैठकों का दौर शुरू होने की पूरी संभावना है ताकि इस मंदी से उबारा जा सके।