Livebharatsamachar विशेष कवरेज: मध्य पूर्व में जारी भयंकर संघर्ष और गाजा पट्टी में मची तबाही के बीच अब इजरायल के भीतर से ही युद्ध संचालन और नीतियों पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। इजरायल के पूर्व बंधक वार्ताकार मेजर जनरल नित्जान एलोन ने एक सनसनीखेज और बेहद अहम खुलासा किया है, जिससे देश और दुनिया की राजनीति में भूचाल आ गया है। उनका कहना है कि गाजा युद्ध को आज से एक साल पहले ही सफलतापूर्वक समाप्त किया जा सकता था। यदि उस समय राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई जाती और सही दिशा में समझौते के प्रयास किए जाते, तो अनगिनत बेकसूर नागरिकों और बंधकों की कीमती जानें बचाई जा सकती थीं। इस खुलासे के बाद युद्ध की रणनीतिक विफलता पर एक बार फिर से वैश्विक स्तर पर बहस छिड़ गई है और नेतन्याहू सरकार कटघरे में खड़ी नजर आ रही है।
प्रमुख आकर्षण और बिंदु (Highlights)
- मेजर जनरल नित्जान एलोन ने दावा किया है कि गाजा युद्ध एक साल पहले ही खत्म हो सकता था।
- उनका मानना है कि सही समय पर बातचीत करने से अनगिनत बंधकों और नागरिकों की जान बचाई जा सकती थी।
- हमास पर ‘पूर्ण विजय’ हासिल करने से पहले बातचीत न करने की जिद को उन्होंने एक बड़ी रणनीतिक भूल बताया।
- इजरायली सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व के बीच आंतरिक कलह और रणनीतिक मतभेद अब खुलकर सामने आ रहे हैं।
पूरे घटनाक्रम की कहानी (Full Story)
गाजा पट्टी में चल रहे खूनी संघर्ष को लंबा वक्त बीत चुका है और इस युद्ध ने मानवीय तबाही की एक नई दास्तां लिखी है। इस बीच, इजरायल के पूर्व बंधक वार्ताकार मेजर जनरल नित्जान एलोन ने अपनी ही सरकार की नीतियों पर तीखा प्रहार किया है। एलोन के अनुसार, इजरायली नेतृत्व ने शुरुआत से ही एक सख्त और अदूरदर्शी रवैया अपनाया, जिसके तहत यह मान लिया गया था कि किसी भी प्रकार की कूटनीतिक बातचीत या समझौते से पहले हमास का पूरी तरह से सफाया यानी ‘पूर्ण विजय’ हासिल करना अनिवार्य है। एलोन ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यह अवधारणा पूरी तरह से त्रुटिपूर्ण और व्यावहारिक धरातल से कोसों दूर थी। इस सोच के कारण युद्ध को अनावश्यक रूप से खींचा गया, जिसका खामियाजा दोनों पक्षों के आम नागरिकों और विशेष तौर पर हमास के कब्जे में तड़प रहे इजरायली बंधकों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा। विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब इजरायल के भीतर ही प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ जनआक्रोश लगातार बढ़ रहा है। बंधकों के परिजन लगातार सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि सैन्य कार्रवाई से ज्यादा प्राथमिकता बंधकों की सुरक्षित रिابी को दी जानी चाहिए। मेजर जनरल एलोन का यह बयान इस बात की तस्दीक करता है कि अंदरखाने सैन्य और कूटनीतिक हलकों में इस बात को लेकर गहरी नाराजगी थी कि राजनीतिक कारणों से युद्ध विराम के सुनहरे अवसरों को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया।
मुख्य सवाल और उनके जवाब (Key Questions & Answers)
सवाल 1: मेजर जनरल नित्जान एलोन ने अपने बयान में मुख्य रूप से किस बात पर जोर दिया है?
जवाब: उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि अगर इजरायली नेतृत्व जिद छोड़कर एक साल पहले कूटनीतिक वार्ताओं को प्राथमिकता देता, तो युद्ध को समय से पहले समाप्त किया जा सकता था।
सवाल 2: ‘पूर्ण विजय’ के सिद्धांत को क्यों गलत बताया जा रहा है?
जवाब: हमास के पूरी तरह खात्मे का इंतजार करने की नीति के चक्कर में बंधकों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई और युद्ध लंबा खिंच गया, जिससे मानवीय संकट और अधिक गहरा गया।
इजरायल की सैन्य और कूटनीतिक प्राथमिकताओं में गंभीर खामियां थीं। यदि हमने ‘पूर्ण विजय’ की जिद के बजाय समय रहते यथार्थवादी समझौते का मार्ग चुना होता, तो आज कई परिवार अपने अपनों को खोने के दर्द से बच जाते। – मेजर जनरल नित्जान एलोन
समापन और निष्कर्ष (Conclusion)
निष्कर्षतः, मेजर जनरल नित्जान एलोन का यह बयान इजरायली इतिहास के इस काले अध्याय पर एक गहरी और गंभीर आत्ममंथन की मांग करता है। गाजा युद्ध ने केवल मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक समीकरणों को ही नहीं बदला है, बल्कि हजारों निर्दोष इंसानों की जिंदगी को लील लिया है। यदि युद्ध के शुरुआती दौर में ही राजनीतिक अहंकार को छोड़कर कूटनीतिक और मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाता, तो आज हालात कुछ और होते। आने वाले समय में इस खुलासे का इजरायली राजनीति और सैन्य नेतृत्व पर क्या असर पड़ता है, यह देखना बेहद दिलचस्प और महत्वपूर्ण होगा, लेकिन इतिहास इस बात को जरूर दर्ज करेगा कि कैसे मौकों को गंवाने के कारण शांति का मार्ग कठिन हो गया।