लाइव भारत समाचार – विशेष रिपोर्ट
संतकबीरनगर: शिक्षा के पुरोधा ‘पूर्वांचल के मालवीय’ पं. सूर्य नारायण चतुर्वेदी की 8वीं पुण्यतिथि पर उमड़ा जनसैलाब, नम आंखों से दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि
*संतकबीरनगर, 3 अक्टूबर | ब्यूरो – लाइव भारत समाचार*
संतकबीरनगर। शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम मानने वाले, पूर्वांचल में शिक्षा क्रांति के जनक और ‘पूर्वांचल के मालवीय’ के नाम से विख्यात महान शिक्षाविद पंडित सूर्य नारायण चतुर्वेदी की 8वीं पुण्यतिथि शुक्रवार को श्रद्धा, सम्मान और भावुक पलों के साथ मनाई गई। उनके पैतृक गांव भिटहा (बस्ती-संतकबीरनगर) स्थित स्मृति स्थल पर सुबह से ही लोगों का तांता लगा रहा। हजारों की संख्या में छात्र, शिक्षक, अभिभावक, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और आमजन ने नम आंखों से पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

माहौल पूरी तरह से भावुक था। हर जुबान पर एक ही बात थी – पंडित जी ने हमें अंधेरे से निकालकर रोशनी दिखाई।
*संघर्षों में तपकर बना व्यक्तित्व: पिता का साया उठा, फिर भी नहीं टूटा हौसला*
सन 1950 में बस्ती और संतकबीरनगर की सीमा पर स्थित छोटे से गांव भिटहा में जन्मे पंडित सूर्य नारायण चतुर्वेदी का बचपन अभावों में बीता। कम उम्र में ही सिर से पिता का साया उठ गया। घर की आर्थिक स्थिति कमजोर थी, लेकिन इरादे फौलाद से भी मजबूत।
उन्होंने कड़े संघर्ष, मजदूरी और तमाम कठिनाइयों के बीच अपनी उच्च शिक्षा पूरी की। जब वे पढ़ने के लिए बाहर जाते थे तो उन्होंने देखा कि गांव-गिरांव के बच्चे संसाधनों के अभाव में अशिक्षा के अंधकार में डूबे हुए हैं। इसी पीड़ा ने उनके मन में एक संकल्प पैदा किया – अगर समाज को बदलना है तो शिक्षा की ज्योति हर घर तक पहुंचानी होगी।
*30 वर्ष की उम्र में रखी गई शिक्षा क्रांति की नींव*
इस संकल्प को साकार करने के लिए मात्र 30 वर्ष की युवा अवस्था में, वर्ष 1980 में उन्होंने अपने सीमित संसाधनों से बाबा पर्वतनाथ इंटर कॉलेज की नींव रखी। उस समय यह एक छोटा सा प्रयास था, लेकिन उनकी नीयत और दूरदर्शिता ने इसे धीरे-धीरे वटवृक्ष बना दिया।
यह सिर्फ एक कॉलेज नहीं था, बल्कि पूर्वांचल में शिक्षा की एक अलख थी। इस अलख से प्रेरणा लेकर उन्होंने एक के बाद एक कई शिक्षण संस्थानों की स्थापना की –
*1. पं. अम्बिका प्रताप नारायण पी.जी. कॉलेज, बगौली, संतकबीरनगर*
*2. जी.एस. पी.जी. कॉलेज, बस्ती*
*3. बाबा पर्वतनाथ इंटर कॉलेज*
इन संस्थानों ने न केवल हजारों युवाओं को उच्च शिक्षा दी, बल्कि सैकड़ों लोगों को रोजगार भी दिया। गांव का कोई भी गरीब बच्चा पैसे के अभाव में पढ़ाई से वंचित न रहे, यह उनका मूल मंत्र था। इसी ऐतिहासिक और अतुलनीय योगदान के कारण शिक्षाविदों और आम जनता ने उन्हें सम्मान के साथ ‘पूर्वांचल का मालवीय’ की उपाधि दी, जो काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक महामना पं. मदन मोहन मालवीय जी की उपमा के समकक्ष है।
*शिक्षा के साथ राजनीति में भी दिखाई दूरदर्शिता*
पं. चतुर्वेदी मानते थे कि बिना सत्ता और नीति के समाज का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है। इसलिए उन्होंने शिक्षा के साथ-साथ राजनीति में भी अपनी दूरगामी सोच का परिचय दिया।
उन्होंने अपने भतीजे जय चौबे को खलीलाबाद विधानसभा से विधायक बनवाकर क्षेत्र की आवाज को लखनऊ तक पहुंचाया, वहीं अपने पुत्रों को नाथनगर ब्लॉक का प्रमुख बनवाकर जमीनी स्तर पर विकास कार्यों को गति दी। उनके प्रयासों से सड़क, बिजली, पानी और शिक्षा के क्षेत्र में खलीलाबाद और नाथनगर क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुए।
*विरासत को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा परिवार*
आज पंडित जी भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार और उनकी बनाई संस्थाएं आज भी जीवित हैं। उनकी विरासत को उनके दोनों यशस्वी पुत्र –
*डॉ. उदय प्रताप चतुर्वेदी और अजय प्रताप उर्फ राकेश चतुर्वेदी*
और उनकी कर्मठ बहुएं *सविता चतुर्वेदी और शिखा चतुर्वेदी* पूरी निष्ठा, सरलता और सामाजिक सरोकार के साथ आगे बढ़ा रही हैं।
परिवार आज उनके सपनों को आधुनिक स्वरूप दे रहा है:
– *सूर्या इंटरनेशनल एकेडमी (CBSE)*
– *एस.आर. इंटरनेशनल एकेडमी*
– *सूर्या लॉ कॉलेज*
– *सूर्या हॉस्पिटल और एस.आर. हॉस्पिटल*
इन संस्थानों के माध्यम से शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में भी परिवार ने एक नया मानक स्थापित किया है।
*पुण्यतिथि समारोह में उमड़े गणमान्य*
पुण्यतिथि समारोह में जिलेभर के प्रधानाचार्यों, शिक्षकों, पूर्व छात्रों, जनप्रतिनिधियों और समाज के प्रबुद्ध लोगों ने भाग लिया। सभी ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें याद किया और कहा कि पं. चतुर्वेदी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचार थे, एक संस्था थे। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरणा देता रहेगा।
रिपोर्ट:बस्ती/संतकबीरनगर ब्यूरो|लाइव भारत समाचार