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Livebharatsamachar ब्यूरो: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के अंतर्गत आने वाले नोएडा और गाजियाबाद के कई प्रमुख पार्कों में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। पार्कों में खराब स्ट्रीट लाइटें और सुरक्षा गार्ड्स की भारी कमी के कारण स्थानीय नागरिकों में चिंता का माहौल लगातार गहराता जा रहा है। स्थिति यह है कि सूर्यास्त के बाद लोग इन सार्वजनिक स्थलों पर जाने से कतराने लगे हैं, जिससे बच्चों और बुजुर्गों का टहलना मुश्किल हो गया है। पार्कों में फैली बदहाली और अंधेरे का फायदा उठाकर असामाजिक तत्वों का जमावड़ा भी शुरू हो गया है, जिससे महिलाओं और परिवारों की सुरक्षा पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। निवासियों द्वारा बार-बार संबंधित प्राधिकरणों को लिखित और मौखिक शिकायतें देने के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिसके चलते जनमानस में रोष व्याप्त है।

मुख्य बिंदु एवं हाइलाइट्स (Key Highlights)

विस्तृत समाचार एवं पूरा घटनाक्रम (Detailed Report)

एनसीआर का यह क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है और यहां आधुनिक शहरीकरण की बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं, परंतु धरातल पर बुनियादी नागरिक सुविधाएं दम तोड़ती नजर आ रही हैं। नोएडा और गाजियाबाद के विभिन्न सेक्टरों व सोसाइटियों के आसपास बने स्थानीय पार्क नागरिकों के स्वास्थ्य और मनोरंजन के प्रमुख केंद्र माने जाते हैं। सुबह और शाम के समय हजारों की संख्या में लोग इन पार्कों में वॉक करने, योग करने और अपने बच्चों के साथ समय बिताने आते हैं। हालांकि, रखरखाव के अभाव और प्रशासनिक लापरवाही के कारण इन पार्कों की स्थिति बद से बदतर हो गई है। पार्कों के भीतर लगी हाई-मास्ट लाइटें और पोल लाइट्स या तो महीनों से जली नहीं हैं या फिर तकनीकी खराबी व रखरखाव न होने के कारण पूरी तरह से टूट चुकी हैं। इसके अलावा, पार्कों की देखरेख करने वाली एजेंसियों ने सुरक्षा गार्ड्स की नियुक्ति के प्रति आंखें मूंद ली हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है।

स्थानीय आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित विकास प्राधिकरणों और नगर निगम के अधिकारियों को पत्राचार किया है, लेकिन केवल झूठे आश्वासन ही मिले हैं। पार्कों के मुख्य द्वारों पर ताले या तो लगते नहीं हैं या फिर बाउंड्री वॉल टूटी होने के कारण कोई भी आसानी से अंदर प्रवेश कर सकता है। अंधेरे का लाभ उठाकर कुछ असामाजिक तत्व वहां शराब पीने और अन्य अवैध गतिविधियों को अंजाम देते हैं, जिससे पार्क आने वाले आम नागरिकों को अक्सर अपमानजनक या डरावनी स्थितियों का सामना करना पड़ता है। महिलाओं ने विशेष रूप से चिंता व्यक्त की है कि यदि जल्द ही इन पार्कों में प्रकाश व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया और पेशेवर सुरक्षा गार्ड्स की तैनाती नहीं की गई, तो कोई बड़ी अप्रिय घटना घट सकती है। जनता का कहना है कि वे नियमित रूप से कर और मेंटेनेंस चार्ज का भुगतान करते हैं, फिर भी उन्हें बुनियादी सुरक्षा और सुविधाएं पाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

स्थानीय निवासी रमेश चंद्र ने कहा, हम पिछले छह महीनों से पार्क की टूटी हुई लाइटों और सुरक्षा गार्ड की मांग को लेकर अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। शाम के समय हमारे परिवार की महिलाएं और बुजुर्ग पार्क में जाने से डरते हैं। यदि प्रशासन ने जल्द कदम नहीं उठाया, तो हमें बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करना पड़ेगा।

भविष्य का असर एवं निष्कर्ष (Future Impact & Conclusion)

यदि नोएडा और गाजियाबाद के विकास प्राधिकरण इस गंभीर मुद्दे पर जल्द ही संज्ञान नहीं लेते हैं, तो यह लापरवाही किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। सार्वजनिक पार्कों का उद्देश्य नागरिकों को स्वस्थ वातावरण और मानसिक शांति प्रदान करना है, लेकिन सुरक्षा के अभाव में ये स्थान भय का प्रतीक बनते जा रहे हैं। प्रशासन और संबंधित विभागों को तत्काल प्रभाव से एक विशेष अभियान चलाकर सभी पार्कों की विद्युत व्यवस्था को ठीक कराना चाहिए और वहां सीसीटीवी कैमरों के साथ-साथ महिला एवं पुरुष सुरक्षा गार्डों की तैनाती सुनिश्चित करनी चाहिए। जनता के विश्वास को बहाल करने और स्मार्ट सिटी के दावों को धरातल पर उतारने के लिए अधिकारियों को संवेदनशीलता के साथ त्वरित कदम उठाने होंगे, तभी एनसीआर के इन पार्कों में एक बार फिर से सुरक्षित और खुशनुमा माहौल लौट सकेगा।

सोमवार, 5 अक्टूबर , 2026

एनसीआर के पार्कों में सुरक्षा रामभरोसे: अंधेरे और गार्ड्स की कमी से सहमे लोग, प्रशासन बेखबर

Livebharatsamachar ब्यूरो: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के अंतर्गत आने वाले नोएडा और गाजियाबाद के कई प्रमुख पार्कों में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। पार्कों में खराब स्ट्रीट लाइटें और सुरक्षा गार्ड्स की भारी कमी के कारण स्थानीय नागरिकों में चिंता का माहौल लगातार गहराता जा रहा है। स्थिति यह है कि सूर्यास्त के बाद लोग इन सार्वजनिक स्थलों पर जाने से कतराने लगे हैं, जिससे बच्चों और बुजुर्गों का टहलना मुश्किल हो गया है। पार्कों में फैली बदहाली और अंधेरे का फायदा उठाकर असामाजिक तत्वों का जमावड़ा भी शुरू हो गया है, जिससे महिलाओं और परिवारों की सुरक्षा पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। निवासियों द्वारा बार-बार संबंधित प्राधिकरणों को लिखित और मौखिक शिकायतें देने के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिसके चलते जनमानस में रोष व्याप्त है।

मुख्य बिंदु एवं हाइलाइट्स (Key Highlights)

  • नोएडा और गाजियाबाद के कई रिहायशी इलाकों के पार्कों में महीनों से लाइटें खराब पड़ी हैं।
  • शाम ढलते ही पार्कों में अंधेरा छा जाता है, जिससे सुरक्षा का बड़ा संकट पैदा हो गया है।
  • अधिकांश पार्कों में सुरक्षा गार्ड तैनात न होने के कारण असामाजिक तत्वों का दखल बढ़ गया है।
  • स्थानीय निवासियों और रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) द्वारा कई बार शिकायत देने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई है।
  • वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं के लिए पार्कों में घूमना अब असुरक्षित साबित होता जा रहा है।

विस्तृत समाचार एवं पूरा घटनाक्रम (Detailed Report)

एनसीआर का यह क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है और यहां आधुनिक शहरीकरण की बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं, परंतु धरातल पर बुनियादी नागरिक सुविधाएं दम तोड़ती नजर आ रही हैं। नोएडा और गाजियाबाद के विभिन्न सेक्टरों व सोसाइटियों के आसपास बने स्थानीय पार्क नागरिकों के स्वास्थ्य और मनोरंजन के प्रमुख केंद्र माने जाते हैं। सुबह और शाम के समय हजारों की संख्या में लोग इन पार्कों में वॉक करने, योग करने और अपने बच्चों के साथ समय बिताने आते हैं। हालांकि, रखरखाव के अभाव और प्रशासनिक लापरवाही के कारण इन पार्कों की स्थिति बद से बदतर हो गई है। पार्कों के भीतर लगी हाई-मास्ट लाइटें और पोल लाइट्स या तो महीनों से जली नहीं हैं या फिर तकनीकी खराबी व रखरखाव न होने के कारण पूरी तरह से टूट चुकी हैं। इसके अलावा, पार्कों की देखरेख करने वाली एजेंसियों ने सुरक्षा गार्ड्स की नियुक्ति के प्रति आंखें मूंद ली हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है।

स्थानीय आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित विकास प्राधिकरणों और नगर निगम के अधिकारियों को पत्राचार किया है, लेकिन केवल झूठे आश्वासन ही मिले हैं। पार्कों के मुख्य द्वारों पर ताले या तो लगते नहीं हैं या फिर बाउंड्री वॉल टूटी होने के कारण कोई भी आसानी से अंदर प्रवेश कर सकता है। अंधेरे का लाभ उठाकर कुछ असामाजिक तत्व वहां शराब पीने और अन्य अवैध गतिविधियों को अंजाम देते हैं, जिससे पार्क आने वाले आम नागरिकों को अक्सर अपमानजनक या डरावनी स्थितियों का सामना करना पड़ता है। महिलाओं ने विशेष रूप से चिंता व्यक्त की है कि यदि जल्द ही इन पार्कों में प्रकाश व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया और पेशेवर सुरक्षा गार्ड्स की तैनाती नहीं की गई, तो कोई बड़ी अप्रिय घटना घट सकती है। जनता का कहना है कि वे नियमित रूप से कर और मेंटेनेंस चार्ज का भुगतान करते हैं, फिर भी उन्हें बुनियादी सुरक्षा और सुविधाएं पाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

स्थानीय निवासी रमेश चंद्र ने कहा, हम पिछले छह महीनों से पार्क की टूटी हुई लाइटों और सुरक्षा गार्ड की मांग को लेकर अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। शाम के समय हमारे परिवार की महिलाएं और बुजुर्ग पार्क में जाने से डरते हैं। यदि प्रशासन ने जल्द कदम नहीं उठाया, तो हमें बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करना पड़ेगा।

भविष्य का असर एवं निष्कर्ष (Future Impact & Conclusion)

यदि नोएडा और गाजियाबाद के विकास प्राधिकरण इस गंभीर मुद्दे पर जल्द ही संज्ञान नहीं लेते हैं, तो यह लापरवाही किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। सार्वजनिक पार्कों का उद्देश्य नागरिकों को स्वस्थ वातावरण और मानसिक शांति प्रदान करना है, लेकिन सुरक्षा के अभाव में ये स्थान भय का प्रतीक बनते जा रहे हैं। प्रशासन और संबंधित विभागों को तत्काल प्रभाव से एक विशेष अभियान चलाकर सभी पार्कों की विद्युत व्यवस्था को ठीक कराना चाहिए और वहां सीसीटीवी कैमरों के साथ-साथ महिला एवं पुरुष सुरक्षा गार्डों की तैनाती सुनिश्चित करनी चाहिए। जनता के विश्वास को बहाल करने और स्मार्ट सिटी के दावों को धरातल पर उतारने के लिए अधिकारियों को संवेदनशीलता के साथ त्वरित कदम उठाने होंगे, तभी एनसीआर के इन पार्कों में एक बार फिर से सुरक्षित और खुशनुमा माहौल लौट सकेगा।

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