Livebharatsamachar ग्राउंड रिपोर्ट: जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के सत्र के दौरान भारत ने पाकिस्तान पर एक बार फिर जोरदार हमला बोला है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच से दो टूक शब्दों में कहा है कि पाकिस्तान को अपनी आंतरिक नीतियों और मानवाधिकार रिकॉर्ड पर आत्ममंथन करने की सख्त आवश्यकता है। भारतीय राजनयिक प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) और गिलगित-बाल्टिस्तान में स्थानीय नागरिकों पर हो रहे अत्याचारों और लगातार भड़क रहे असंतोष पर संयुक्त राष्ट्र के रवैये पर भी सवाल उठाए हैं। भारत का यह कड़ा रुख ऐसे समय में सामने आया है जब PoK में पाकिस्तानी शासन के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और नागरिक संघर्ष देखने को मिल रहे हैं, जहां आम जनता बुनियादी अधिकारों और आर्थिक बदहाली से त्रस्त होकर सड़कों पर उतर आई है।
ग्राउंड से मुख्य जानकारी (Key Takeaways)
- भारत ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के मंच से पाकिस्तान को PoK के हालात पर आड़े हाथों लिया।
- भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने वैश्विक संस्था की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद और घरेलू दमन पर पर्दा नहीं डाला जा सकता।
- PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान में महंगाई, टैक्स और मानवाधिकार हनन के खिलाफ स्थानीय जनता का गुस्सा चरम पर है।
- भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों में मानवाधिकारों की हो रही घोर अनदेखी पर संज्ञान लें।
घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्योरा (Chronological Event Breakdown)
पिछले कुछ महीनों से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के विभिन्न हिस्सों जैसे मुजफ्फराबाद, मीरपुर, रावलकोट और गिलगित-बाल्टिस्तान में स्थानीय लोगों द्वारा बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए जा रहे हैं। इन विरोध प्रदर्शनों की मुख्य वजह भारी भरकम बिजली बिल, खाद्य पदार्थों की आसमान छूती कीमतें, गेहूं की किल्लत और पाकिस्तानी हुकूमत द्वारा थोपे गए अवैध कर रहे हैं। जब इन शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों ने अपनी आवाज उठाई, तो पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और रेंजर्स ने उन पर भारी बल प्रयोग किया, जिसमें कई नागरिकों की जान चली गई और सैंकड़ों लोग घायल हो गए। इसके बावजूद, वैश्विक मानवाधिकार मंचों पर इस पर अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली। इस गंभीर स्थिति को संज्ञान में लेते हुए, जिनेवा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के सत्र में भारत ने इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाया और दुनिया का ध्यान इस मानवीय संकट की ओर आकर्षित किया। भारत ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए हमेशा भारत विरोधी प्रोपोगंडा का सहारा लेता है, जबकि उसकी अपनी ही जमीन और अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों में जनता बगावत पर उतर आई है।
प्रशासनिक व स्थानीय प्रतिक्रिया (Official Action & Public Reaction)
स्थानीय मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और PoK के नागरिकों ने भारत के इस बयान का स्वागत किया है। उनका कहना है कि दशकों से पाकिस्तान की दमनकारी नीतियों के कारण उन्हें दोयम दर्जे का जीवन जीने के लिए मजबूर किया गया है। दूसरी ओर, पाकिस्तानी प्रशासनिक तंत्र और खुफिया एजेंसियों ने दमन चक्र को और तेज कर दिया है तथा मीडिया पर सख्त सेंसरशिप लागू कर दी है ताकि जमीनी हकीकत दुनिया के सामने न आ सके। हालांकि, सोशल मीडिया और स्थानीय माध्यमों के जरिए PoK के भीतर से लगातार ऐसी तस्वीरें और वीडियो सामने आ रहे हैं जो वहां की दयनीय स्थिति को बयां करती हैं।
पाकिस्तान को लगातार मानवाधिकारों के उल्लंघन और अवैध कब्जों पर पर्दा डालने की अपनी पुरानी आदत को छोड़ना होगा। PoK की जनता बुनियादी अधिकारों से वंचित है और वहां के हालात इस बात के गवाह हैं कि पाकिस्तान अपने नागरिकों को सुरक्षा देने में पूरी तरह विफल रहा है।
आगे क्या? (What Lies Ahead)
आने वाले दिनों में इस मुद्दे के अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों में और तूल पकड़ने की पूरी संभावना है। भारत के इस कड़े रुख से पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर बेनकाब हो गया है। जानकारों का मानना है कि यदि PoK में असंतोष इसी तरह जारी रहा, तो पाकिस्तानी हुकूमत के लिए स्थिति को संभालना नामुमकिन हो जाएगा। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों पर भी यह दबाव बढ़ रहा है कि वे पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में जाकर स्वतंत्र जांच करें और वहां हो रहे मानवाधिकारों के हनन पर कड़ी कार्रवाई की सिफारिश करें। भारत अपनी कूटनीतिक रणनीतिक के तहत इस मामले को लगातार वैश्विक मंचों पर उठाता रहेगा ताकि वहां के पीड़ित नागरिकों को न्याय मिल सके।