लाइव भारत समाचार में आपका स्वागत है

Livebharatsamachar धर्म-अध्यात्म: 2026-10-16 का विशेष धार्मिक दायित्व, आज के पूज्य देव भगवान विष्णु और श्री लक्ष्मी जी की पूजा विधि और पावन व्रत कथा।

🙏 आज के पूज्य देव: भगवान विष्णु और श्री लक्ष्मी जी

आज का दिन भगवान विष्णु की आराधना और सत्कर्म के लिए अत्यंत ही शुभ और फलदायी है। साधक को चाहिए कि वह अपने दैनिक कार्यों में धर्म का पालन करते हुए जरूरतमंदों की सहायता करे। इस पावन दिवस पर मन को शांत रखकर निरंतर ईश्वर का स्मरण करने से मानसिक शांति एवं आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है।

🪔 प्रातःकाल पूजा विधान (Puja Vidhan & Mantras):

प्रातःकाल ब्रह्म बेला में स्नानदि से निवृत्त होकर पवित्र पीले वस्त्र धारण करें। ईशान कोण में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित कर उन्हें गंगाजल से स्नान कराएं। तत्पश्चात, पीले पुष्प, रोक्षत, चंदन, धूप, दीप और तुलसी दल अर्पित करते हुए 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप करें। अंत में सात्विक भोग लगाकर आरती करें और सभी में प्रसाद वितरित करें।

📖 पावन व्रत कथा एवं महात्म्य (Vrat Katha & Sacred Legend):

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीनकाल में एक बार देवर्षि नारद ने सृष्टि के कल्याण हेतु भगवान विष्णु से इस व्रत का महात्म्य पूछा था। प्रभु ने बताया कि जो भी भक्त श्रद्धा और नियमपूर्वक इस दिन व्रत का पालन करता है, उसके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। विधि-विधान से पूजन करने वाले साधक के जीवन में कभी भी धन-धान्य और सुख-समृद्धि की कमी नहीं होती है। विष्णु जी की कृपा से अंत में उसे वैकुण्ठ धाम की प्राप्ति होती है।

शुक्रवार, 16 अक्टूबर , 2026

आज का धार्मिक दायित्व एवं व्रत कथा (2026-10-16): आज के पूज्य देव (भगवान विष्णु और श्री लक्ष्मी जी), पूजा विधान एवं महात्म्य

Livebharatsamachar धर्म-अध्यात्म: 2026-10-16 का विशेष धार्मिक दायित्व, आज के पूज्य देव भगवान विष्णु और श्री लक्ष्मी जी की पूजा विधि और पावन व्रत कथा।

🙏 आज के पूज्य देव: भगवान विष्णु और श्री लक्ष्मी जी

आज का दिन भगवान विष्णु की आराधना और सत्कर्म के लिए अत्यंत ही शुभ और फलदायी है। साधक को चाहिए कि वह अपने दैनिक कार्यों में धर्म का पालन करते हुए जरूरतमंदों की सहायता करे। इस पावन दिवस पर मन को शांत रखकर निरंतर ईश्वर का स्मरण करने से मानसिक शांति एवं आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है।

🪔 प्रातःकाल पूजा विधान (Puja Vidhan & Mantras):

प्रातःकाल ब्रह्म बेला में स्नानदि से निवृत्त होकर पवित्र पीले वस्त्र धारण करें। ईशान कोण में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित कर उन्हें गंगाजल से स्नान कराएं। तत्पश्चात, पीले पुष्प, रोक्षत, चंदन, धूप, दीप और तुलसी दल अर्पित करते हुए ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जप करें। अंत में सात्विक भोग लगाकर आरती करें और सभी में प्रसाद वितरित करें।

📖 पावन व्रत कथा एवं महात्म्य (Vrat Katha & Sacred Legend):

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीनकाल में एक बार देवर्षि नारद ने सृष्टि के कल्याण हेतु भगवान विष्णु से इस व्रत का महात्म्य पूछा था। प्रभु ने बताया कि जो भी भक्त श्रद्धा और नियमपूर्वक इस दिन व्रत का पालन करता है, उसके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। विधि-विधान से पूजन करने वाले साधक के जीवन में कभी भी धन-धान्य और सुख-समृद्धि की कमी नहीं होती है। विष्णु जी की कृपा से अंत में उसे वैकुण्ठ धाम की प्राप्ति होती है।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *