Livebharatsamachar ग्राउंड रिपोर्ट: स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े एक हालिया और बेहद चिंताजनक सर्वे ने देश और दुनिया भर के चिकित्सा विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है। इस नए सर्वे के अनुसार, 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के 10 में से लगभग 6 पुरुष अपनी प्रोस्टेट कैंसर स्क्रीनिंग की स्थिति से पूरी तरह अनजान हैं। आधुनिक भागदौड़ भरी जिंदगी, स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही और इस विषय पर सामाजिक झिझक के चलते प्रोस्टेट स्वास्थ्य एक बड़ी अनकही चुनौती बनता जा रहा है। पुरुषों में होने वाले सबसे आम कैंसर में से एक होने के बावजूद, इसके प्रति जागरूकता का स्तर बेहद निराशाजनक है, जो भविष्य में एक बड़े स्वास्थ्य संकट का संकेत दे रहा है।
ग्राउंड से मुख्य जानकारी (Key Takeaways)
- 45 वर्ष से अधिक उम्र के 60 प्रतिशत पुरुषों को अपनी प्रोस्टेट कैंसर स्क्रीनिंग स्थिति की कोई जानकारी नहीं है।
- सर्वे में शामिल लगभग 69 प्रतिशत लोग प्रोस्टेट कैंसर का एक भी प्रमुख जोखिम कारक (Risk Factor) बताने में असमर्थ रहे।
- प्रत्येक 6 में से केवल 1 पुरुष ने यह स्वीकार किया कि उन्होंने जीवन में कभी प्रोस्टेट स्क्रीनिंग कराई है।
- शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिक्षा और नियमित जांच के प्रति भारी कमी देखी गई है।
घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्योरा (Chronological Event Breakdown)
पिछले कुछ महीनों में स्वास्थ्य संगठनों और शोधकर्ताओं ने पुरुषों के स्वास्थ्य पर एक व्यापक अध्ययन आयोजित किया। इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना था कि बढ़ती उम्र के साथ पुरुष अपनी स्वास्थ्य संबंधी प्राथमिकताओं और खासकर प्रोस्टेट कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को लेकर कितने गंभीर हैं। जब इस सर्वे के आंकड़े सामने आए, तो विशेषज्ञों का दल भी हैरान रह गया। सर्वे की शुरुआत में जब 45 वर्ष से अधिक आयु के हजारों पुरुषों से उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड और पिछले मेडिकल चेकअप के बारे में पूछा गया, तो अधिकांश लोगों ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि उन्होंने कभी इस बारे में सोचा ही नहीं था।
अध्ययन के अगले चरण में जब प्रतिभागियों से प्रोस्टेट कैंसर के लक्षणों और जोखिम कारकों के बारे में सवाल किए गए, तो लगभग 69 प्रतिशत लोग पूरी तरह अनजान नजर आए। वे इसके शुरुआती लक्षणों जैसे पेशाब में रुकावट, दर्द या आनुवंशिक कारणों के बारे में कुछ नहीं बता सके। इसके अलावा, जब स्क्रीनिंग के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया, तो यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि केवल 16 प्रतिशत यानी हर छह में से एक पुरुष ने ही अपने जीवनकाल में कभी प्रोस्टेट कैंसर की जांच कराई थी। यह स्थिति तब है जब चिकित्सा विज्ञान यह बार-बार स्पष्ट करता है कि शुरुआती चरण में पकड़ में आने पर प्रोस्टेट कैंसर का इलाज पूरी तरह संभव है।
प्रशासनिक व स्थानीय प्रतिक्रिया (Official Action & Public Reaction)
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विशेषज्ञों, डॉक्टरों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से गहरी चिंता व्यक्त की गई है। कई मेडिकल संस्थानों ने देश भर में जागरूकता अभियान चलाने की मांग की है ताकि पुरुषों में इस बीमारी के प्रति फैली भ्रांतियों और संकोच को दूर किया जा सके। चिकित्सकों का कहना है कि पुरुषों में अक्सर यह गलतफहमी होती है कि जब तक कोई गंभीर शारीरिक लक्षण दिखाई न दे, तब तक डॉक्टर के पास जाने की कोई आवश्यकता नहीं है।
हम लगातार देख रहे हैं कि महिलाएं अपने स्वास्थ्य और नियमित जांच को लेकर काफी जागरूक हो चुकी हैं, लेकिन पुरुष वर्ग आज भी अपनी स्वास्थ्य जांच के मामले में अत्यधिक उदासीन और लापरवाह रवैया अपना रहा है। प्रोस्टेट कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के मामलों में देरी का सीधा अर्थ जीवन से खिलवाड़ है। समय पर जांच से ही इस जानलेवा बीमारी को मात दी जा सकती है। – डॉ. आलोक वर्मा, वरिष्ठ ऑन्कोलॉजिस्ट
स्थानीय स्तर पर भी इस सर्वे के बाद कई हेल्थ कैंप आयोजित करने की रूपरेखा तैयार की जा रही है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि पुरुषों को खुलकर इस विषय पर बात करने के लिए प्रोत्साहित करना होगा। कई आरडब्ल्यूए (Resident Welfare Associations) और कॉर्पोरेट ऑफिसों में विशेष स्वास्थ्य सत्र आयोजित करने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक सही जानकारी पहुंचाई जा सके।
आगे क्या? (What Lies Ahead)
आने वाले समय में स्वास्थ्य मंत्रालयों और गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) के सामने यह एक बड़ी चुनौती होगी कि वे पुरुषों तक स्वास्थ्य शिक्षा की पहुंच को आसान बनाएं। इसके लिए मास मीडिया, सोशल मीडिया और जमीनी स्तर पर विशेष अभियान चलाने की सख्त आवश्यकता है। यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में प्रोस्टेट कैंसर के एडवांस्ड स्टेज के मामलों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों ने सभी 45 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों से अपील की है कि वे किसी भी हिचकिचाहट को छोड़कर अपने नजदीकी चिकित्सक से परामर्श करें और समय पर प्रोस्टेट स्क्रीनिंग जरूर करवाएं, क्योंकि सतर्कता ही इस बीमारी से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।