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Livebharatsamachar: सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने देश भर के सभी निजी टेलीविजन चैनलों और प्रसारकों के लिए एक बेहद कड़क और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करते हुए उन्हें सांप्रदायिक बयानबाजी, भड़काऊ दृश्यों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के गैर-जिम्मेदाराना इस्तेमाल के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी है। मंत्रालय द्वारा जारी इस नवीनतम परामर्श (एडवाइजरी) में इस बात पर गंभीर चिंता जताई गई है कि कुछ समाचार चैनल अपनी टीआरपी और सनसनीखेज रिपोर्टिंग की होड़ में केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम के तहत निर्धारित कार्यक्रम संहिता (Programme Code) का लगातार उल्लंघन कर रहे हैं। इस कदम का मुख्य उद्देश्य देश में सामाजिक सौहार्द, कानून-व्यवस्था और प्रसारण की गरिमा को बनाए रखना है, ताकि मीडिया की आड़ में नफरत फैलाने वाले एजेंडे को प्रभावी ढंग से रोका जा सके।

मुख्य बिंदु एवं हाइलाइट्स (Key Highlights)

विस्तृत समाचार एवं पूरा घटनाक्रम (Detailed Report)

हाल के महीनों में देश के कई मुख्यधारा और क्षेत्रीय समाचार चैनलों पर प्रसारित होने वाली प्राइम टाइम बहसों और विशेष रिपोर्टों में जिस प्रकार की भाषा का प्रयोग किया जा रहा है, वह लगातार बौद्धिक और सामाजिक बहस का विषय बना हुआ था। कई मौकों पर यह देखा गया कि स्टूडियो चर्चाओं के दौरान विभिन्न पैनलिस्टों द्वारा ऐसे बयान दिए गए जो समुदायों के बीच तनाव पैदा करने और आपसी सद्भाव को बिगाड़ने की क्षमता रखते थे। मंत्रालय ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 के नियम 6 के तहत किसी भी ऐसे कार्यक्रम को प्रसारित करने की अनुमति नहीं है जो किसी समुदाय विशेष की भावनाओं को आहत करे, हिंसा को बढ़ावा दे या देश की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ हो।

इसके अतिरिक्त, हाल के दिनों में तकनीकी प्रगति के साथ-साथ मीडिया जगत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक का धड़ल्ले से इस्तेमाल शुरू हो गया है। कई बार चैनलों द्वारा बिना किसी सत्यापन या डिस्क्लेमर के एआई-जनित विजुअल्स या ऑडियो क्लिप्स को इस तरह से दिखाया जाता है जिससे आम दर्शकों में भ्रम की स्थिति पैदा होती है। मंत्रालय ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई है कि सनसनीखेज खबरें परोसने के लिए डिजिटल और एआई टूल्स का दुरुपयोग किया जा रहा है, जो पत्रकारिता के बुनियादी सिद्धांतों के पूरी तरह विपरीत है। मंत्रालय ने यह भी निर्देश दिया है कि हिंसक घटनाओं, दंगों या अपराधों के फुटेज को दिखाते समय अत्यधिक संवेदनशीलता बरती जानी चाहिए और नाबालिगों या पीड़ितों की पहचान को उजागर करने वाले दृश्यों से पूरी तरह बचा जाना चाहिए।

मंत्रालय ने सभी प्रसारकों को याद दिलाया है कि वे अपने यहां मजबूत 'सेल्फ-रेगुलेटरी मेकैनिज्म' और संपादकीय जांच की प्रक्रिया को सुनिश्चित करें। किसी भी संवेदनशील खबर को ऑन-एयर करने से पहले उसकी सत्यता और प्रभाव का गहन मूल्यांकन किया जाना चाहिए। यदि भविष्य में किसी भी चैनल द्वारा इन दिशा-निर्देशों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित ब्रॉडकास्टर्स के खिलाफ लाइसेंस रद्दीकरण या प्रसारण निलंबन जैसी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने को सुरक्षित रखना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और इससे यह अपेक्षा की जाती है कि वह अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन पूरी निष्पक्षता, संयम और पत्रकारिता के उच्च मानकों के साथ करे। सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाली सामग्री पर किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। - सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय

भविष्य का असर एवं निष्कर्ष (Future Impact & Conclusion)

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की यह सख्त एडवाइजरी भारतीय मीडिया उद्योग में एक बड़े बदलाव और अनुशासन का संकेत देती है। इस कदम से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में टीवी चैनलों की प्राइम टाइम डिबेट्स और समाचारों की टोन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। सनसनीखेज और नफरत फैलाने वाली पत्रकारिता पर लगाम लगने से देश में शांति और सामाजिक सद्भावना को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, एआई तकनीक के दौर में फेक न्यूज और भ्रामक दृश्यों के प्रसार पर रोक लगाने की दिशा में यह एक ऐतिहासिक और बेहद जरूरी पहल साबित होगी। अब यह पूरी तरह से चैनलों के प्रबंधन और संपादकों पर निर्भर करता है कि वे व्यावसायिक मुनाफे से ऊपर उठकर जनहित और journalistic ethics को प्राथमिकता दें।

बुधवार, 21 अक्टूबर , 2026

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की सख्त चेतावनी, टीवी चैनलों पर सांप्रदायिक बयानबाजी और भड़काऊ दृश्यों पर कसेगा शिकंजा

Livebharatsamachar: सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने देश भर के सभी निजी टेलीविजन चैनलों और प्रसारकों के लिए एक बेहद कड़क और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करते हुए उन्हें सांप्रदायिक बयानबाजी, भड़काऊ दृश्यों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के गैर-जिम्मेदाराना इस्तेमाल के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी है। मंत्रालय द्वारा जारी इस नवीनतम परामर्श (एडवाइजरी) में इस बात पर गंभीर चिंता जताई गई है कि कुछ समाचार चैनल अपनी टीआरपी और सनसनीखेज रिपोर्टिंग की होड़ में केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम के तहत निर्धारित कार्यक्रम संहिता (Programme Code) का लगातार उल्लंघन कर रहे हैं। इस कदम का मुख्य उद्देश्य देश में सामाजिक सौहार्द, कानून-व्यवस्था और प्रसारण की गरिमा को बनाए रखना है, ताकि मीडिया की आड़ में नफरत फैलाने वाले एजेंडे को प्रभावी ढंग से रोका जा सके।

मुख्य बिंदु एवं हाइलाइट्स (Key Highlights)

  • सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सभी टीवी चैनलों को केबल टेलीविजन नेटवर्क नियमों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है।
  • बहसों और पैनल चर्चाओं के दौरान सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील और भड़काऊ बयानों पर पूरी तरह रोक लगाने की बात कही गई है।
  • हिंसक घटनाओं, दुर्घटनाओं और अपराधों के ग्राफिक या असंपादित दृश्यों को बार-बार दिखाने पर गहरी आपत्ति जताई गई है।
  • समाचारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जनित डीपफेक या भ्रामक वीडियो और ऑडियो के इस्तेमाल को लेकर चेतावनी जारी की गई है।
  • चैनलों के आंतरिक संपादकीय नियंत्रण (Editorial Control) और गेटकीपिंग तंत्र को और अधिक मजबूत करने का आदेश दिया गया है।

विस्तृत समाचार एवं पूरा घटनाक्रम (Detailed Report)

हाल के महीनों में देश के कई मुख्यधारा और क्षेत्रीय समाचार चैनलों पर प्रसारित होने वाली प्राइम टाइम बहसों और विशेष रिपोर्टों में जिस प्रकार की भाषा का प्रयोग किया जा रहा है, वह लगातार बौद्धिक और सामाजिक बहस का विषय बना हुआ था। कई मौकों पर यह देखा गया कि स्टूडियो चर्चाओं के दौरान विभिन्न पैनलिस्टों द्वारा ऐसे बयान दिए गए जो समुदायों के बीच तनाव पैदा करने और आपसी सद्भाव को बिगाड़ने की क्षमता रखते थे। मंत्रालय ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 के नियम 6 के तहत किसी भी ऐसे कार्यक्रम को प्रसारित करने की अनुमति नहीं है जो किसी समुदाय विशेष की भावनाओं को आहत करे, हिंसा को बढ़ावा दे या देश की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ हो।

इसके अतिरिक्त, हाल के दिनों में तकनीकी प्रगति के साथ-साथ मीडिया जगत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक का धड़ल्ले से इस्तेमाल शुरू हो गया है। कई बार चैनलों द्वारा बिना किसी सत्यापन या डिस्क्लेमर के एआई-जनित विजुअल्स या ऑडियो क्लिप्स को इस तरह से दिखाया जाता है जिससे आम दर्शकों में भ्रम की स्थिति पैदा होती है। मंत्रालय ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई है कि सनसनीखेज खबरें परोसने के लिए डिजिटल और एआई टूल्स का दुरुपयोग किया जा रहा है, जो पत्रकारिता के बुनियादी सिद्धांतों के पूरी तरह विपरीत है। मंत्रालय ने यह भी निर्देश दिया है कि हिंसक घटनाओं, दंगों या अपराधों के फुटेज को दिखाते समय अत्यधिक संवेदनशीलता बरती जानी चाहिए और नाबालिगों या पीड़ितों की पहचान को उजागर करने वाले दृश्यों से पूरी तरह बचा जाना चाहिए।

मंत्रालय ने सभी प्रसारकों को याद दिलाया है कि वे अपने यहां मजबूत ‘सेल्फ-रेगुलेटरी मेकैनिज्म’ और संपादकीय जांच की प्रक्रिया को सुनिश्चित करें। किसी भी संवेदनशील खबर को ऑन-एयर करने से पहले उसकी सत्यता और प्रभाव का गहन मूल्यांकन किया जाना चाहिए। यदि भविष्य में किसी भी चैनल द्वारा इन दिशा-निर्देशों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित ब्रॉडकास्टर्स के खिलाफ लाइसेंस रद्दीकरण या प्रसारण निलंबन जैसी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने को सुरक्षित रखना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और इससे यह अपेक्षा की जाती है कि वह अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन पूरी निष्पक्षता, संयम और पत्रकारिता के उच्च मानकों के साथ करे। सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाली सामग्री पर किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। – सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय

भविष्य का असर एवं निष्कर्ष (Future Impact & Conclusion)

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की यह सख्त एडवाइजरी भारतीय मीडिया उद्योग में एक बड़े बदलाव और अनुशासन का संकेत देती है। इस कदम से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में टीवी चैनलों की प्राइम टाइम डिबेट्स और समाचारों की टोन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। सनसनीखेज और नफरत फैलाने वाली पत्रकारिता पर लगाम लगने से देश में शांति और सामाजिक सद्भावना को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, एआई तकनीक के दौर में फेक न्यूज और भ्रामक दृश्यों के प्रसार पर रोक लगाने की दिशा में यह एक ऐतिहासिक और बेहद जरूरी पहल साबित होगी। अब यह पूरी तरह से चैनलों के प्रबंधन और संपादकों पर निर्भर करता है कि वे व्यावसायिक मुनाफे से ऊपर उठकर जनहित और journalistic ethics को प्राथमिकता दें।

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