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Livebharatsamachar विशेष कवरेज: भारत और रूस के बीच परमाणु ऊर्जा सहयोग की दिशा में एक और बड़ा मील का पत्थर हासिल कर लिया गया है। रूसी परमाणु ऊर्जा निगम 'रोसाटॉम' (Rosatom) ने तमिलनाडु स्थित कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र (KKNPP) की निर्माणाधीन इकाइयों 3 और 4 के लिए एडवांस्ड इंजीनियरिंग सेफ्टी फीचर्स एक्चुएशन सिस्टम (ESFAS) की आपूर्ति का काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस महत्वपूर्ण डिलीवरी के साथ ही भारत में परमाणु सुरक्षा बुनियादी ढांचे को और अधिक मजबूती मिली है, जो देश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप परमाणु सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

प्रमुख आकर्षण और बिंदु (Highlights)

पूरे घटनाक्रम की कहानी (Full Story)

तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में स्थित कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र भारत का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा केंद्र है। यहां रूस के तकनीकी सहयोग से वीवीईआर-1000 श्रेणी के प्रेशराइज्ड वाटर रिएक्टर स्थापित किए जा रहे हैं। हाल ही में पूरी की गई इस अत्याधुनिक सुरक्षा उपकरणों की आपूर्ति के तहत, रोसाटॉम की निर्माण इकाइयों ने कुल मिलाकर लगभग 300 विशेष रूप से इंजीनियर किए गए मदों (items) का उत्पादन किया और उन्हें भारतीय भूभाग तक सुरक्षित पहुंचाया।

परमाणु संयंत्रों में सुरक्षा सर्वोपरि होती है। इसे ध्यान में रखते हुए 'इंजीनियरिंग सेफ्टी फीचर्स एक्चुएशन सिस्टम' (ESFAS) को डिजाइन किया गया है। यह प्रणाली किसी भी प्रकार के आपातकालीन हालात या परिचालन विचलन (operational deviation) के समय स्वतः सक्रिय होकर रिएक्टर को सुरक्षित स्थिति में लाने का कार्य करती है। जब रिएक्टर के सामान्य संचालन मापदंडों में कोई असामान्यता या उतार-चढ़ाव दर्ज किया जाता है, तो ईएसएफएएस तुरंत हस्तक्षेप करता है। वीवीईआर-1000 रिएक्टरों की प्रत्येक पावर यूनिट के लिए सुरक्षा नियंत्रण ट्रेनों की सटीक संख्या के अनुसार चार सेट तैयार किए गए हैं, ताकि किसी भी तकनीकी विफलता की गुंजाइश को पूरी तरह से समाप्त किया जा सके।

विशेषज्ञों के अनुसार, कुडनकुलम यूनिट 3 और 4 का निर्माण कार्य तय मानकों के अनुसार तेजी से आगे बढ़ रहा है। इन उन्नत सुरक्षा प्रणालियों के स्थल पर पहुंच जाने से अब इनके संस्थापन (installation) और कमिशनिंग के अगले चरणों का मार्ग प्रशस्त हो गया है। भारत अपनी ऊर्जा की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए परमाणु ऊर्जा को एक साफ और भरोसेमंद विकल्प के रूप में देखता है, और रूस इस दिशा में भारत का सबसे भरोसेमंद तकनीकी साझीदार बना हुआ है।

मुख्य सवाल और उनके जवाब (Key Questions & Answers)

सवाल 1: ESFAS प्रणाली वास्तव में क्या कार्य करती है?
जवाब: ईएसएफएएस (Engineered Safety Features Actuation Systems) एक स्वचालित सुरक्षा निगरानी तंत्र है। यह परमाणु ऊर्जा संयंत्र के विभिन्न महत्वपूर्ण तकनीकी मापदंडों पर लगातार नजर रखता है। यदि संयंत्र के सामान्य कामकाज में कोई व्यवधान या विचलन आता है, तो यह प्रणाली तुरंत सुरक्षा तंत्रों को सक्रिय कर देती है ताकि किसी भी दुर्घटना को रोका जा सके।

सवाल 2: कुडनकुलम संयंत्र के किन यूनिटों के लिए यह उपकरण भेजे गए हैं?
जवाब: यह उपकरण विशेष रूप से कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र की यूनिट संख्या 3 और 4 के लिए भेजे गए हैं, जिनमें वीवीईआर-1000 तकनीक के रिएक्टर लगाए गए हैं।

सवाल 3: इस आपूर्ति का भारत की ऊर्जा योजनाओं पर क्या असर होगा?
जवाब: इन अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणालियों के जुड़ने से कुडनकुलम संयंत्र की इन इकाइयों का कार्य समय पर पूरा होने का रास्ता साफ होगा, जिससे देश को जल्द ही अतिरिक्त और स्वच्छ परमाणु ऊर्जा उपलब्ध हो सकेगी।

कुडनकुलम परियोजना के लिए सुरक्षा प्रणालियों की यह सफल आपूर्ति हमारे और हमारे भारतीय साझेदारों के बीच उच्च स्तर के तकनीकी सहयोग और परमाणु सुरक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

समापन और निष्कर्ष (Conclusion)

रोसाटॉम द्वारा कुडनकुलम परमाणु संयंत्र की यूनिट 3 और 4 के लिए ईएसएफएएस उपकरणों की सफल आपूर्ति भारत-रूस ऊर्जा कूटबारी और तकनीकी साझेदारी का एक और चमकदार उदाहरण है। यह कदम न केवल कुडनकुलम परियोजना की समयबद्ध प्रगति को सुनिश्चित करता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि भारत अपने परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में अंतरराष्ट्रीय स्तर की सर्वोत्तम और सबसे सुरक्षित तकनीक का उपयोग करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। जैसे-जैसे यूनिट्स के निर्माण के अगले चरण आगे बढ़ेंगे, यह उन्नत सुरक्षा अवसंरचना देश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता और स्थिरता की ओर और अधिक मजबूती से अग्रसर करेगी।

गुरूवार, 22 अक्टूबर , 2026

कुडनकुलम परमाणु संयंत्र के यूनिट 3 और 4 के लिए रूसी कंपनी रोसाटॉम ने पूरी की सुरक्षा उपकरणों की आपूर्ति

Livebharatsamachar विशेष कवरेज: भारत और रूस के बीच परमाणु ऊर्जा सहयोग की दिशा में एक और बड़ा मील का पत्थर हासिल कर लिया गया है। रूसी परमाणु ऊर्जा निगम ‘रोसाटॉम’ (Rosatom) ने तमिलनाडु स्थित कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र (KKNPP) की निर्माणाधीन इकाइयों 3 और 4 के लिए एडवांस्ड इंजीनियरिंग सेफ्टी फीचर्स एक्चुएशन सिस्टम (ESFAS) की आपूर्ति का काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस महत्वपूर्ण डिलीवरी के साथ ही भारत में परमाणु सुरक्षा बुनियादी ढांचे को और अधिक मजबूती मिली है, जो देश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप परमाणु सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

प्रमुख आकर्षण और बिंदु (Highlights)

  • रोसाटॉम द्वारा कुडनकुलम परमाणु संयंत्र के यूनिट 3 और 4 के लिए लगभग 300 महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरण सफलतापूर्वक निर्मित और डिलीवर किए गए हैं।
  • इस खेप में वीवीईआर-1000 (VVER-1000) रिएक्टरों से लैस प्रत्येक पावर यूनिट के लिए सुरक्षा इंस्ट्रुमेंटेशन और कंट्रोल ट्रेनों की संख्या के अनुसार ईएसएफएएस (ESFAS) सीएस के चार सेट शामिल हैं।
  • ईएसएफएएस (ESFAS) एक अति-संवेदनशील और अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणाली है, जो सामान्य परिचालन स्थितियों से किसी भी प्रकार के विचलन की स्थिति में पावर यूनिट के विभिन्न तकनीकी मापदंडों की लगातार और सूक्ष्म निगरानी करती है।
  • यह आपूर्ति भारत और रूस के बीच दशकों पुरानी रणनीतिक साझेदारी और शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में आपसी विश्वास को और अधिक प्रगाढ़ करती है।
  • कुडनकुलम परियोजना भारत की ऊर्जा सुरक्षा और हरित ऊर्जा संक्रमण के लक्ष्यों को प्राप्त करने में एक केंद्रीय भूमिका निभा रही है।

पूरे घटनाक्रम की कहानी (Full Story)

तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में स्थित कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र भारत का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा केंद्र है। यहां रूस के तकनीकी सहयोग से वीवीईआर-1000 श्रेणी के प्रेशराइज्ड वाटर रिएक्टर स्थापित किए जा रहे हैं। हाल ही में पूरी की गई इस अत्याधुनिक सुरक्षा उपकरणों की आपूर्ति के तहत, रोसाटॉम की निर्माण इकाइयों ने कुल मिलाकर लगभग 300 विशेष रूप से इंजीनियर किए गए मदों (items) का उत्पादन किया और उन्हें भारतीय भूभाग तक सुरक्षित पहुंचाया।

परमाणु संयंत्रों में सुरक्षा सर्वोपरि होती है। इसे ध्यान में रखते हुए ‘इंजीनियरिंग सेफ्टी फीचर्स एक्चुएशन सिस्टम’ (ESFAS) को डिजाइन किया गया है। यह प्रणाली किसी भी प्रकार के आपातकालीन हालात या परिचालन विचलन (operational deviation) के समय स्वतः सक्रिय होकर रिएक्टर को सुरक्षित स्थिति में लाने का कार्य करती है। जब रिएक्टर के सामान्य संचालन मापदंडों में कोई असामान्यता या उतार-चढ़ाव दर्ज किया जाता है, तो ईएसएफएएस तुरंत हस्तक्षेप करता है। वीवीईआर-1000 रिएक्टरों की प्रत्येक पावर यूनिट के लिए सुरक्षा नियंत्रण ट्रेनों की सटीक संख्या के अनुसार चार सेट तैयार किए गए हैं, ताकि किसी भी तकनीकी विफलता की गुंजाइश को पूरी तरह से समाप्त किया जा सके।

विशेषज्ञों के अनुसार, कुडनकुलम यूनिट 3 और 4 का निर्माण कार्य तय मानकों के अनुसार तेजी से आगे बढ़ रहा है। इन उन्नत सुरक्षा प्रणालियों के स्थल पर पहुंच जाने से अब इनके संस्थापन (installation) और कमिशनिंग के अगले चरणों का मार्ग प्रशस्त हो गया है। भारत अपनी ऊर्जा की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए परमाणु ऊर्जा को एक साफ और भरोसेमंद विकल्प के रूप में देखता है, और रूस इस दिशा में भारत का सबसे भरोसेमंद तकनीकी साझीदार बना हुआ है।

मुख्य सवाल और उनके जवाब (Key Questions & Answers)

सवाल 1: ESFAS प्रणाली वास्तव में क्या कार्य करती है?
जवाब: ईएसएफएएस (Engineered Safety Features Actuation Systems) एक स्वचालित सुरक्षा निगरानी तंत्र है। यह परमाणु ऊर्जा संयंत्र के विभिन्न महत्वपूर्ण तकनीकी मापदंडों पर लगातार नजर रखता है। यदि संयंत्र के सामान्य कामकाज में कोई व्यवधान या विचलन आता है, तो यह प्रणाली तुरंत सुरक्षा तंत्रों को सक्रिय कर देती है ताकि किसी भी दुर्घटना को रोका जा सके।

सवाल 2: कुडनकुलम संयंत्र के किन यूनिटों के लिए यह उपकरण भेजे गए हैं?
जवाब: यह उपकरण विशेष रूप से कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र की यूनिट संख्या 3 और 4 के लिए भेजे गए हैं, जिनमें वीवीईआर-1000 तकनीक के रिएक्टर लगाए गए हैं।

सवाल 3: इस आपूर्ति का भारत की ऊर्जा योजनाओं पर क्या असर होगा?
जवाब: इन अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणालियों के जुड़ने से कुडनकुलम संयंत्र की इन इकाइयों का कार्य समय पर पूरा होने का रास्ता साफ होगा, जिससे देश को जल्द ही अतिरिक्त और स्वच्छ परमाणु ऊर्जा उपलब्ध हो सकेगी।

कुडनकुलम परियोजना के लिए सुरक्षा प्रणालियों की यह सफल आपूर्ति हमारे और हमारे भारतीय साझेदारों के बीच उच्च स्तर के तकनीकी सहयोग और परमाणु सुरक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

समापन और निष्कर्ष (Conclusion)

रोसाटॉम द्वारा कुडनकुलम परमाणु संयंत्र की यूनिट 3 और 4 के लिए ईएसएफएएस उपकरणों की सफल आपूर्ति भारत-रूस ऊर्जा कूटबारी और तकनीकी साझेदारी का एक और चमकदार उदाहरण है। यह कदम न केवल कुडनकुलम परियोजना की समयबद्ध प्रगति को सुनिश्चित करता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि भारत अपने परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में अंतरराष्ट्रीय स्तर की सर्वोत्तम और सबसे सुरक्षित तकनीक का उपयोग करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। जैसे-जैसे यूनिट्स के निर्माण के अगले चरण आगे बढ़ेंगे, यह उन्नत सुरक्षा अवसंरचना देश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता और स्थिरता की ओर और अधिक मजबूती से अग्रसर करेगी।

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