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Livebharatsamachar ग्राउंड रिपोर्ट: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने ब्रिक्स संसदीय मंच पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और वैश्विक शासन के महत्वपूर्ण मुद्दों पर भारत का मजबूत पक्ष रखा है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि समकालीन समय की चुनौतियों से निपटने के लिए ब्रिक्स देशों को आपसी सहयोग बढ़ाना चाहिए और इस महत्वपूर्ण बैठक का समापन एक व्यापक संयुक्त बयान के साथ होना चाहिए।

ग्राउंड से मुख्य जानकारी (Key Takeaways)

घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्योरा (Chronological Event Breakdown)

ब्रिक्स संसदीय मंच की बैठक में दुनिया भर के तेजी से बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य और तकनीकी बदलावों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। सम्मेलन की शुरुआत में विभिन्न देशों के संसदीय प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे। इस दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपने संबोधन में तकनीकी प्रगति के दौर में आ रही नई चुनौतियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज के युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस न केवल जीवनशैली को बदल रहा है, बल्कि यह शासन, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को भी गहरे तौर पर प्रभावित कर रहा है। इसलिए, यह आवश्यक है कि सभी ब्रिक्स देश मिलकर एक ऐसा मजबूत ढांचा तैयार करें, जिससे AI का उपयोग मानवता के कल्याण के लिए हो और इसके संभावित जोखिमों को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।

बैठक के दौरान वैश्विक शासन व्यवस्था (Global Governance) के मौजूदा स्वरूप पर भी सवाल उठाए गए। भारतीय पक्ष ने पुरजोर तरीके से यह बात रखी कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में समय के साथ बदलाव की सख्त जरूरत है। वैश्विक दक्षिण (Global South) के देशों की आकांक्षाओं को उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए ताकि वैश्विक निर्णय प्रक्रिया अधिक समावेशी और लोकतांत्रिक बन सके। सत्र के आगे बढ़ने के साथ ही विभिन्न सदस्य देशों के बीच संसदीय कूटनीति को मजबूत करने और विधायी अनुभवों को साझा करने पर सहमति बनती दिखाई दी।

प्रशासनिक व स्थानीय प्रतिक्रिया (Official Action & Public Reaction)

सम्मेलन में शामिल हुए विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने ओम बिरला द्वारा उठाए गए मुद्दों का सकारात्मक स्वागत किया। जानकारों का मानना है कि ब्रिक्स जैसे ताकतवर मंच पर भारत की यह पहल तकनीकी सुरक्षा और पारदर्शी वैश्विक शासन की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकती है। कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक विकासशील अर्थव्यवस्थाएं डिजिटल तकनीक और एआई के क्षेत्र में खुद को मजबूत नहीं करतीं, तब तक वैश्विक असमानता को पाटना असंभव है।

हम एक ऐसे दौर से गुजर रहे हैं जहां तकनीक हमारी सीमाओं को पार कर चुकी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल बदलावों के इस युग में वैश्विक शासन को अधिक जवाबदेह बनाने के लिए ब्रिक्स देशों को आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर एक साझा और मजबूत संयुक्त बयान जारी करना चाहिए, जो भावी पीढ़ियों के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करे। - लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला

आगे क्या? (What Lies Ahead)

ब्रिक्स संसदीय सम्मेलन के समापन की ओर बढ़ने के साथ ही यह उम्मीद जताई जा रही है कि सभी सदस्य देश एक साझा कार्ययोजना और संयुक्त बयान पर सहमति बनाएंगे। इस सम्मेलन के निष्कर्ष आने वाले दिनों में ब्रिक्स देशों के बीच तकनीकी सहयोग, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और नीतिगत सामंजस्य को नई दिशा देने का काम करेंगे। भारत की ओर से जिस प्रकार वैश्विक पटल पर पारदर्शी शासन और नैतिक तकनीक का मुद्दा उठाया गया है, उससे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का नेतृत्वकारी प्रभाव और अधिक सुदृढ़ हुआ है। आने वाले महीनों में इन प्रस्तावों को जमीन पर उतारने के लिए संसदीय समितियों के स्तर पर और अधिक संवाद देखने को मिल सकता है।

शुक्रवार, 23 अक्टूबर , 2026

ब्रिक्स संसदीय सम्मेलन: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और वैश्विक शासन पर दिया जोर

Livebharatsamachar ग्राउंड रिपोर्ट: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने ब्रिक्स संसदीय मंच पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और वैश्विक शासन के महत्वपूर्ण मुद्दों पर भारत का मजबूत पक्ष रखा है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि समकालीन समय की चुनौतियों से निपटने के लिए ब्रिक्स देशों को आपसी सहयोग बढ़ाना चाहिए और इस महत्वपूर्ण बैठक का समापन एक व्यापक संयुक्त बयान के साथ होना चाहिए।

ग्राउंड से मुख्य जानकारी (Key Takeaways)

  • लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने ब्रिक्स संसदीय सम्मेलन को किया संबोधित।
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के सुरक्षित और नैतिक उपयोग पर विशेष बल दिया गया।
  • वैश्विक शासन प्रणालियों में सुधार लाने और विकासशील देशों की आवाज बुलंद करने की आवश्यकता पर चर्चा हुई।
  • सम्मेलन के अंत में एक साझा संयुक्त घोषणापत्र जारी करने का आह्वान किया गया।

घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्योरा (Chronological Event Breakdown)

ब्रिक्स संसदीय मंच की बैठक में दुनिया भर के तेजी से बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य और तकनीकी बदलावों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। सम्मेलन की शुरुआत में विभिन्न देशों के संसदीय प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे। इस दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपने संबोधन में तकनीकी प्रगति के दौर में आ रही नई चुनौतियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज के युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस न केवल जीवनशैली को बदल रहा है, बल्कि यह शासन, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को भी गहरे तौर पर प्रभावित कर रहा है। इसलिए, यह आवश्यक है कि सभी ब्रिक्स देश मिलकर एक ऐसा मजबूत ढांचा तैयार करें, जिससे AI का उपयोग मानवता के कल्याण के लिए हो और इसके संभावित जोखिमों को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।

बैठक के दौरान वैश्विक शासन व्यवस्था (Global Governance) के मौजूदा स्वरूप पर भी सवाल उठाए गए। भारतीय पक्ष ने पुरजोर तरीके से यह बात रखी कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में समय के साथ बदलाव की सख्त जरूरत है। वैश्विक दक्षिण (Global South) के देशों की आकांक्षाओं को उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए ताकि वैश्विक निर्णय प्रक्रिया अधिक समावेशी और लोकतांत्रिक बन सके। सत्र के आगे बढ़ने के साथ ही विभिन्न सदस्य देशों के बीच संसदीय कूटनीति को मजबूत करने और विधायी अनुभवों को साझा करने पर सहमति बनती दिखाई दी।

प्रशासनिक व स्थानीय प्रतिक्रिया (Official Action & Public Reaction)

सम्मेलन में शामिल हुए विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने ओम बिरला द्वारा उठाए गए मुद्दों का सकारात्मक स्वागत किया। जानकारों का मानना है कि ब्रिक्स जैसे ताकतवर मंच पर भारत की यह पहल तकनीकी सुरक्षा और पारदर्शी वैश्विक शासन की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकती है। कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक विकासशील अर्थव्यवस्थाएं डिजिटल तकनीक और एआई के क्षेत्र में खुद को मजबूत नहीं करतीं, तब तक वैश्विक असमानता को पाटना असंभव है।

हम एक ऐसे दौर से गुजर रहे हैं जहां तकनीक हमारी सीमाओं को पार कर चुकी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल बदलावों के इस युग में वैश्विक शासन को अधिक जवाबदेह बनाने के लिए ब्रिक्स देशों को आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर एक साझा और मजबूत संयुक्त बयान जारी करना चाहिए, जो भावी पीढ़ियों के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करे। – लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला

आगे क्या? (What Lies Ahead)

ब्रिक्स संसदीय सम्मेलन के समापन की ओर बढ़ने के साथ ही यह उम्मीद जताई जा रही है कि सभी सदस्य देश एक साझा कार्ययोजना और संयुक्त बयान पर सहमति बनाएंगे। इस सम्मेलन के निष्कर्ष आने वाले दिनों में ब्रिक्स देशों के बीच तकनीकी सहयोग, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और नीतिगत सामंजस्य को नई दिशा देने का काम करेंगे। भारत की ओर से जिस प्रकार वैश्विक पटल पर पारदर्शी शासन और नैतिक तकनीक का मुद्दा उठाया गया है, उससे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का नेतृत्वकारी प्रभाव और अधिक सुदृढ़ हुआ है। आने वाले महीनों में इन प्रस्तावों को जमीन पर उतारने के लिए संसदीय समितियों के स्तर पर और अधिक संवाद देखने को मिल सकता है।

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