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Livebharatsamachar धर्म-अध्यात्म: 2026-10-25 का विशेष धार्मिक दायित्व, आज के पूज्य देव भगवान सूर्य देव की पूजा विधि और पावन व्रत कथा।

🙏 आज के पूज्य देव: भगवान सूर्य देव

आज का दिन भगवान सूर्य की उपासना के लिए अत्यंत मंगलकारी है जो जीवन में अनुशासन और ऊर्जा का संचार करता है। नित्य कर्मों से निवृत्त होकर सूर्य नमस्कार और अर्घ्य देने से मान-सम्मान में वृद्धि होती है और पितृ दोष शांत होते हैं। अपने दैनिक कर्तव्यों का पालन करते हुए सात्विक आचरण रखना ही उत्तम धर्म है।

🪔 प्रातःकाल पूजा विधान (Puja Vidhan & Mantras):

प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर तांबे के Lota में जल, लाल फूल, कुमकुम और अक्षत मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। 'ॐ घृणिः सूर्याय नमः' मंत्र का उच्चारण करते हुए परिक्रमा करें। तत्पश्चात आसन पर बैठकर गायत्री मंत्र का जप करें और गुड़-रोटी का भोग लगाएं।

📖 पावन व्रत कथा एवं महात्म्य (Vrat Katha & Sacred Legend):

पौराणिक कथा के अनुसार, महर्षि कश्यप और अदिति के पुत्र के रूप में भगवान सूर्य का प्रकट्य संसार को प्रकाश और ऊर्जा प्रदान करने के लिए हुआ था। वे सप्त अश्वों वाले रथ पर सवार होकर आकाश में भ्रमण करते हैं और संपूर्ण जगत के जीवों को आरोग्यता तथा तेज प्रदान करते हैं। उनकी नियमित आराधना से आरोग्यता, यश और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है तथा सभी प्रकार के नेत्र विकार दूर होते हैं।

रविवार, 25 अक्टूबर , 2026

आज का धार्मिक दायित्व एवं व्रत कथा (2026-10-25): आज के पूज्य देव (भगवान सूर्य देव), पूजा विधान एवं महात्म्य

Livebharatsamachar धर्म-अध्यात्म: 2026-10-25 का विशेष धार्मिक दायित्व, आज के पूज्य देव भगवान सूर्य देव की पूजा विधि और पावन व्रत कथा।

🙏 आज के पूज्य देव: भगवान सूर्य देव

आज का दिन भगवान सूर्य की उपासना के लिए अत्यंत मंगलकारी है जो जीवन में अनुशासन और ऊर्जा का संचार करता है। नित्य कर्मों से निवृत्त होकर सूर्य नमस्कार और अर्घ्य देने से मान-सम्मान में वृद्धि होती है और पितृ दोष शांत होते हैं। अपने दैनिक कर्तव्यों का पालन करते हुए सात्विक आचरण रखना ही उत्तम धर्म है।

🪔 प्रातःकाल पूजा विधान (Puja Vidhan & Mantras):

प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर तांबे के Lota में जल, लाल फूल, कुमकुम और अक्षत मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। ‘ॐ घृणिः सूर्याय नमः’ मंत्र का उच्चारण करते हुए परिक्रमा करें। तत्पश्चात आसन पर बैठकर गायत्री मंत्र का जप करें और गुड़-रोटी का भोग लगाएं।

📖 पावन व्रत कथा एवं महात्म्य (Vrat Katha & Sacred Legend):

पौराणिक कथा के अनुसार, महर्षि कश्यप और अदिति के पुत्र के रूप में भगवान सूर्य का प्रकट्य संसार को प्रकाश और ऊर्जा प्रदान करने के लिए हुआ था। वे सप्त अश्वों वाले रथ पर सवार होकर आकाश में भ्रमण करते हैं और संपूर्ण जगत के जीवों को आरोग्यता तथा तेज प्रदान करते हैं। उनकी नियमित आराधना से आरोग्यता, यश और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है तथा सभी प्रकार के नेत्र विकार दूर होते हैं।

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