Livebharatsamachar विशेष कवरेज: देश के वित्तीय और डिजिटल ढांचे को अभेद्य बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर के निकट जटनी में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अत्याधुनिक डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का बहुप्रतीक्षित उद्घाटन किया है। लगभग 169 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार किया गया यह नया डेटा सेंटर देश में अपनी तरह का दूसरा सबसे बड़ा और आधुनिक केंद्र है। इससे पहले मुंबई के नवी मुंबई में इस प्रकार की पहली अत्याधुनिक सुविधा स्थापित की गई थी। इस उच्चस्तरीय परियोजना के शुरू होने से न केवल पूर्वी भारत के तकनीकी और डिजिटल परिदृश्य में क्रांतिकारी बदलाव आएगा, बल्कि देश की बैंकिंग प्रणाली और वित्तीय डेटा की सुरक्षा व्यवस्था को भी वैश्विक मानकों के अनुरूप मजबूती मिलेगी। प्रधानमंत्री के इस दौरे को लेकर ओडिशा के प्रशासनिक हलकों और स्थानीय नागरिकों में भारी उत्साह देखा गया, जहां सुरक्षा के भी बेहद कड़े इंतजाम किए गए थे।
प्रमुख आकर्षण और बिंदु (Highlights)
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ओडिशा के भुवनेश्वर के पास जटनी में आरबीआई के नए डेटा सेंटर का विधिवत उद्घाटन किया गया।
- इस अति-आधुनिक परियोजना की कुल लागत लगभग 169 करोड़ रुपये है, जो वित्तीय तकनीक में निवेश का एक बड़ा उदाहरण है।
- नवी मुंबई के बाद यह देश का दूसरा ऐसा अत्याधुनिक डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान है।
- इस संस्थान का मुख्य उद्देश्य बैंकिंग डेटा की सुरक्षा को बढ़ाना और साइबर खतरों से निपटने के लिए विशेषज्ञों को प्रशिक्षित करना है।
- परियोजना से ओडिशा और आसपास के क्षेत्रों में डिजिटल बुनियादी ढांचे को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा।
पूरे घटनाक्रम की कहानी (Full Story)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस ओडिशा दौरे का मुख्य आकर्षण भारतीय रिजर्व बैंक के डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का लोकार्पण रहा। आज के डिजिटल युग में जहां एक तरफ वित्तीय लेन-देन बेहद सुगम हो गए हैं, वहीं दूसरी तरफ साइबर अपराधियों और हैकर्स द्वारा डेटा चोरी और सेंधमारी के खतरे भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इन तमाम आधुनिक चुनौतियों से निपटने और भारत की वित्तीय रीढ़ को डिजिटल रूप से पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की रूपरेखा तैयार की थी। जटनी में स्थापित यह नया डेटा सेंटर तमाम आधुनिक सुविधाओं से लैस है। यह सेंटर न केवल अत्यधिक संवेदनशील वित्तीय डेटा को सुरक्षित रखने का काम करेगा, बल्कि यहां स्थापित ‘साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान’ के जरिए देश भर के बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों के तकनीकी विशेषज्ञों को अत्याधुनिक ट्रेनिंग भी दी जाएगी ताकि वे किसी भी प्रकार के डिजिटल हमले या मैलवेयर अटैक का तुरंत और प्रभावी ढंग से जवाब दे सकें। प्रधानमंत्री ने अपने इस दौरे के दौरान हेलीकॉप्टर के जरिए खुरदा की यात्रा की और वहां से सड़क मार्ग द्वारा जटनी स्थित इस नए संस्थान तक पहुंचे। उनके साथ केंद्रीय वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर और ओडिशा के मुख्यमंत्री तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने प्रधानमंत्री को इस पूरे डेटा सेंटर की कार्यप्रणाली, इसके सर्वर रूम, क्लाउड स्टोरेज क्षमता और आपदा रिकवरी प्रणालियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केंद्र आने वाले समय में देश के डिजिटल बैंकिंग इकोसिस्टम को पूरी तरह से सुरक्षित करने में एक मील का पत्थर साबित होगा।
मुख्य सवाल और उनके जवाब (Key Questions & Answers)
सवाल 1: आरबीआई के इस नए डेटा सेंटर की स्थापना कहां की गई है और इसकी लागत कितनी है?
जवाब: यह डेटा सेंटर ओडिशा में भुवनेश्वर के पास जटनी में स्थित है और इस परियोजना की कुल लागत लगभग 169 करोड़ रुपये है।
सवाल 2: इस डेटा सेंटर की मुख्य उपयोगिता क्या होगी?
जवाब: इसका मुख्य उद्देश्य देश की बैंकिंग प्रणालियों के वित्तीय डेटा को सुरक्षित रखना और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण प्रदान करना है ताकि किसी भी डिजिटल खतरे से निपटा जा सके।
सवाल 3: क्या यह देश में इस तरह का पहला केंद्र है?
जवाब: नहीं, यह देश में इस प्रकार का दूसरा डेटा सेंटर है। इससे पहले नवी मुंबई में पहला केंद्र स्थापित किया गया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र डिजिटल इंडिया के विजन को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं। भुवनेश्वर में आरबीआई का यह नया डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा संस्थान हमारे देश के वित्तीय तंत्र को साइबर खतरों के खिलाफ एक मजबूत ढाल प्रदान करेगा और तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगा।
समापन और निष्कर्ष (Conclusion)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भुवनेश्वर के जटनी में आरबीआई के 169 करोड़ रुपये की लागत वाले डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का उद्घाटन देश की डिजिटल सुरक्षा और आर्थिक संप्रभुता के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय है। यह परियोजना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि भारत सरकार और केंद्रीय बैंक देश के नागरिकों के वित्तीय हितों की रक्षा के लिए कितने गंभीर और प्रतिबद्ध हैं। इस अत्याधुनिक सुविधा के शुरू होने से न केवल डेटा लीक और साइबर धोखाधड़ी जैसी समस्याओं पर लगाम लगेगी, बल्कि देश के बैंकिंग क्षेत्र में तकनीक का इस्तेमाल और अधिक सुरक्षित तथा पारदर्शी हो जाएगा। ओडिशा जैसे राज्य में इस तरह के राष्ट्रीय स्तर के संस्थान का बनना वहां के तकनीकी विकास के लिए भी एक बहुत बड़ा वरदान साबित होगा।