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Livebharatsamachar ग्राउंड रिपोर्ट: भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने देश के वित्तीय क्षेत्र को साइबर खतरों से सुरक्षित बनाने और डिजिटल बैंकिंग को अधिक विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। बैंक ने हाल ही में साइबर सुरक्षा पर आधारित 'साइबररिस' (CyRIS) यानी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का औपचारिक उद्घाटन किया है। यह नया केंद्र वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने, अत्याधुनिक साइबर खतरों का आकलन करने और उनसे निपटने के लिए एक मजबूत रणनीतिक मंच के रूप में कार्य करेगा। आज के समय में जब डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन तेजी से बढ़ रहे हैं, ऐसे में सुरक्षा के मोर्चे पर यह पहल बैंकिंग उद्योग के लिए एक मील का पत्थर साबित होने जा रही है। इस ग्राउंड रिपोर्ट में हम विस्तार से जानेंगे कि एसबीआई का यह नया उत्कृष्टता केंद्र कैसे काम करेगा और इससे आम बैंक ग्राहकों को क्या बड़े फायदे मिलने वाले हैं।

ग्राउंड से मुख्य जानकारी (Key Takeaways)

घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्योरा (Chronological Event Breakdown)

साइबर सुरक्षा के बढ़ते मामलों और अत्याधुनिक डिजिटल खतरों को देखते हुए देश के सबसे बड़े ऋणदाता भारतीय स्टेट बैंक ने पिछले कुछ महीनों से एक व्यापक रणनीति पर काम करना शुरू किया था। इसी कड़ी में, बैंकिंग सेक्टर को भविष्य के डिजिटल हमलों से सुरक्षित रखने के लिए एक विशेष हब की आवश्यकता महसूस की गई। उद्घाटन समारोह के दौरान बैंक के शीर्ष नेतृत्व ने इस बात पर प्रकाश डाला कि किस तरह आज के समय में साइबर अपराधी नित नए तरीकों से बैंकिंग प्रणाली में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं। इन चुनौतियों से पार पाने के लिए 'साइबररिस' की परिकल्पना की गई। यह केंद्र केवल एसबीआई तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह देश के पूरे बैंकिंग और वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) को लाभान्वित करेगा। समारोह में यह भी तय किया गया कि तकनीक के मोर्चे पर लगातार हो रहे बदलावों के साथ तालमेल बिठाने के लिए अनुसंधान और विकास (आरएंडडी) पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

प्रशासनिक व स्थानीय प्रतिक्रिया (Official Action & Public Reaction)

इस बहुप्रतीक्षित केंद्र के उद्घाटन के अवसर पर एसबीआई के चेयरमैन सीएस सेट्टी ने साइबर सुरक्षा के महत्व पर विस्तार से चर्चा की और देश के वित्तीय ढांचे को सुरक्षित करने के अपने दृष्टिकोण को साझा किया। उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट रूप से कहा कि आज के दौर में ग्राहकों का विश्वास बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता है और इसके लिए साइबर खतरों का समय रहते और आक्रामक तरीके से मुकाबला करना बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि केवल तकनीकी उपकरण स्थापित करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि इसके लिए निरंतर प्रशिक्षण कार्यक्रमों की आवश्यकता है।

एसबीआई चेयरमैन सीएस सेट्टी ने कहा, वित्तीय क्षेत्र में ग्राहकों का अटूट विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। साइबर सुरक्षा को मजबूत करना केवल एक तकनीकी आवश्यकता नहीं है, बल्कि यह हमारी नैतिक जिम्मेदारी भी है। 'साइबररिस' के माध्यम से हम न केवल अपनी सुरक्षा प्रणालियों को अभेद्य बनाएंगे, बल्कि फिनटेक और नियामकों के साथ मिलकर एक ऐसा सहयोगात्मक माहौल तैयार करेंगे जो हर तरह के डिजिटल खतरे को पहले ही भांपकर उसे नाकाम कर सके। इसके साथ ही, हमारे कर्मचारी और ग्राहक भी इस सुरक्षा चक्र का अहम हिस्सा होंगे।

वित्तीय विश्लेषकों और तकनीक विशेषज्ञों ने एसबीआई के इस कदम की भूरी-भूरी प्रशंसा की है। उनका मानना है कि वर्तमान समय में जब साइबर क्राइम और फिशिंग के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, तब इस तरह का केंद्रीकृत अनुसंधान और रक्षा केंद्र बैंकिंग उद्योग के लिए ढाल का काम करेगा। आम जनता और डिजिटल बैंकिंग का उपयोग करने वाले ग्राहकों ने भी इस पहल का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे उनकी गाढ़ी कमाई ऑनलाइन धोखाधड़ी से सुरक्षित रहेगी।

आगे क्या? (What Lies Ahead)

साइबर सुरक्षा के इस नए उत्कृष्टता केंद्र के शुरू होने के बाद अब एसबीआई और अन्य वित्तीय संस्थानों की निगाहें इसके क्रियान्वयन और परिणामों पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह केंद्र बैंकों और फिनटेक कंपनियों के बीच सूचना साझा करने (इन्फॉर्मेशन शेयरिंग) की प्रक्रिया को तेज करेगा। इसके अलावा, बैंक का योजनाबद्ध दृष्टिकोण देश भर में साइबर साक्षरता अभियानों को गति देगा। कर्मचारियों के लिए विशेष कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी ताकि वे अत्याधुनिक मैलवेयर और फिशिंग हमलों की पहचान कर सकें। कुल मिलाकर, यह पहल भारत के डिजिटल बैंकिंग भविष्य को एक सुरक्षित, पारदर्शी और मजबूत आधार प्रदान करने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ साबित होगी।

सोमवार, 26 अक्टूबर , 2026

एसबीआई ने साइबर सुरक्षा के लिए उत्कृष्टता केंद्र का किया शुभारंभ, वित्तीय क्षेत्र में मजबूत होगी सुरक्षा

Livebharatsamachar ग्राउंड रिपोर्ट: भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने देश के वित्तीय क्षेत्र को साइबर खतरों से सुरक्षित बनाने और डिजिटल बैंकिंग को अधिक विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। बैंक ने हाल ही में साइबर सुरक्षा पर आधारित ‘साइबररिस’ (CyRIS) यानी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का औपचारिक उद्घाटन किया है। यह नया केंद्र वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने, अत्याधुनिक साइबर खतरों का आकलन करने और उनसे निपटने के लिए एक मजबूत रणनीतिक मंच के रूप में कार्य करेगा। आज के समय में जब डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन तेजी से बढ़ रहे हैं, ऐसे में सुरक्षा के मोर्चे पर यह पहल बैंकिंग उद्योग के लिए एक मील का पत्थर साबित होने जा रही है। इस ग्राउंड रिपोर्ट में हम विस्तार से जानेंगे कि एसबीआई का यह नया उत्कृष्टता केंद्र कैसे काम करेगा और इससे आम बैंक ग्राहकों को क्या बड़े फायदे मिलने वाले हैं।

ग्राउंड से मुख्य जानकारी (Key Takeaways)

  • एसबीआई द्वारा ‘साइबररिस’ (CyRIS) सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का शुभारंभ किया गया है।
  • यह पहल ‘थिंक, इनोवेट और डिफेंड’ (THINK, INNOVATE, and DEFEND) के मूल सिद्धांतों पर आधारित है।
  • बैंकों, फिनटेक कंपनियों और नियामकों के बीच आपसी सहयोग को बढ़ावा देना इसका मुख्य उद्देश्य है।
  • साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कर्मचारियों की नियमित ट्रेनिंग और ग्राहकों को जागरूक करने पर जोर दिया जा रहा है।

घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्योरा (Chronological Event Breakdown)

साइबर सुरक्षा के बढ़ते मामलों और अत्याधुनिक डिजिटल खतरों को देखते हुए देश के सबसे बड़े ऋणदाता भारतीय स्टेट बैंक ने पिछले कुछ महीनों से एक व्यापक रणनीति पर काम करना शुरू किया था। इसी कड़ी में, बैंकिंग सेक्टर को भविष्य के डिजिटल हमलों से सुरक्षित रखने के लिए एक विशेष हब की आवश्यकता महसूस की गई। उद्घाटन समारोह के दौरान बैंक के शीर्ष नेतृत्व ने इस बात पर प्रकाश डाला कि किस तरह आज के समय में साइबर अपराधी नित नए तरीकों से बैंकिंग प्रणाली में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं। इन चुनौतियों से पार पाने के लिए ‘साइबररिस’ की परिकल्पना की गई। यह केंद्र केवल एसबीआई तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह देश के पूरे बैंकिंग और वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) को लाभान्वित करेगा। समारोह में यह भी तय किया गया कि तकनीक के मोर्चे पर लगातार हो रहे बदलावों के साथ तालमेल बिठाने के लिए अनुसंधान और विकास (आरएंडडी) पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

प्रशासनिक व स्थानीय प्रतिक्रिया (Official Action & Public Reaction)

इस बहुप्रतीक्षित केंद्र के उद्घाटन के अवसर पर एसबीआई के चेयरमैन सीएस सेट्टी ने साइबर सुरक्षा के महत्व पर विस्तार से चर्चा की और देश के वित्तीय ढांचे को सुरक्षित करने के अपने दृष्टिकोण को साझा किया। उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट रूप से कहा कि आज के दौर में ग्राहकों का विश्वास बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता है और इसके लिए साइबर खतरों का समय रहते और आक्रामक तरीके से मुकाबला करना बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि केवल तकनीकी उपकरण स्थापित करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि इसके लिए निरंतर प्रशिक्षण कार्यक्रमों की आवश्यकता है।

एसबीआई चेयरमैन सीएस सेट्टी ने कहा, वित्तीय क्षेत्र में ग्राहकों का अटूट विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। साइबर सुरक्षा को मजबूत करना केवल एक तकनीकी आवश्यकता नहीं है, बल्कि यह हमारी नैतिक जिम्मेदारी भी है। ‘साइबररिस’ के माध्यम से हम न केवल अपनी सुरक्षा प्रणालियों को अभेद्य बनाएंगे, बल्कि फिनटेक और नियामकों के साथ मिलकर एक ऐसा सहयोगात्मक माहौल तैयार करेंगे जो हर तरह के डिजिटल खतरे को पहले ही भांपकर उसे नाकाम कर सके। इसके साथ ही, हमारे कर्मचारी और ग्राहक भी इस सुरक्षा चक्र का अहम हिस्सा होंगे।

वित्तीय विश्लेषकों और तकनीक विशेषज्ञों ने एसबीआई के इस कदम की भूरी-भूरी प्रशंसा की है। उनका मानना है कि वर्तमान समय में जब साइबर क्राइम और फिशिंग के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, तब इस तरह का केंद्रीकृत अनुसंधान और रक्षा केंद्र बैंकिंग उद्योग के लिए ढाल का काम करेगा। आम जनता और डिजिटल बैंकिंग का उपयोग करने वाले ग्राहकों ने भी इस पहल का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे उनकी गाढ़ी कमाई ऑनलाइन धोखाधड़ी से सुरक्षित रहेगी।

आगे क्या? (What Lies Ahead)

साइबर सुरक्षा के इस नए उत्कृष्टता केंद्र के शुरू होने के बाद अब एसबीआई और अन्य वित्तीय संस्थानों की निगाहें इसके क्रियान्वयन और परिणामों पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह केंद्र बैंकों और फिनटेक कंपनियों के बीच सूचना साझा करने (इन्फॉर्मेशन शेयरिंग) की प्रक्रिया को तेज करेगा। इसके अलावा, बैंक का योजनाबद्ध दृष्टिकोण देश भर में साइबर साक्षरता अभियानों को गति देगा। कर्मचारियों के लिए विशेष कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी ताकि वे अत्याधुनिक मैलवेयर और फिशिंग हमलों की पहचान कर सकें। कुल मिलाकर, यह पहल भारत के डिजिटल बैंकिंग भविष्य को एक सुरक्षित, पारदर्शी और मजबूत आधार प्रदान करने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ साबित होगी।

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