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Livebharatsamachar धर्म-अध्यात्म: 2026-10-29 का विशेष धार्मिक दायित्व, आज के पूज्य देव श्री गणेश जी एवं भगवान विष्णु की पूजा विधि और पावन व्रत कथा।

🙏 आज के पूज्य देव: श्री गणेश जी एवं भगवान विष्णु

आज का दिन अपने दैनिक कर्तव्यों और आध्यात्मिक साधना के संतुलन का है। नित्य कर्मों से निवृत्त होकर ईश्वर के प्रति समर्पण भाव रखने से कर्मों की शुद्धि होती है। अपने परिवार के कल्याण और समाज में धर्म की स्थापना के लिए सात्विक जीवन शैली अपनाएं।

🪔 प्रातःकाल पूजा विधान (Puja Vidhan & Mantras):

प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान आदि से निवृत्त होकर पवित्र वस्त्र धारण करें। अपने इष्टदेव का स्मरण करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य दें और भगवान श्री गणेश तथा भगवान विष्णु का षोडशोपचार पूजन करें। पूजा के दौरान पीले वस्त्र, दूर्वा, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। अंत में 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप करते हुए आरती करें और प्रसाद वितरित करें।

📖 पावन व्रत कथा एवं महात्म्य (Vrat Katha & Sacred Legend):

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, नियमित रूप से भगवान विष्णु और श्री गणेश का स्मरण करने से समस्त विघ्न बाधाओं का नाश होता है। प्राचीन काल में देवताओं ने भी किसी भी कार्य के आरंभ से पहले विघ्नहर्ता गणेश का पूजन किया था। जो भक्त निष्ठापूर्वक अपने दैनिक दायित्वों का निर्वाह करते हुए भगवान की आराधना करता है, उसके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। इस सामान्य वार के पूजन से मनुष्य को मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

गुरूवार, 29 अक्टूबर , 2026

आज का धार्मिक दायित्व एवं व्रत कथा (2026-10-29): आज के पूज्य देव (श्री गणेश जी एवं भगवान विष्णु), पूजा विधान एवं महात्म्य

Livebharatsamachar धर्म-अध्यात्म: 2026-10-29 का विशेष धार्मिक दायित्व, आज के पूज्य देव श्री गणेश जी एवं भगवान विष्णु की पूजा विधि और पावन व्रत कथा।

🙏 आज के पूज्य देव: श्री गणेश जी एवं भगवान विष्णु

आज का दिन अपने दैनिक कर्तव्यों और आध्यात्मिक साधना के संतुलन का है। नित्य कर्मों से निवृत्त होकर ईश्वर के प्रति समर्पण भाव रखने से कर्मों की शुद्धि होती है। अपने परिवार के कल्याण और समाज में धर्म की स्थापना के लिए सात्विक जीवन शैली अपनाएं।

🪔 प्रातःकाल पूजा विधान (Puja Vidhan & Mantras):

प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान आदि से निवृत्त होकर पवित्र वस्त्र धारण करें। अपने इष्टदेव का स्मरण करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य दें और भगवान श्री गणेश तथा भगवान विष्णु का षोडशोपचार पूजन करें। पूजा के दौरान पीले वस्त्र, दूर्वा, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। अंत में ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जप करते हुए आरती करें और प्रसाद वितरित करें।

📖 पावन व्रत कथा एवं महात्म्य (Vrat Katha & Sacred Legend):

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, नियमित रूप से भगवान विष्णु और श्री गणेश का स्मरण करने से समस्त विघ्न बाधाओं का नाश होता है। प्राचीन काल में देवताओं ने भी किसी भी कार्य के आरंभ से पहले विघ्नहर्ता गणेश का पूजन किया था। जो भक्त निष्ठापूर्वक अपने दैनिक दायित्वों का निर्वाह करते हुए भगवान की आराधना करता है, उसके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। इस सामान्य वार के पूजन से मनुष्य को मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

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