लाइव भारत समाचार में आपका स्वागत है

Livebharatsamachar धर्म-अध्यात्म: 2026-10-31 का विशेष धार्मिक दायित्व, आज के पूज्य देव श्री संतोषी माता एवं शुक्र ग्रह की पूजा विधि और पावन व्रत कथा।

🙏 आज के पूज्य देव: श्री संतोषी माता एवं शुक्र ग्रह

आज शुक्रवार के दिन संतोषी माता और शुक्र देव की आराधना करने से जीवन में ऐश्वर्य, प्रेम और शांति की प्राप्ति होती है। अपने दैनिक कर्तव्यों का पालन करते हुए जरूरतमंदों को श्वेत वस्तु या अन्न का दान अवश्य करें। नियमित पूजा से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और पारिवारिक जीवन में मधुरता बनी रहती है।

🪔 प्रातःकाल पूजा विधान (Puja Vidhan & Mantras):

प्रातःकाल snan उपरांत स्वच्छ श्वेत या लाल वस्त्र धारण करें और माता संतोषी के चित्र के समक्ष शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें। माँ को लाल फूल, अक्षत, रोली और गुड़-चने का भोग अर्पित करें। 'ॐ श्री संतोषी महालक्ष्म्यै नमः' मंत्र का कम से कम एक माला जाप करें और अंत में आरती संपन्न करें।

📖 पावन व्रत कथा एवं महात्म्य (Vrat Katha & Sacred Legend):

प्राचीन काल में एक वृद्ध माता के सात पुत्र थे जिनमें छह कमाते थे और एक आलसी था। सातों भाइयों की पत्नियां रोज छोटे भाई की पत्नी को ताने देती थीं और उसे दुखी करती थीं। एक दिन दुखी होकर उसने संतों और ब्राह्मणों से संतोषी माता के व्रत का विधान सुना और श्रद्धापूर्वक व्रत किया। माता की कृपा से उसके पति को व्यापार में अपार सफलता मिली और घर में सुख-समृद्धि लौट आई।

शनिवार, 31 अक्टूबर , 2026

आज का धार्मिक दायित्व एवं व्रत कथा (2026-10-31): आज के पूज्य देव (श्री संतोषी माता एवं शुक्र ग्रह), पूजा विधान एवं महात्म्य

Livebharatsamachar धर्म-अध्यात्म: 2026-10-31 का विशेष धार्मिक दायित्व, आज के पूज्य देव श्री संतोषी माता एवं शुक्र ग्रह की पूजा विधि और पावन व्रत कथा।

🙏 आज के पूज्य देव: श्री संतोषी माता एवं शुक्र ग्रह

आज शुक्रवार के दिन संतोषी माता और शुक्र देव की आराधना करने से जीवन में ऐश्वर्य, प्रेम और शांति की प्राप्ति होती है। अपने दैनिक कर्तव्यों का पालन करते हुए जरूरतमंदों को श्वेत वस्तु या अन्न का दान अवश्य करें। नियमित पूजा से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और पारिवारिक जीवन में मधुरता बनी रहती है।

🪔 प्रातःकाल पूजा विधान (Puja Vidhan & Mantras):

प्रातःकाल snan उपरांत स्वच्छ श्वेत या लाल वस्त्र धारण करें और माता संतोषी के चित्र के समक्ष शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें। माँ को लाल फूल, अक्षत, रोली और गुड़-चने का भोग अर्पित करें। ‘ॐ श्री संतोषी महालक्ष्म्यै नमः’ मंत्र का कम से कम एक माला जाप करें और अंत में आरती संपन्न करें।

📖 पावन व्रत कथा एवं महात्म्य (Vrat Katha & Sacred Legend):

प्राचीन काल में एक वृद्ध माता के सात पुत्र थे जिनमें छह कमाते थे और एक आलसी था। सातों भाइयों की पत्नियां रोज छोटे भाई की पत्नी को ताने देती थीं और उसे दुखी करती थीं। एक दिन दुखी होकर उसने संतों और ब्राह्मणों से संतोषी माता के व्रत का विधान सुना और श्रद्धापूर्वक व्रत किया। माता की कृपा से उसके पति को व्यापार में अपार सफलता मिली और घर में सुख-समृद्धि लौट आई।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *