Livebharatsamachar विशेष कवरेज: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार भी अपनी पुरानी और गौरवशाली परंपरा को निभाते हुए देश के वीर जवानों के साथ दीपावली का पावन पर्व मनाने का निर्णय लिया है। हर साल की तरह इस बार भी प्रधानमंत्री का यह कदम देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सुरक्षाबलों के प्रति उनके असीम सम्मान और उनके साथ खड़े होने के संकल्प को दर्शाता है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने देश के समस्त नागरिकों को प्रकाश पर्व दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं और उनके जीवन में सुख, समृद्धि तथा आरोग्यता की कामना की है।
प्रमुख आकर्षण और बिंदु (Highlights)
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को दीवाली की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
- पीएम मोदी ने अपनी पुरानी परंपरा को जारी रखते हुए सीमा पर तैनात जवानों के साथ दिवाली मनाने का फैसला किया है।
- यह दौरा सुरक्षा बलों के मनोबल को बढ़ाने और उनके बलिदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक मजबूत माध्यम है।
- देशभर में दीपोत्सव को लेकर भारी उत्साह का माहौल है, और नागरिक पारंपरिक तरीके से त्योहार मना रहे हैं।
पूरे घटनाक्रम की कहानी (Full Story)
दीपावली का त्योहार अंधकार पर प्रकाश की विजय, असत्य पर सत्य की और निराशा पर आशा की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस पावन अवसर पर जहां पूरा देश अपने परिवारों के साथ दीये जलाकर खुशियां मना रहा होता है, वहीं देश के करोड़ों नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हमारे वीर जवान कड़ाके की ठंड, विषम भौगोलिक परिस्थितियों और कठिन इलाकों में सरहद पर मुस्तैद रहते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद से ही यह परंपरा बना ली है कि वे दिवाली का त्योहार देश के आम नागरिकों के साथ-साथ सरहद पर तैनात सेना के जवानों के बीच ही मनाएंगे।
यह परंपरा न केवल जवानों के लिए एक बहुत बड़ा नैतिक समर्थन साबित होती है, बल्कि पूरे राष्ट्र को यह संदेश देती है कि देश का नेतृत्व अपनी सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। पिछले कुछ वर्षों में प्रधानमंत्री ने सियाचिन ग्लेशियर, लद्दाख, राजौरी, जैसलमेर, केदारनाथ और अन्य कई सामरिक रूप से संवेदनशील एवं महत्वपूर्ण स्थानों पर जाकर जवानों के साथ दिवाली का जश्न मनाया है। इस दौरान वे न केवल जवानों को अपने हाथों से मिठाइयां खिलाते हैं, बल्कि उनके साथ समय बिताकर उनकी दिनचर्या और समस्याओं को भी नजदीक से समझते हैं।
इस वर्ष भी प्रधानमंत्री का यह दौरा अत्यंत गोपनीय और सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत रखा गया है, ताकि किसी प्रकार की सामरिक संवेदनशीलता प्रभावित न हो। हालांकि, इस घोषणा के सामने आते ही सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में इसकी जोरदार चर्चा शुरू हो गई है। देश के विभिन्न हिस्सों से लोग प्रधानमंत्री के इस कदम की सराहना कर रहे हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के दौरों से सशस्त्र बलों के जवानों का मनोबल सातवें आसमान पर पहुंच जाता है और उन्हें यह अहसास होता है कि पूरा देश उनके त्याग और समर्पण को नमन करता है।
मुख्य सवाल और उनके जवाब (Key Questions & Answers)
सवाल 1: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जवानों के साथ दिवाली मनाने की परंपरा कब शुरू की थी?
जवाब: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही हर साल दीपावली का पर्व देश की सीमाओं पर तैनात सेना, वायुसेना और नौसेना के जवानों के साथ मनाने की इस अनूठी परंपरा की शुरुआत की थी।
सवाल 2: इस परंपरा का देश की सेना और जनता पर क्या प्रभाव पड़ता है?
जवाब: इससे एक तरफ जहां सैनिकों का मनोबल और आत्मविश्वास कई गुना बढ़ जाता है, वहीं दूसरी ओर देश की आम जनता के मन में भी सैनिकों के प्रति आदर और देशभक्ति की भावना और अधिक प्रबल होती है।
“हमारे वीर जवान देश की आन, बान और शान हैं। उनकी मुस्तैदी और बलिदान के कारण ही आज देशवासी अपने घरों में चैन की नींद सोते हैं और रोशनी का यह पर्व धूमधाम से मना पाते हैं। राष्ट्र उनकी इस निष्ठा के प्रति हमेशा कृतज्ञ रहेगा।” – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
समापन और निष्कर्ष (Conclusion)
दीपावली का यह पावन पर्व केवल रोशनी और पटाखों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह आपसी भाईचारे, एकता और उन लोगों को याद करने का अवसर है जो हमारे सुरक्षित भविष्य के लिए अपना वर्तमान दांव पर लगा देते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जवानों के साथ दिवाली मनाना इस बात का जीवंत प्रमाण है कि एक सशक्त राष्ट्र की नींव उसकी सेना की ताकत और जनता के परस्पर प्रेम पर टिकी होती है। इस दीपोत्सव पर हर भारतवासी को अपने सैनिकों पर गर्व होना चाहिए और उनके कल्याण के लिए अपनी शुभकामनाएं प्रेषित करनी चाहिए।