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Livebharatsamachar ग्राउंड रिपोर्ट: राजधानी दिल्ली में दिवाली के पावन पर्व पर एक बार फिर प्रदूषण ने गंभीर रूप धारण कर लिया है, जिससे शहर की आबोहवा एक बार फिर से 'बेहद खराब' और कई इलाकों में 'गंभीर' श्रेणी में पहुंच गई है। त्योहारी उल्लास और रोशनी के इस पर्व के बीच आतिशबाजी पर लगे प्रतिबंधों का धरातल पर पूरी तरह पालन नहीं होने के कारण प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी के कई प्रमुख हिस्सों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400 के पार दर्ज किया गया, जिससे आम नागरिकों को सांस लेने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है, जिन्हें चिकित्सकों द्वारा घरों के अंदर रहने की सलाह दी गई है।

ग्राउंड से मुख्य जानकारी (Key Takeaways)

घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्योरा (Chronological Event Breakdown)

दिवाली से ठीक पहले दिल्ली में हवा की गुणवत्ता आंशिक रूप से सुधरी थी और यह 'संतोषजनक' से 'मध्यम' श्रेणी के बीच झूल रही थी। हालांकि, विशेषज्ञों ने पहले ही चेतावनी दे दी थी कि त्योहारी सीजन और तापमान में गिरावट के साथ वायु गुणवत्ता बिगड़ने की पूरी संभावना है। दिवाली की शाम होते-होते ही शहर के विभिन्न इलाकों में पटाखों की आवाजें गूंजने लगीं। रात लगभग 10 बजे के बाद से ही वायु गुणवत्ता सूचकांक में तेजी से गिरावट दर्ज की जानी शुरू हो गई। आनंद विहार, बवाना, जहांगीरपुरी, और मुंडका जैसे पारंपरिक रूप से अधिक प्रदूषण वाले इलाकों में AQI ने 450 का आंकड़ा पार कर लिया। मध्यरात्रि तक स्थिति और अधिक विकट हो गई, जब शहर के 19 से अधिक स्टेशनों पर प्रदूषण का स्तर 'गंभीर' स्तर पर पहुंच गया। अगली सुबह सूर्योदय के समय शहर के ऊपर धुंध और प्रदूषण के मिश्रण 'स्मॉग' की एक भारी परत छाई रही, जिससे दृश्यता का स्तर भी काफी कम हो गया।

प्रशासनिक व स्थानीय प्रतिक्रिया (Official Action & Public Reaction)

प्रदूषण के इस खतरनाक स्तर को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली सरकार और पर्यावरण विभाग ने आपातकालीन बैठकें बुलाई हैं। ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के अगले चरणों को लागू करने पर विचार किया जा रहा है। सड़कों पर उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए नगर निगम द्वारा पानी टैंकरों से छिड़काव और स्मॉग गन का उपयोग बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। दूसरी ओर, स्थानीय नागरिकों और पर्यावरणविदों में इस बात को लेकर गहरी नाराजगी है कि प्रतिबंधों के बावजूद खुलेआम पटाखे बिके और चलाए गए। आम जनता का कहना है कि प्रशासनिक सख्ती केवल कागजों तक सीमित रह जाती है, जिसका खामियाजा आम नागरिकों को अपनी सेहत से समझौता करके भुगतना पड़ता है।

स्थानीय निवासी रमेश कुमार ने बताया, 'दिवाली का आनंद अपनी जगह है, लेकिन जिस तरह से हवा जहरीली हो गई है, उसमें सांस लेना भी दूभर हो गया है। बच्चों को आंखों में जलन और गले में खराश की शिकायत होने लगी है। प्रशासन को इस पर और सख्त कदम उठाने चाहिए।'

आगे क्या? (What Lies Ahead)

आने वाले दिनों में मौसम के रुख को देखते हुए प्रदूषण से तुरंत राहत मिलने की कोई खास उम्मीद नहीं जताई जा रही है। मौसम विभाग का अनुमान है कि हवा की रफ्तार धीमी बनी रहेगी और तापमान में और गिरावट आएगी, जिससे प्रदूषक तत्व वातावरण में लंबे समय तक बने रहेंगे। इसके अलावा, पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं के आंकड़े भी दिल्ली के प्रदूषण में अपनी भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में सरकार के सामने निर्माण कार्यों पर रोक लगाने और वाहनों के प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाने की चुनौती और अधिक बढ़ गई है। नागरिकों से भी अपील की जा रही है कि वे अनावश्यक यात्राओं से बचें और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों का कड़ाई से पालन करें।

रविवार, 8 नवम्बर , 2026

दिवाली पर दिल्ली की हवा हुई बेहद जहरीली, 19 निगरानी केंद्रों पर दर्ज किया गया गंभीर श्रेणी का AQI

Livebharatsamachar ग्राउंड रिपोर्ट: राजधानी दिल्ली में दिवाली के पावन पर्व पर एक बार फिर प्रदूषण ने गंभीर रूप धारण कर लिया है, जिससे शहर की आबोहवा एक बार फिर से ‘बेहद खराब’ और कई इलाकों में ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच गई है। त्योहारी उल्लास और रोशनी के इस पर्व के बीच आतिशबाजी पर लगे प्रतिबंधों का धरातल पर पूरी तरह पालन नहीं होने के कारण प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी के कई प्रमुख हिस्सों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400 के पार दर्ज किया गया, जिससे आम नागरिकों को सांस लेने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है, जिन्हें चिकित्सकों द्वारा घरों के अंदर रहने की सलाह दी गई है।

ग्राउंड से मुख्य जानकारी (Key Takeaways)

  • राजधानी दिल्ली के कुल 19 वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों पर AQI ‘गंभीर’ (Severe) श्रेणी में दर्ज किया गया।
  • दिवाली की रात और अगले दिन सुबह के समय स्मॉग की घनी चादर ने पूरे शहर को अपनी आगोश में ले लिया।
  • पटाखों पर प्रतिबंध के बावजूद कई इलाकों में देर रात तक जमकर आतिशबाजी की गई, जिसके कारण प्रदूषण के स्तर में अचानक भारी उछाल आया।
  • मौसम में बदलाव, हवा की धीमी गति और तापमान में गिरावट के चलते प्रदूषक कण जमीन के करीब ठहर गए हैं।
  • प्रशासन द्वारा पानी का छिड़काव और एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल बढ़ाने के निर्देश जारी किए गए हैं।

घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्योरा (Chronological Event Breakdown)

दिवाली से ठीक पहले दिल्ली में हवा की गुणवत्ता आंशिक रूप से सुधरी थी और यह ‘संतोषजनक’ से ‘मध्यम’ श्रेणी के बीच झूल रही थी। हालांकि, विशेषज्ञों ने पहले ही चेतावनी दे दी थी कि त्योहारी सीजन और तापमान में गिरावट के साथ वायु गुणवत्ता बिगड़ने की पूरी संभावना है। दिवाली की शाम होते-होते ही शहर के विभिन्न इलाकों में पटाखों की आवाजें गूंजने लगीं। रात लगभग 10 बजे के बाद से ही वायु गुणवत्ता सूचकांक में तेजी से गिरावट दर्ज की जानी शुरू हो गई। आनंद विहार, बवाना, जहांगीरपुरी, और मुंडका जैसे पारंपरिक रूप से अधिक प्रदूषण वाले इलाकों में AQI ने 450 का आंकड़ा पार कर लिया। मध्यरात्रि तक स्थिति और अधिक विकट हो गई, जब शहर के 19 से अधिक स्टेशनों पर प्रदूषण का स्तर ‘गंभीर’ स्तर पर पहुंच गया। अगली सुबह सूर्योदय के समय शहर के ऊपर धुंध और प्रदूषण के मिश्रण ‘स्मॉग’ की एक भारी परत छाई रही, जिससे दृश्यता का स्तर भी काफी कम हो गया।

प्रशासनिक व स्थानीय प्रतिक्रिया (Official Action & Public Reaction)

प्रदूषण के इस खतरनाक स्तर को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली सरकार और पर्यावरण विभाग ने आपातकालीन बैठकें बुलाई हैं। ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के अगले चरणों को लागू करने पर विचार किया जा रहा है। सड़कों पर उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए नगर निगम द्वारा पानी टैंकरों से छिड़काव और स्मॉग गन का उपयोग बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। दूसरी ओर, स्थानीय नागरिकों और पर्यावरणविदों में इस बात को लेकर गहरी नाराजगी है कि प्रतिबंधों के बावजूद खुलेआम पटाखे बिके और चलाए गए। आम जनता का कहना है कि प्रशासनिक सख्ती केवल कागजों तक सीमित रह जाती है, जिसका खामियाजा आम नागरिकों को अपनी सेहत से समझौता करके भुगतना पड़ता है।

स्थानीय निवासी रमेश कुमार ने बताया, ‘दिवाली का आनंद अपनी जगह है, लेकिन जिस तरह से हवा जहरीली हो गई है, उसमें सांस लेना भी दूभर हो गया है। बच्चों को आंखों में जलन और गले में खराश की शिकायत होने लगी है। प्रशासन को इस पर और सख्त कदम उठाने चाहिए।’

आगे क्या? (What Lies Ahead)

आने वाले दिनों में मौसम के रुख को देखते हुए प्रदूषण से तुरंत राहत मिलने की कोई खास उम्मीद नहीं जताई जा रही है। मौसम विभाग का अनुमान है कि हवा की रफ्तार धीमी बनी रहेगी और तापमान में और गिरावट आएगी, जिससे प्रदूषक तत्व वातावरण में लंबे समय तक बने रहेंगे। इसके अलावा, पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं के आंकड़े भी दिल्ली के प्रदूषण में अपनी भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में सरकार के सामने निर्माण कार्यों पर रोक लगाने और वाहनों के प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाने की चुनौती और अधिक बढ़ गई है। नागरिकों से भी अपील की जा रही है कि वे अनावश्यक यात्राओं से बचें और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों का कड़ाई से पालन करें।

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