लाइव भारत समाचार में आपका स्वागत है बस्ती ,18 जनवरी : लाइव भारत समाचार :- भारतीय शास्त्रीय नृत्य कला को वैश्विक पटल पर प्रतिष्ठित करने वाले ,कथक सम्राट पद्म विभूषण पंडित बिरजू जी महाराज को नृत्य धाम परिवार के सदस्यों ने आत्म वंदित श्रद्धांजलि अर्पितकी । मास्टर शिव ने बताया कि पंडित बिरजू जी महाराज का स्वभाव सरल,एवम व्यक्ति विशेष था। महाराज जी द्वारा रचित रचनाएं जब नर्तक, रंगमंच पर उसकी प्रस्तुति देते हैं तो मानो लगता है श्री गुरु श्रेष्ठ जी की आत्मा उनमें अवतरित हो गई हो,और इसका श्रेय बड़े महाराज जी को ही जाता है। बड़े-बड़े टुकड़े थोड़े बंदिश की रचना सरल, सटीक ताल ,बध्य में होती थी की जिसको कम समय अंतराल में सीखा जा सकता था। महाराज जी ने नौनिहालों के अभ्यास को और मधुर बनाने के लिए बच्चों के खेल-खेल में ही बंदिशें की उपज कर देते थे जिसे बच्चों में एक अलग ही हर्ष उमंग जागृत होता था जिससे उनके अंदर शास्त्री कला के प्रति ,रुचि ,और आकर्षण बना रहता था। बॉलीवुड मेकप आर्टिस्ट कविता श्रीवास्तव ने बताया कि सर्व विधाओं में संपूर्ण होने के बाद भी महाराज जी को तनिक भी अपने ऊपर किसी भी चीज का कोई घमंड नहीं था कोई दिखावा नहीं था। वह सभी कलाकारों को आपस में प्रेम से रहने और एक दूसरे को समझने तथा सहयोग करने की सलाह सदैव देते थे ।इस अवसर पर सभी नृत्य कला नृत्य प्रेमी उपस्थित रहे। रिपोर्ट ,बस्ती ब्यूरो/ अजय श्रीवास्तव : लाइव भारत समाचार
मंगलवार, 9 जून , 2026

कथक सम्राट पद्मविभूषित पं0 बिरजू जी महराज को नृत्यधाम परिवार ने किया नमन

बस्ती ,18 जनवरी : लाइव भारत समाचार :- भारतीय शास्त्रीय नृत्य कला को वैश्विक पटल पर प्रतिष्ठित करने वाले ,कथक सम्राट पद्म विभूषण पंडित बिरजू जी महाराज को नृत्य धाम परिवार के सदस्यों ने आत्म वंदित श्रद्धांजलि अर्पितकी ।
मास्टर शिव ने बताया कि पंडित बिरजू जी महाराज का स्वभाव सरल,एवम व्यक्ति विशेष था। महाराज जी द्वारा रचित रचनाएं जब नर्तक, रंगमंच पर उसकी प्रस्तुति देते हैं तो मानो लगता है श्री गुरु श्रेष्ठ जी की आत्मा उनमें अवतरित हो गई हो,और इसका श्रेय बड़े महाराज जी को ही जाता है। बड़े-बड़े टुकड़े थोड़े बंदिश की रचना सरल, सटीक ताल ,बध्य में होती थी की जिसको कम समय अंतराल में सीखा जा सकता था। महाराज जी ने नौनिहालों के अभ्यास को और मधुर बनाने के लिए बच्चों के खेल-खेल में ही बंदिशें की उपज कर देते थे जिसे बच्चों में एक अलग ही हर्ष उमंग जागृत होता था जिससे उनके अंदर शास्त्री कला के प्रति ,रुचि ,और आकर्षण बना रहता था।
बॉलीवुड मेकप आर्टिस्ट कविता श्रीवास्तव ने बताया कि सर्व विधाओं में संपूर्ण होने के बाद भी महाराज जी को तनिक भी अपने ऊपर किसी भी चीज का कोई घमंड नहीं था कोई दिखावा नहीं था। वह सभी कलाकारों को आपस में प्रेम से रहने और एक दूसरे को समझने तथा सहयोग करने की सलाह सदैव देते थे ।इस अवसर पर सभी नृत्य कला नृत्य प्रेमी उपस्थित रहे।

रिपोर्ट ,बस्ती ब्यूरो/ अजय श्रीवास्तव : लाइव भारत समाचार

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