उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना का आरोप, याचिकाकर्ता की भूमि में चलाया गया बुलडोजर
संत कबीर नगर। माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा जनहित याचिका में दिए गए आदेश के अनुपालन को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है। जनहित याचिका के याचिकाकर्ता अर्जुन प्रसाद पुत्र रामलौट, निवासी ग्राम बेलराई ने आरोप लगाया है कि राजस्व विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की गठित टीम ने न्यायालय के आदेश की अनदेखी करते हुए उनकी तथा अन्य किसानों की भूमि में बुलडोजर चलाकर जबरन चकनाली की खुदाई करा दी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अर्जुन प्रसाद ने माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में जनहित याचिका दायर कर ग्राम इटौवा और बेलराई की सीमा पर स्थित गाटा संख्या 167ख की सार्वजनिक चकनाली पर कथित अतिक्रमण हटाने की मांग की थी। याचिका में यह भी कहा गया था कि ग्राम बेलराई निवासी शंभूनाथ द्वारा गाटा संख्या 238 की चकनाली पर कब्जा कर लिया गया है। जनहित को ध्यान में रखते हुए दोनों चकनालियों को अतिक्रमण मुक्त कराकर राजस्व अभिलेखों एवं नक्शे के अनुसार मूल स्वरूप में बहाल किए जाने की मांग की गई थी।
बताया जाता है कि माननीय उच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई के बाद संबंधित गाटा संख्या 167ख एवं 238 को राजस्व अभिलेखों और नक्शे के अनुसार मूल स्थिति में बहाल करने का आदेश दिया था।
आरोप है कि न्यायालय के आदेश के अनुपालन में 15 जून 2026 को राजस्व विभाग की टीम सीमांकन के लिए मौके पर पहुंची, लेकिन सार्वजनिक चकनाली को अतिक्रमण मुक्त कराने के बजाय नायब तहसीलदार राजेश मिश्रा के नेतृत्व में याचिकाकर्ता तथा उनके बगल के काश्तकार सुबोध श्रीवास्तव, पंकज श्रीवास्तव, उमेश चंद्र श्रीवास्तव, पुष्कर श्रीवास्तव, ओमकार श्रीवास्तव एवं ओम प्रकाश श्रीवास्तव आदि की कृषि भूमि में बुलडोजर चलाकर चकनाली खुदवा दी गई। इस कार्रवाई से किसानों में आक्रोश व्याप्त है और उन्हें आर्थिक क्षति होने का भी आरोप लगाया गया है।
याचिकाकर्ता अर्जुन प्रसाद ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राजस्व टीम का नेतृत्व कर रहे नायब तहसीलदार राजेश मिश्रा द्वारा कथित रूप से गलत स्थान पर सीमांकन कराया गया और वास्तविक सार्वजनिक चकनाली के बजाय उनकी कृषि भूमि में नाली की खुदाई कराई गई। याचिकाकर्ता का आरोप है कि कार्रवाई पूरी होने के बाद प्रशासनिक दबाव बनाते हुए उनसे स्पॉट मेमो पर हस्ताक्षर भी करा लिए गए। उनका कहना है कि सीमांकन एवं कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया निष्पक्षता और पारदर्शिता के विपरीत रही, जिसकी शिकायत वह सक्षम अधिकारियों एवं माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।
याचिकाकर्ता अर्जुन प्रसाद एवं उनके सहयोगियों का कहना है कि राजस्व विभाग की यह कार्रवाई माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की भावना एवं निर्देशों के विपरीत है। उन्होंने निर्णय लिया है कि पूरे प्रकरण से माननीय उच्च न्यायालय को अवगत कराया जाएगा तथा आदेश की कथित अवहेलना करने वाले नायब तहसीलदार राजेश मिश्रा एवं संबंधित राजस्व अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध कोर्ट ऑफ कंटेम्प्ट (अवमानना याचिका) दाखिल कर न्याय की मांग की जाएगी।
फिलहाल, इस मामले में राजस्व विभाग अथवा संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर समाचार को अद्यतन किया जाएगा।
(यह समाचार याचिकाकर्ता एवं संबंधित पक्षों द्वारा लगाए गए आरोपों तथा मौके पर उपलब्ध वीडियो एवं फोटोग्राफ के आधार पर तैयार किया गया है। मामले की सत्यता का अंतिम निर्धारण सक्षम न्यायालय, प्रशासनिक जांच एवं संबंधित विभागों के आधिकारिक पक्ष के आधार पर होगा।)