लाइव भारत समाचार में आपका स्वागत है भारत में पॉलीमर करेंसी की एंट्री की तैयारी: ₹10 और ₹20 के 200 करोड़ नोटों का होगा फील्ड ट्रायल दिल्ली| लाइव भारत समाचार Polymer Notes India: केंद्र सरकार ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के प्लास्टिक करेंसी नोट लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. लेकिन इन्हें तुरंत पूरे देश में लागू नहीं किया जाएगा. इसके बजाय आरबीआई पहले चुनिंदा इलाकों में ₹10 और ₹20 के 200 करोड़ पॉलीमर नोटों का फील्ड ट्रायल करेगा. इस पायलट प्रोजेक्ट का मकसद पूरे देश में इन्हें लागू करने पर विचार करने से पहले अलग-अलग मौसम और इस्तेमाल की स्थिति में पॉलीमर नोटों की मजबूती और परफॉर्मेंस को परखना है. आइए जानते हैं कि आरबीआई ट्रायल के लिए किन शहरों को चुनता है और यह कैसे तय होता है.   आरबीआई के पायलट प्रोजेक्ट में सिर्फ चुनिंदा शहर ही शामिल होंगे   आरबीआई नई करेंसी नोटों की टेस्टिंग के लिए शहरों को रैंडम तरीके से नहीं चुनता. इसके बजाय आरबीआई कुछ ऐसी जगह को चुनता है जो भारत की अलग-अलग भौगोलिक प्रमोशन की स्थिति को दर्शाती हैं. ऐसा इसलिए ताकि नोटों को अलग-अलग मौसम के हालात में परखा जा सके. पहले के पायलट प्लान में जयपुर, शिमला, भुवनेश्वर, मैसूर और कोच्चि जैसे शहरों को चुना गया था. अलग-अलग माहौल में नोटों की टेस्टिंग से आरबीआई को यह समझने में मदद मिलती है कि पॉलीमर करेंसी देश भर में अलग-अलग स्थितियों में कैसे काम करती है.   अलग-अलग मौसम की स्थिति जरूरी   पायलट प्रोजेक्ट का एक मुख्य मकसद यह देखना होता है कि क्या पॉलीमर नोट पारंपरिक कागजी करेंसी की तुलना में भारत की अलग-अलग पर्यावरणीय और जलवायु स्थिति का बेहतर तरीके से सामना कर सकते हैं या नहीं. ट्रायल के दौरान आरबीआई इस बात को देखेगा कि ज्यादा तापमान, काफी ज्यादा नमी, भारी बारिश, उमस, धूल, रगड़ और लोगों द्वारा इसके लगातार इस्तेमाल किए जाने पर नोट कैसे काम करता है. पूरे देश में इन्हें लागू करने का फैसला लेने से पहले नोटों की मजबूती और उनकी उम्र पर बारीकी से नजर रखी जाएगी.   सरकार ने संसद को बताया कि फील्ड ट्रायल में कुल 200 करोड़ पॉलीमर नोट शामिल किए जाएंगे. इनमें ₹10 के 100 करोड़ नोट और ₹20 के 100 करोड़ नोट होंगे. आरबीआई के सेंट्रल बोर्ड की सिफारिश के बाद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट 1934 की धारा 25 के तहत इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है. इन नोटों की छपाई भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड करेगी. यह आरबीआई की पूरी तरह से अपनी सब्सिडियरी कंपनी है.   ₹10 के और ₹20 के नोट ही क्यों चुने गए?   आरबीआई ने जान-बूझकर ₹10 और ₹20 के नोट चुने हैं क्योंकि रोजाना के लेन-देन में इनका ही सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है. यह नोट हर दिन कई बार हाथों-हाथ बदलते हैं. इस वजह से मुड़ने, पसीने, गंदगी और नमी की वजह से इनका जल्दी खराब होने का डर रहता है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक आरबीआई हर साल लगभग 2000 से 2400 करोड़ खराब हो चुके नोट नष्ट करता है. इनमें कम कीमत वाले नोटों का बड़ा हिस्सा होता है.   पॉलीमर नोट के साथ कागजी नोट भी चलते रहेंगे   पॉलीमर करेंसी लाने का मतलब यह नहीं है कि अभी चल रहे कागजी नोट चलन से बाहर हो जाएंगे. आरबीआई ने यह साफ किया है कि कागज और प्लास्टिक दोनों तरह के नोट कानूनी तौर पर मान्य रहेंगे और एक साथ चलन में रहेंगे. इस पायलट प्रोजेक्ट का मकसद इस बात को देखना है कि क्या पॉलीमर नोट बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के लिए सही हैं. ऐसा इसलिए ताकि बाद में इन्हें चरणबद्ध तरीके से बढ़ाने पर विचार किया जा सके.   पॉलीमर नोट के फायदे और चुनौती   हालांकि पॉलीमर नोट आमतौर पर कागजी नोट की तुलना में ढाई से चार गुना ज्यादा समय तक चलते हैं लेकिन उनके साथ कुछ चुनौतियां भी हैं. इनकी शुरुआती छपाई का खर्च कॉटन बेस्ड कागज ने नोट की तुलना में 30% से 60% ज्यादा होने का अनुमान है. पूरे देश में इन्हें लागू करने के लिए एटीएम, बैंक की कैश सॉर्टिंग मशीन और वेंडिंग मशीनों को भी री-कैलिब्रेट करना होगा. इससे खर्चे और बढ़ेगा.   भारत आंशिक रूप से आयातित बायएक्सियली ओरिएंटेड पॉलीप्रोपाइलीन पर काफी ज्यादा निर्भर है. यह पॉलीमर नोट बनाने में इस्तेमाल होने वाला मुख्य पदार्थ है. कागजी नोट के उलट जो बायोडिग्रेडेबल होते हैं पॉलीमर नोट के जीवन चक्र के अंत में खास इंडस्ट्रियल रीसाइकलिंग सुविधा की जरूरत होती है। रिपोर्ट|लाइव भारत समाचार   
शुक्रवार, 31 जुलाई , 2026

भारत में पॉलीमर करेंसी की एंट्री की तैयारी: ₹10 और ₹20 के 200 करोड़ नोटों का होगा फील्ड ट्रायल

भारत में पॉलीमर करेंसी की एंट्री की तैयारी: ₹10 और ₹20 के 200 करोड़ नोटों का होगा फील्ड ट्रायल

दिल्ली| लाइव भारत समाचार Polymer Notes India: केंद्र सरकार ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के प्लास्टिक करेंसी नोट लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. लेकिन इन्हें तुरंत पूरे देश में लागू नहीं किया जाएगा. इसके बजाय आरबीआई पहले चुनिंदा इलाकों में ₹10 और ₹20 के 200 करोड़ पॉलीमर नोटों का फील्ड ट्रायल करेगा. इस पायलट प्रोजेक्ट का मकसद पूरे देश में इन्हें लागू करने पर विचार करने से पहले अलग-अलग मौसम और इस्तेमाल की स्थिति में पॉलीमर नोटों की मजबूती और परफॉर्मेंस को परखना है. आइए जानते हैं कि आरबीआई ट्रायल के लिए किन शहरों को चुनता है और यह कैसे तय होता है.

 

आरबीआई के पायलट प्रोजेक्ट में सिर्फ चुनिंदा शहर ही शामिल होंगे

 

आरबीआई नई करेंसी नोटों की टेस्टिंग के लिए शहरों को रैंडम तरीके से नहीं चुनता. इसके बजाय आरबीआई कुछ ऐसी जगह को चुनता है जो भारत की अलग-अलग भौगोलिक प्रमोशन की स्थिति को दर्शाती हैं. ऐसा इसलिए ताकि नोटों को अलग-अलग मौसम के हालात में परखा जा सके. पहले के पायलट प्लान में जयपुर, शिमला, भुवनेश्वर, मैसूर और कोच्चि जैसे शहरों को चुना गया था. अलग-अलग माहौल में नोटों की टेस्टिंग से आरबीआई को यह समझने में मदद मिलती है कि पॉलीमर करेंसी देश भर में अलग-अलग स्थितियों में कैसे काम करती है.

 

अलग-अलग मौसम की स्थिति जरूरी

 

पायलट प्रोजेक्ट का एक मुख्य मकसद यह देखना होता है कि क्या पॉलीमर नोट पारंपरिक कागजी करेंसी की तुलना में भारत की अलग-अलग पर्यावरणीय और जलवायु स्थिति का बेहतर तरीके से सामना कर सकते हैं या नहीं. ट्रायल के दौरान आरबीआई इस बात को देखेगा कि ज्यादा तापमान, काफी ज्यादा नमी, भारी बारिश, उमस, धूल, रगड़ और लोगों द्वारा इसके लगातार इस्तेमाल किए जाने पर नोट कैसे काम करता है. पूरे देश में इन्हें लागू करने का फैसला लेने से पहले नोटों की मजबूती और उनकी उम्र पर बारीकी से नजर रखी जाएगी.

 

सरकार ने संसद को बताया कि फील्ड ट्रायल में कुल 200 करोड़ पॉलीमर नोट शामिल किए जाएंगे. इनमें ₹10 के 100 करोड़ नोट और ₹20 के 100 करोड़ नोट होंगे. आरबीआई के सेंट्रल बोर्ड की सिफारिश के बाद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट 1934 की धारा 25 के तहत इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है. इन नोटों की छपाई भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड करेगी. यह आरबीआई की पूरी तरह से अपनी सब्सिडियरी कंपनी है.

 

₹10 के और ₹20 के नोट ही क्यों चुने गए?

 

आरबीआई ने जान-बूझकर ₹10 और ₹20 के नोट चुने हैं क्योंकि रोजाना के लेन-देन में इनका ही सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है. यह नोट हर दिन कई बार हाथों-हाथ बदलते हैं. इस वजह से मुड़ने, पसीने, गंदगी और नमी की वजह से इनका जल्दी खराब होने का डर रहता है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक आरबीआई हर साल लगभग 2000 से 2400 करोड़ खराब हो चुके नोट नष्ट करता है. इनमें कम कीमत वाले नोटों का बड़ा हिस्सा होता है.

 

पॉलीमर नोट के साथ कागजी नोट भी चलते रहेंगे

 

पॉलीमर करेंसी लाने का मतलब यह नहीं है कि अभी चल रहे कागजी नोट चलन से बाहर हो जाएंगे. आरबीआई ने यह साफ किया है कि कागज और प्लास्टिक दोनों तरह के नोट कानूनी तौर पर मान्य रहेंगे और एक साथ चलन में रहेंगे. इस पायलट प्रोजेक्ट का मकसद इस बात को देखना है कि क्या पॉलीमर नोट बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के लिए सही हैं. ऐसा इसलिए ताकि बाद में इन्हें चरणबद्ध तरीके से बढ़ाने पर विचार किया जा सके.

 

पॉलीमर नोट के फायदे और चुनौती

 

हालांकि पॉलीमर नोट आमतौर पर कागजी नोट की तुलना में ढाई से चार गुना ज्यादा समय तक चलते हैं लेकिन उनके साथ कुछ चुनौतियां भी हैं. इनकी शुरुआती छपाई का खर्च कॉटन बेस्ड कागज ने नोट की तुलना में 30% से 60% ज्यादा होने का अनुमान है. पूरे देश में इन्हें लागू करने के लिए एटीएम, बैंक की कैश सॉर्टिंग मशीन और वेंडिंग मशीनों को भी री-कैलिब्रेट करना होगा. इससे खर्चे और बढ़ेगा.

 

भारत आंशिक रूप से आयातित बायएक्सियली ओरिएंटेड पॉलीप्रोपाइलीन पर काफी ज्यादा निर्भर है. यह पॉलीमर नोट बनाने में इस्तेमाल होने वाला मुख्य पदार्थ है. कागजी नोट के उलट जो बायोडिग्रेडेबल होते हैं पॉलीमर नोट के जीवन चक्र के अंत में खास इंडस्ट्रियल रीसाइकलिंग सुविधा की जरूरत होती है।

रिपोर्ट|लाइव भारत समाचार 

 

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