लाइव भारत समाचार में आपका स्वागत है बिना हल्दी के बन रहा था 'हल्दी पाउडर'! कानपुर की मसाला फैक्ट्री में मिलावट का बड़ा खेल बेनकाब खाद्य सुरक्षा विभाग की छापेमारी में चावल के टूटे दाने, लिक्विड कलर और संदिग्ध कच्चा माल बरामद; 5.86 लाख रुपये का स्टॉक जब्त, लैब रिपोर्ट के बाद होगी अंतिम पुष्टि कानपुर, 5 अगस्त। उत्तर प्रदेश के कानपुर में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की कार्रवाई ने मसाला उद्योग में संभावित खाद्य मिलावट के गंभीर मामले की आशंका को उजागर कर दिया है। पनकी स्थित इस्पात नगर की एक मसाला निर्माण इकाई पर छापेमारी के दौरान अधिकारियों को ऐसा हल्दी पाउडर तैयार होता मिला, जिसके निर्माण स्थल पर साबुत हल्दी का कोई भंडार नहीं मिला। इसके स्थान पर बड़ी मात्रा में चावल के टूटे हुए दाने, लिक्विड कलर तथा अन्य संदिग्ध कच्चा माल बरामद होने से मिलावटी हल्दी पाउडर बनाए जाने की आशंका गहरा गई। कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने लगभग 5 लाख 86 हजार 200 रुपये मूल्य का संदिग्ध स्टॉक जब्त कर लिया है। जब्त सामग्री के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि अंतिम निष्कर्ष लैब रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही सामने आएगा। छापेमारी में क्या मिला? खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने पनकी के इस्पात नगर स्थित पीतांबरा इंटरप्राइजेज में निरीक्षण किया। जांच के दौरान फैक्ट्री में हल्दी पाउडर तैयार होता मिला, लेकिन वहां साबुत हल्दी का स्टॉक नहीं मिला। इसके बजाय बड़ी मात्रा में चावल के टूटे दाने, रंग मिश्रित तरल पदार्थ (लिक्विड कलर) और अन्य कच्चा माल मिला, जिससे अधिकारियों को संदेह हुआ कि इन्हीं सामग्रियों के माध्यम से हल्दी पाउडर जैसा उत्पाद तैयार किया जा रहा था। लैब रिपोर्ट से होगी सच्चाई स्पष्ट अधिकारियों ने फैक्ट्री से विभिन्न नमूने एकत्र कर अधिकृत प्रयोगशाला भेज दिए हैं। यदि जांच में खाद्य मानकों का उल्लंघन या मिलावट की पुष्टि होती है तो संबंधित संचालकों के विरुद्ध खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल विभाग ने पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। स्वास्थ्य पर पड़ सकता है गंभीर असर खाद्य विशेषज्ञों के अनुसार यदि मसालों में कृत्रिम रंग, निम्न गुणवत्ता वाले पदार्थ या अन्य मिलावटी सामग्री का उपयोग किया जाता है, तो इससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं। लंबे समय तक ऐसे उत्पादों का सेवन पाचन तंत्र, यकृत (लीवर) और अन्य अंगों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। खाद्य सुरक्षा पर फिर उठे सवाल कानपुर की यह कार्रवाई एक बार फिर खाद्य उत्पादों में मिलावट की समस्या को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना रही है। त्योहारों और बढ़ती उपभोक्ता मांग के बीच खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित निरीक्षण, कठोर निगरानी और त्वरित कानूनी कार्रवाई ही ऐसे मामलों पर प्रभावी नियंत्रण का माध्यम बन सकती है। रिपोर्ट ब्यूरो कानपुर|लाइव भारत समाचार 
बुधवार, 5 अगस्त , 2026

बिना हल्दी के बन रहा था ‘हल्दी पाउडर’! कानपुर की मसाला फैक्ट्री में मिलावट का बड़ा खेल बेनकाब

बिना हल्दी के बन रहा था ‘हल्दी पाउडर’! कानपुर की मसाला फैक्ट्री में मिलावट का बड़ा खेल बेनकाब

खाद्य सुरक्षा विभाग की छापेमारी में चावल के टूटे दाने, लिक्विड कलर और संदिग्ध कच्चा माल बरामद; 5.86 लाख रुपये का स्टॉक जब्त, लैब रिपोर्ट के बाद होगी अंतिम पुष्टि

कानपुर, 5 अगस्त। उत्तर प्रदेश के कानपुर में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की कार्रवाई ने मसाला उद्योग में संभावित खाद्य मिलावट के गंभीर मामले की आशंका को उजागर कर दिया है। पनकी स्थित इस्पात नगर की एक मसाला निर्माण इकाई पर छापेमारी के दौरान अधिकारियों को ऐसा हल्दी पाउडर तैयार होता मिला, जिसके निर्माण स्थल पर साबुत हल्दी का कोई भंडार नहीं मिला। इसके स्थान पर बड़ी मात्रा में चावल के टूटे हुए दाने, लिक्विड कलर तथा अन्य संदिग्ध कच्चा माल बरामद होने से मिलावटी हल्दी पाउडर बनाए जाने की आशंका गहरा गई।

कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने लगभग 5 लाख 86 हजार 200 रुपये मूल्य का संदिग्ध स्टॉक जब्त कर लिया है। जब्त सामग्री के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि अंतिम निष्कर्ष लैब रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही सामने आएगा।

छापेमारी में क्या मिला?

खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने पनकी के इस्पात नगर स्थित पीतांबरा इंटरप्राइजेज में निरीक्षण किया। जांच के दौरान फैक्ट्री में हल्दी पाउडर तैयार होता मिला, लेकिन वहां साबुत हल्दी का स्टॉक नहीं मिला। इसके बजाय बड़ी मात्रा में चावल के टूटे दाने, रंग मिश्रित तरल पदार्थ (लिक्विड कलर) और अन्य कच्चा माल मिला, जिससे अधिकारियों को संदेह हुआ कि इन्हीं सामग्रियों के माध्यम से हल्दी पाउडर जैसा उत्पाद तैयार किया जा रहा था।

लैब रिपोर्ट से होगी सच्चाई स्पष्ट

अधिकारियों ने फैक्ट्री से विभिन्न नमूने एकत्र कर अधिकृत प्रयोगशाला भेज दिए हैं। यदि जांच में खाद्य मानकों का उल्लंघन या मिलावट की पुष्टि होती है तो संबंधित संचालकों के विरुद्ध खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल विभाग ने पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

स्वास्थ्य पर पड़ सकता है गंभीर असर

खाद्य विशेषज्ञों के अनुसार यदि मसालों में कृत्रिम रंग, निम्न गुणवत्ता वाले पदार्थ या अन्य मिलावटी सामग्री का उपयोग किया जाता है, तो इससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं। लंबे समय तक ऐसे उत्पादों का सेवन पाचन तंत्र, यकृत (लीवर) और अन्य अंगों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

खाद्य सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

कानपुर की यह कार्रवाई एक बार फिर खाद्य उत्पादों में मिलावट की समस्या को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना रही है। त्योहारों और बढ़ती उपभोक्ता मांग के बीच खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित निरीक्षण, कठोर निगरानी और त्वरित कानूनी कार्रवाई ही ऐसे मामलों पर प्रभावी नियंत्रण का माध्यम बन सकती है।

रिपोर्ट ब्यूरो कानपुर|लाइव भारत समाचार 

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