Livebharatsamachar ब्यूरो: भारतीय क्रिकेट टीम जब अपने ही घरेलू मैदान पर खेलती है, तो फैंस को उम्मीद होती है कि टीम इंडिया पूरी तरह से मेजबान की भूमिका में होगी। लेकिन अफगानिस्तान के खिलाफ चल रही मौजूदा टी20 सीरीज में कुछ अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है। दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेले जा रहे इन मुकाबलों में भारतीय टीम तकनीकी रूप से ‘अवे’ (Away) टीम की तरह व्यवहार कर रही है, जिसके पीछे के कारण जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे।
अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड की मेजबानी का पेच
दरअसल, इस पूरी सीरीज का आयोजन अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (ACB) द्वारा किया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नियमों के अनुसार, जब कोई बोर्ड किसी सीरीज को ‘होस्ट’ करता है, तो उसे ही मेजबान माना जाता है। चूंकि अफगानिस्तान के पास अपने देश में अंतरराष्ट्रीय मैचों के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचा और सुरक्षा व्यवस्था की चुनौतियां हैं, इसलिए उन्होंने भारत को अपने ‘घरेलू मैदान’ के रूप में चुना है।
क्यों दिल्ली को चुना गया?
अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के साथ एक समझौता किया है, जिसके तहत भारत के प्रमुख स्टेडियमों का उपयोग अफगानिस्तान के घरेलू मैचों के लिए किया जा रहा है। दिल्ली का अरुण जेटली स्टेडियम इस सीरीज के लिए मुख्य केंद्र है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल अफगानिस्तान क्रिकेट के विकास के लिए जरूरी है, बल्कि भारतीय दर्शकों को भी एक अलग तरह का अंतरराष्ट्रीय अनुभव प्रदान करता है।
सीरीज के मुख्य बिंदु
- अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड आधिकारिक तौर पर सीरीज का मेजबान है।
- भारतीय टीम को प्रोटोकॉल के तहत ‘अवे’ टीम के रूप में रखा गया है।
- स्टेडियम में अफगानिस्तान के झंडे और उनके बोर्ड के लोगो को प्राथमिकता दी जा रही है।
- सभी तीन टी20 मैच दिल्ली में ही खेले जा रहे हैं, जो इस व्यवस्था का हिस्सा है।
यह व्यवस्था क्रिकेट कूटनीति का एक बेहतरीन उदाहरण है, जहां बीसीसीआई ने अपने पड़ोसी देश के क्रिकेट को संवारने के लिए अपने संसाधनों को साझा करने का फैसला किया है। भले ही कागजों पर टीम इंडिया ‘अवे’ टीम है, लेकिन दिल्ली के दर्शकों का समर्थन हमेशा की तरह भारतीय खिलाड़ियों के साथ ही है।