Livebharatsamachar ब्यूरो: रूस और यूक्रेन के बीच जारी भीषण संघर्ष के बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल सामने आई है। क्रेमलिन ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अपनी हालिया मुलाकातों के दौरान यूक्रेन संकट को समाप्त करने के लिए ‘गुड ऑफिस’ (मध्यस्थता या सहयोग) की पेशकश की है।
शांति वार्ता की दिशा में नई पहल
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वैश्विक नेताओं ने इस जटिल मुद्दे को सुलझाने के लिए अपनी इच्छा व्यक्त की है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में युद्ध को रोकने के लिए कूटनीतिक दबाव बढ़ रहा है। भारत और चीन दोनों ही देशों ने इस पूरे संघर्ष के दौरान ‘संवाद और कूटनीति’ के माध्यम से समाधान निकालने पर जोर दिया है।
रूसी राष्ट्रपति के सहयोगी ने स्पष्ट किया कि भारत और चीन जैसे देशों की भूमिका महत्वपूर्ण है क्योंकि वे न केवल रूस के साथ मजबूत संबंध रखते हैं, बल्कि वैश्विक मंच पर शांति स्थापित करने की क्षमता भी रखते हैं।
प्रमुख बिंदु:
- प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन के साथ बातचीत में दोहराया कि यह युग युद्ध का नहीं है।
- चीन और भारत दोनों ही देशों ने यूक्रेन संकट के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन किया है।
- क्रेमलिन ने इन नेताओं के सुझावों को सकारात्मक माना है।
- वैश्विक स्तर पर शांति प्रयासों के लिए भारत की तटस्थ और संतुलित नीति की सराहना हो रही है।
कूटनीतिक संतुलन की चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ उसे एक ऐसे मंच पर खड़ा करती है जहां वह रूस और पश्चिमी देशों के बीच एक सेतु का काम कर सकता है। हालांकि, युद्ध की जटिलताओं को देखते हुए किसी भी ठोस शांति समझौते तक पहुंचना अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।