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Livebharatsamachar ब्यूरो: हिमाचल प्रदेश की सड़कों पर बेसहारा और आवारा पशुओं की बढ़ती संख्या ने आम जनता के लिए गंभीर खतरा पैदा कर दिया है। आए दिन होने वाली सड़क दुर्घटनाओं और जनहानि के मामलों को गंभीरता से लेते हुए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़े निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने सरकार से पूछा है कि सड़कों को आवारा पशुओं से मुक्त करने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं और भविष्य की कार्ययोजना क्या है।

सड़कों पर मौत का जाल

प्रदेश के विभिन्न राजमार्गों और शहरी सड़कों पर आवारा पशुओं का डेरा आम बात हो गई है। विशेष रूप से रात के समय, जब ये पशु सड़कों के बीचों-बीच बैठ जाते हैं, तो वाहन चालकों के लिए इन्हें देख पाना मुश्किल हो जाता है। इससे न केवल पशुओं की जान जा रही है, बल्कि वाहन सवार भी गंभीर दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। हाईकोर्ट ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि नागरिकों की सुरक्षा राज्य की प्राथमिकता होनी चाहिए।

अदालत की सख्त टिप्पणी

अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि सड़कों पर आवारा पशुओं की आवाजाही पूरी तरह बंद हो और इसके लिए गौसदनों की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ प्रभावी मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया जाए।

प्रमुख बिंदु:

हाईकोर्ट ने सरकार को अगली सुनवाई तक एक विस्तृत हलफनामा दायर करने का आदेश दिया है, जिसमें उन सभी कदमों का विवरण होगा जो आवारा पशुओं को सड़कों से हटाने के लिए उठाए गए हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस दिशा में कितनी तत्परता दिखाता है।

बुधवार, 16 सितम्बर , 2026

हिमाचल की सड़कों पर आवारा पशुओं का आतंक: हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा ठोस एक्शन प्लान

Livebharatsamachar ब्यूरो: हिमाचल प्रदेश की सड़कों पर बेसहारा और आवारा पशुओं की बढ़ती संख्या ने आम जनता के लिए गंभीर खतरा पैदा कर दिया है। आए दिन होने वाली सड़क दुर्घटनाओं और जनहानि के मामलों को गंभीरता से लेते हुए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़े निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने सरकार से पूछा है कि सड़कों को आवारा पशुओं से मुक्त करने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं और भविष्य की कार्ययोजना क्या है।

सड़कों पर मौत का जाल

प्रदेश के विभिन्न राजमार्गों और शहरी सड़कों पर आवारा पशुओं का डेरा आम बात हो गई है। विशेष रूप से रात के समय, जब ये पशु सड़कों के बीचों-बीच बैठ जाते हैं, तो वाहन चालकों के लिए इन्हें देख पाना मुश्किल हो जाता है। इससे न केवल पशुओं की जान जा रही है, बल्कि वाहन सवार भी गंभीर दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। हाईकोर्ट ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि नागरिकों की सुरक्षा राज्य की प्राथमिकता होनी चाहिए।

अदालत की सख्त टिप्पणी

अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि सड़कों पर आवारा पशुओं की आवाजाही पूरी तरह बंद हो और इसके लिए गौसदनों की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ प्रभावी मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया जाए।

प्रमुख बिंदु:

  • सड़कों पर आवारा पशुओं के प्रबंधन के लिए जवाबदेही तय करने के निर्देश।
  • गौसदनों और आश्रय स्थलों की क्षमता में तत्काल वृद्धि की आवश्यकता।
  • दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां विशेष सुरक्षा उपाय लागू करना।
  • पशु मालिकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान।

हाईकोर्ट ने सरकार को अगली सुनवाई तक एक विस्तृत हलफनामा दायर करने का आदेश दिया है, जिसमें उन सभी कदमों का विवरण होगा जो आवारा पशुओं को सड़कों से हटाने के लिए उठाए गए हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस दिशा में कितनी तत्परता दिखाता है।

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