Livebharatsamachar ब्यूरो: केंद्र सरकार अब सरकारी कार्यालयों से निकलने वाले ई-कचरे (E-waste) को एक बड़ी आर्थिक संपत्ति के रूप में देख रही है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने हाल ही में इस दिशा में एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि सरकारी दफ्तरों से निकलने वाले ई-कचरे का सही प्रबंधन किया जाए, तो इससे सालाना 10,000 करोड़ रुपये तक का राजस्व प्राप्त किया जा सकता है।
ई-कचरा प्रबंधन की नई कार्ययोजना
सरकार ने ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के तहत ई-कचरे के निपटान पर विशेष जोर दिया है। डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार, सरकारी विभागों में पुराने कंप्यूटर, प्रिंटर, सर्वर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का एक बड़ा भंडार जमा हो जाता है, जो अक्सर कबाड़ में बदल जाता है। यदि इसे वैज्ञानिक तरीके से रिसाइकिल किया जाए, तो न केवल पर्यावरण को लाभ होगा, बल्कि सरकारी खजाने में भी भारी इजाफा होगा।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, ‘सरकारी कार्यालयों में जमा ई-कचरा अब कचरा नहीं, बल्कि एक संसाधन है। उचित प्रबंधन से हम सालाना 10,000 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित कर सकते हैं, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा कदम होगा।’
प्रमुख बिंदु और रणनीतिक लाभ
- संसाधन पुनर्चक्रण: पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से कीमती धातुओं जैसे सोना, चांदी और तांबे को अलग कर उनका पुन: उपयोग किया जाएगा।
- पर्यावरण संरक्षण: ई-कचरे के वैज्ञानिक निपटान से जहरीले रसायनों को मिट्टी और जल स्रोतों में मिलने से रोका जा सकेगा।
- रोजगार के अवसर: ई-कचरा रिसाइकिलिंग उद्योग के विस्तार से देश में नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
- डिजिटल इंडिया का विस्तार: पुराने उपकरणों को हटाकर नए और आधुनिक उपकरणों को लगाने की प्रक्रिया में तेजी आएगी।
आगामी चुनौतियां और समाधान
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार सभी मंत्रालयों और विभागों के लिए एक केंद्रीकृत ई-कचरा इन्वेंट्री बनाने की योजना बना रही है। इसके लिए अधिकृत रिसाइकिलर्स के साथ साझेदारी की जाएगी ताकि डेटा सुरक्षा और पर्यावरण मानकों का पूर्ण पालन सुनिश्चित हो सके। यह पहल न केवल ‘वेस्ट टू वेल्थ’ के विजन को साकार करेगी, बल्कि भारत को वैश्विक स्तर पर ई-कचरा प्रबंधन में एक रोल मॉडल के रूप में स्थापित करेगी।