Livebharatsamachar ब्यूरो: मालदीव ने भारत से लिए गए 150 मिलियन डॉलर के ट्रेजरी बिल ऋण का पूर्ण भुगतान कर दिया है। आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे मालदीव के लिए यह एक बड़ी राहत है, क्योंकि इस ऋण को चुकाने के लिए उसे छह बार समय सीमा बढ़ानी पड़ी थी। अंतिम 50 मिलियन डॉलर की किस्त का भुगतान होते ही यह वित्तीय दायित्व अब समाप्त हो गया है।
आर्थिक कूटनीति और भारत का सहयोग
भारत ने मालदीव की कठिन आर्थिक स्थिति को देखते हुए इस ऋण के पुनर्भुगतान के लिए कई बार विस्तार दिया था। यह कदम दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों और भारत की ‘पड़ोसी पहले’ (Neighbourhood First) नीति के तहत मालदीव को आर्थिक स्थिरता प्रदान करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
मालदीव के वित्त मंत्रालय के अनुसार, भारत द्वारा दी गई समय सीमा में छूट ने देश को अपनी राजकोषीय स्थिति को संभालने और विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान की है।
भुगतान प्रक्रिया और चुनौतियां
मालदीव लंबे समय से विदेशी मुद्रा की कमी और बढ़ते कर्ज के बोझ का सामना कर रहा था। इस ऋण को चुकाने के लिए मालदीव सरकार ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के माध्यम से सहयोग लिया था। ऋण भुगतान की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- कुल ऋण राशि 150 मिलियन डॉलर थी।
- भुगतान के लिए कुल छह बार समय सीमा बढ़ाई गई थी।
- अंतिम 50 मिलियन डॉलर की किस्त का भुगतान कर इसे पूरी तरह निपटाया गया।
- यह भुगतान मालदीव की साख को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुधारने में मदद करेगा।
भविष्य की राह
इस ऋण के निपटारे के बाद मालदीव अब अपनी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के साथ बातचीत कर रहा है। भारत का यह सहयोग न केवल मालदीव की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के रणनीतिक प्रभाव और भरोसेमंद साथी की छवि को भी मजबूत करता है।