Livebharatsamachar ब्यूरो: देश के युवाओं के भविष्य को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। हाल ही में हुए एक व्यापक सर्वे के अनुसार, भारत के 250 जिलों में लगभग 25 प्रतिशत युवा न तो किसी शैक्षणिक संस्थान में नामांकित हैं और न ही वे किसी रोजगार से जुड़े हैं। यह आंकड़ा देश की जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
बेरोजगारी और शिक्षा के बीच बढ़ता फासला
सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि कौशल विकास और औपचारिक शिक्षा के बावजूद युवाओं का एक बड़ा वर्ग मुख्यधारा से कटा हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति न केवल आर्थिक उत्पादकता को प्रभावित कर रही है, बल्कि सामाजिक असंतोष का कारण भी बन सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ‘नीट’ (NEET – Not in Education, Employment, or Training) श्रेणी में युवाओं की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि मौजूदा शिक्षा प्रणाली और बाजार की जरूरतों के बीच एक बड़ा गैप मौजूद है। इसे भरने के लिए तत्काल नीतिगत हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
सर्वे के प्रमुख निष्कर्ष
- देश के 250 जिलों में 25% युवा पूरी तरह से निष्क्रिय हैं।
- शिक्षा और रोजगार के अवसरों तक पहुंच की कमी मुख्य बाधा बनी हुई है।
- ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में यह समस्या अधिक गंभीर है।
- कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों का जमीनी स्तर पर असर कम दिखाई दे रहा है।
समाधान की राह
सरकार और निजी क्षेत्र को मिलकर ऐसे मॉडल तैयार करने होंगे जो युवाओं को सीधे उद्योग की जरूरतों से जोड़ सकें। केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि व्यावहारिक कौशल और इंटर्नशिप के अवसरों को प्राथमिकता देना समय की मांग है। यदि इस वर्ग को सही दिशा नहीं मिली, तो आने वाले वर्षों में देश के लिए एक बड़ी चुनौती उत्पन्न हो सकती है।