Livebharatsamachar ब्यूरो: पश्चिम बंगाल में आगामी उपचुनावों से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पार्टी को उस समय एक और बड़ा झटका लगा जब रेजीनगर सीट से ममता बनर्जी द्वारा चुने गए उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने अपनी उम्मीदवारी वापस लेने की घोषणा कर दी। यह घटनाक्रम नंदीग्राम में पार्टी की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे के अचानक मैदान छोड़ने के महज 24 घंटे के भीतर सामने आया है।
नंदीग्राम में भी बिगड़ा खेल
नंदीग्राम में संचिता प्रधान डे का नामांकन वापस लेना ममता बनर्जी के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, संचिता ने अपने पति के साथ गुरुवार को विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी। हालांकि, उन्होंने अपनी उम्मीदवारी वापस लेने के पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया, लेकिन इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म है। संचिता के हटने के बाद अब टीएमसी ने नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का फैसला किया है।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उपचुनावों से ठीक पहले उम्मीदवारों का इस तरह से हटना तृणमूल कांग्रेस के जमीनी संगठन में आंतरिक कलह या दबाव की ओर इशारा करता है। यह ममता बनर्जी की रणनीति के लिए एक बड़ी परीक्षा है।
उपचुनावों पर असर
- रेजीनगर और नंदीग्राम में उम्मीदवारों का हटना टीएमसी की चुनावी तैयारियों को प्रभावित कर सकता है।
- विपक्ष इस स्थिति का लाभ उठाने की पूरी कोशिश में है।
- कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों के साथ समन्वय अब पार्टी के लिए और भी जरूरी हो गया है।
फिलहाल, पार्टी नेतृत्व की ओर से इन घटनाक्रमों पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन राज्य की राजनीति में इन इस्तीफों ने टीएमसी की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि पार्टी इन सीटों पर अपनी पकड़ कैसे बनाए रखती है और आने वाले दिनों में क्या नई रणनीति अपनाती है।