Livebharatsamachar ब्यूरो: हरियाणा के सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई महत्वाकांक्षी योजना फिलहाल एक बड़े संकट से जूझ रही है। राज्य के सरकारी स्कूलों में लगभग 1.85 लाख टैबलेट खराब पड़े हैं, जिससे छात्रों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। इन खराब उपकरणों में से लगभग 50 प्रतिशत अकेले शहरी क्षेत्रों के स्कूलों से संबंधित हैं।
मरम्मत में देरी से बढ़ रही छात्रों की मुश्किलें
शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, टैबलेट के रखरखाव और मरम्मत के लिए अनुबंधों को अंतिम रूप देने में हो रही देरी इस समस्या का मुख्य कारण है। लंबे समय से इन उपकरणों की सर्विसिंग न होने के कारण बड़ी संख्या में टैबलेट कबाड़ में तब्दील हो रहे हैं। छात्रों द्वारा लापरवाही और तकनीकी खराबी के चलते ये डिवाइस काम करना बंद कर चुके हैं, जिससे डिजिटल लर्निंग का सपना अधूरा नजर आ रहा है।
विभाग की सफाई और भविष्य की योजना
शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हम टैबलेट की मरम्मत के लिए आवश्यक प्रशासनिक मंजूरियों को तेजी से पूरा करने की प्रक्रिया में हैं। हमारा लक्ष्य जल्द से जल्द इन उपकरणों को चालू हालत में लाकर छात्रों को वापस सौंपना है ताकि उनकी पढ़ाई में कोई बाधा न आए।’
मुख्य बिंदु:
- राज्य भर में 1.85 लाख से अधिक टैबलेट फिलहाल उपयोग के लायक नहीं हैं।
- खराब टैबलेट का लगभग आधा हिस्सा शहरी सरकारी स्कूलों का है।
- मरम्मत अनुबंधों में देरी के कारण डिजिटल शिक्षा की गति धीमी हुई है।
- विभाग जल्द ही टेंडर प्रक्रिया पूरी कर मरम्मत कार्य शुरू करने की तैयारी में है।
शिक्षा विभाग अब इस बात पर जोर दे रहा है कि भविष्य में उपकरणों के रखरखाव के लिए एक स्थायी तंत्र विकसित किया जाए ताकि सरकारी खजाने से खरीदे गए इन महंगे गैजेट्स का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके।