Livebharatsamachar की विशेष रिपोर्ट: भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने वैश्विक मंच पर संयुक्त राष्ट्र (UN) की कार्यप्रणाली और उसकी प्रासंगिकता पर बेहद कड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा है कि आज की तारीख में संयुक्त राष्ट्र वैश्विक सुरक्षा, कूटनीति और मानवता के मोर्चों पर काफी हद तक ‘अप्रासंगिक’ (Irrelevant) साबित हो रहा है। विदेश मंत्री ने खाड़ी देशों के संकट, रूस-यूक्रेन युद्ध, अफ्रीकी महाद्वीप की अनदेखी और कोविड-19 महामारी के दौरान वैश्विक स्वास्थ्य प्रबंधन जैसे गंभीर मामलों में अंतरराष्ट्रीय संस्था की नाकामी को उजागर किया है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर बहुपक्षीय संस्थाओं (Multilateral Institutions) की भूमिका और उनकी विश्वसनीयता पर लगातार बहस छिड़ी हुई है और ग्लोबल साउथ (Global South) के देश लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) सहित अन्य प्रमुख अंगों में व्यापक सुधारों की मांग कर रहे हैं।
घटना की गहराई और प्रमुख पहलू (Deep Breakdown)
- खाड़ी संकट और कूटनीतिक गतिरोध पर संयुक्त राष्ट्र की निष्क्रियता।
- रूस-यूक्रेन संघर्ष को रोकने या शांति स्थापित करने में वैश्विक संस्था की पूर्ण विफलता।
- अफ्रीकी देशों की समस्याओं और विकास संबंधी चुनौतियों के प्रति अंतरराष्ट्रीय समुदाय की उदासीनता।
- कोविड-19 महामारी के दौरान टीकों के समान वितरण और वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा में यूएन एजेंसियों का लड़खड़ाना।
- सुरक्षा परिषद में वीटो पावर और पुरानी संरचना के कारण आज की वैश्विक वास्तविकताओं से इसका बेमेल होना।
पृष्ठभूमि और बड़ा परिदृश्य (Background & Context)
संयुक्त राष्ट्र की स्थापना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1945 में वैश्विक शांति, सुरक्षा और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए की गई थी। उस समय की भू-राजनीतिक परिस्थितियां आज की दुनिया से बिल्कुल भिन्न थीं। पिछले आठ दशकों में दुनिया में आर्थिक, तकनीकी और राजनीतिक संतुलन में अभूतपूर्व बदलाव आए हैं। एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के कई देश आज आर्थिक और सामरिक रूप से शक्तिशाली बन चुके हैं, लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध के विजेताओं के हाथ में केंद्रित सत्ता और वीटो पावर ने संयुक्त राष्ट्र को एक बंद क्लब बना दिया है। यही कारण है कि आज जब यूक्रेन जैसे गंभीर क्षेत्रीय संघर्ष, गाजा और खाड़ी क्षेत्र के संकट या सूडान और कांगो जैसे अफ्रीकी देशों में गृहयुद्ध की स्थिति उत्पन्न होती है, तो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद किसी ठोस और प्रभावी निर्णय पर पहुंचने में असमर्थ नजर आती है। भारत लंबे समय से इस बात की पैरवी करता रहा है कि जब तक संयुक्त राष्ट्र के ढांचे में आमूल-चूल परिवर्तन नहीं किए जाते, तब तक यह संस्था इक्कीसवीं सदी की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम नहीं होगी।
प्रभाव और दूरगामी परिणाम (Impact Analysis)
विदेश मंत्री एस जयशंकर के इन तीखे बयानों के दूरगामी भू-राजनीतिक परिणाम देखने को मिल सकते हैं। यह बयान केवल भारत का अकेला दृष्टिकोण नहीं है, बल्कि यह ग्लोबल साउथ की उस गहरी निराशा को भी व्यक्त करता है जो पश्चिमी देशों के वर्चस्व वाली अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था से त्रस्त हो चुका है। जब संयुक्त राष्ट्र जैसे संगठन वैश्विक संकटों का समाधान खोजने में असफल होते हैं, तो दुनिया के देश क्षेत्रीय संगठनों, द्विपक्षीय वार्ताओं और वैकल्पिक मंचों (जैसे ब्रिक्स या जी-20) की ओर अधिक आकर्षित होने लगते हैं। इसका सीधा असर यह हो रहा है कि पारंपरिक पश्चिमी नेतृत्व वाली वैश्विक व्यवस्था कमजोर पड़ रही है और एक बहुध्रुवी (Multipolar) दुनिया तेजी से उभर रही है। इसके अलावा, छोटे और विकासशील देशों का संयुक्त राष्ट्र पर से भरोसा उठ रहा है, जो वैश्विक शांति और नियम-आधारित व्यवस्था (Rules-based order) के लिए एक बड़ा खतरा है।
वैश्विक संस्थाएं यदि समय के साथ खुद को नहीं बदलतीं, तो वे अपनी प्रासंगिकता खो देती हैं। आज दुनिया को ऐसे संयुक्त राष्ट्र की आवश्यकता है जो पुरानी मानसिकता से बाहर निकलकर समकालीन वास्तविकताओं को स्वीकार करे और सभी क्षेत्रों की आवाज को प्रतिनिधित्व दे।
अंतिम निष्कर्ष (Final Takeaway)
विदेश मंत्री एस जयशंकर द्वारा संयुक्त राष्ट्र की विफलता पर दिया गया यह बयान वैश्विक कूटनीति में एक आईना दिखाने का काम करता है। खाड़ी संकट, यूक्रेन युद्ध, अफ्रीकी देशों की उपेक्षा और कोविड काल की त्रासदियों ने यह साबित कर दिया है कि मौजूदा वैश्विक ढांचा अपनी उपयोगिता खोता जा रहा है। यदि संयुक्त राष्ट्र को अपनी प्रासंगिकता और गरिमा बचाए रखनी है, तो सुरक्षा परिषद में सुधार और निर्णय लेने की प्रक्रिया को पारदर्शी व समावेशी बनाना ही एकमात्र विकल्प है। भारत की यह मुखरता दर्शाती है कि अब देश वैश्विक मंच पर अपनी बात को बिना किसी लाग-लपेट के रखने और एक न्यायसंगत अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की मांग करने में पूरी तरह सक्षम है।