Livebharatsamachar: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के मंच से आतंकवाद के मुद्दे पर दुनिया के देशों को दोहरे मापदंड त्यागने की सख्त चेतावनी दी है और इसके पूरे इकोसिस्टम को नेस्तनाबूद करने के लिए वैश्विक स्तर पर ठोस और एकजुट कार्रवाई की जोरदार वकालत की है।
मुख्य बिंदु एवं हाइलाइट्स (Key Highlights)
- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवाद के खिलाफ दोहरे मानदंडों की कड़ी निंदा की।
- आतंकवादी नेटवर्क के पूरे वित्तीय और साजो-सामान के तंत्र को पूरी तरह से ध्वस्त करने पर जोर दिया गया।
- क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए एससीओ सदस्य देशों के बीच आपसी सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई गई।
- भारत ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते।
विस्तृत समाचार एवं पूरा घटनाक्रम (Detailed Report)
शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्य देशों के रक्षा मंत्रियों की उच्चस्तरीय बैठक में भारत का पक्ष रखते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दों पर खुलकर बात की। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि आतंकवाद मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है और कुछ देश आज भी अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं के तहत आतंकवाद को लेकर चयनात्मक रवैया अपना रहे हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि आतंकवाद से मुकाबले में किसी भी प्रकार के दोहरे मानदंड स्वीकार नहीं किए जा सकते। जो देश आतंकवाद को अपने भू-राजनीतिक हितों को साधने के साधन के रूप में इस्तेमाल करते हैं, उन्हें इसके परिणामों के प्रति सचेत होना चाहिए।
रक्षा मंत्री ने आतंकवाद के केवल चेहरे को खत्म करने के बजाय उसके पूरे नेटवर्क, वित्तीय स्रोतों, हथियारों की तस्करी और वैचारिक समर्थन के तंत्र यानी ‘इकोसिस्टम’ को नेस्तनाबूद करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने रेखांकित किया कि जब तक आतंकवाद के वित्तपोषण और सुरक्षित ठिकानों को समाप्त नहीं किया जाता, तब तक इस वैश्विक संकट से पूरी तरह से निजात पाना असंभव है। भारत ने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को दोहराते हुए कहा कि सभी एससीओ देशों को अपनी खुफिया जानकारी साझा करने के तंत्र को और अधिक मजबूत करना होगा, ताकि सीमा पार आतंकवाद और कट्टरपंथ जैसी गंभीर चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
बैठक के दौरान क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और आपसी विश्वास को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न रणनीतिक पहलों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। भारत ने हमेशा से ही इस बात पर जोर दिया है कि आर्थिक विकास और क्षेत्रीय समृद्धि के लिए शांति और स्थिरता पहली शर्त है। आतंकवाद जैसी असामाजिक ताकतें इस प्रगति में सबसे बड़ी बाधा हैं। राजनाथ सिंह ने सदस्य देशों से आह्वान किया कि वे अपने संकीर्ण राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर एक साझा और मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करें, जिससे आतंकवादियों और उन्हें शरण देने वालों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जवाबदेह ठहराया जा सके।
आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई किसी एक देश या क्षेत्र तक सीमित नहीं होनी चाहिए। हमें बिना किसी भेदभाव के हर प्रकार के आतंकवाद और उसके वित्तपोषण तंत्र को पूरी ताकत से ध्वस्त करना होगा, तभी हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित हो सकेगा। – राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री
भविष्य का असर एवं निष्कर्ष (Future Impact & Conclusion)
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का यह कड़ा संदेश अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एससीओ जैसे प्रतिष्ठित मंच पर आतंकवाद के खात्मे के लिए वैश्विक एकजुटता की यह मांग स्पष्ट करती है कि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर किसी भी प्रकार का समझौता करने के मूड में नहीं है। इस बैठक के बाद उम्मीद की जा रही है कि एससीओ के अन्य सदस्य देश भी आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को और अधिक गहरा करेंगे और सुरक्षा तंत्र को मजबूत बनाने के लिए साझा रणनीतियों पर काम करेंगे। अंततः, यह वैश्विक समुदाय के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि आतंकवाद के समूल नाश के लिए सामूहिक और बिना शर्त प्रतिबद्धता ही एकमात्र रास्ता है।