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Livebharatsamachar धर्म-अध्यात्म: 2026-10-21 का विशेष धार्मिक दायित्व, आज के पूज्य देव भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा विधि और पावन व्रत कथा।

🙏 आज के पूज्य देव: भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी

आज का दिन भौतिक सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत मंगलकारी है। साधक को चाहिए कि वह परोपकार, दान-पुण्य और सत्संग में अपना समय व्यतीत करे। वाणी में संयम रखते हुए दीन-दुखियों की सहायता करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की असीम कृपा प्राप्त होती है।

🪔 प्रातःकाल पूजा विधान (Puja Vidhan & Mantras):

प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान आदि से निवृत्त होकर पवित्र पीले वस्त्र धारण करें। ईशान कोण में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित कर गंगाजल से छिड़काव करें। तत्पश्चात, पीले पुष्प, रो अक्षत, धूप, दीप और तुलसी दल अर्पित करते हुए 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप करें। अंत में सात्विक भोग लगाकर आरती करें और क्षमा प्रार्थना करें।

📖 पावन व्रत कथा एवं महात्म्य (Vrat Katha & Sacred Legend):

पौराणिक कथा के अनुसार, कार्तिक मास के इस पावन काल में समुद्र मंथन के समय माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु का विशेष मिलन हुआ था। देवर्षि नारद के पूछने पर नारायण ने बताया कि जो भी भक्त इस दिन सच्चे मन से विष्णु-लक्ष्मी का पूजन और व्रत करता है, उसके जीवन से दरिद्रता हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है। इस व्रत के प्रभाव से राजा इंद्र को भी खोया हुआ वैभव पुनः प्राप्त हुआ था। विधि-विधान से पूजन करने वाले को आरोग्यता और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

बुधवार, 21 अक्टूबर , 2026

आज का धार्मिक दायित्व एवं व्रत कथा (2026-10-21): आज के पूज्य देव (भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी), पूजा विधान एवं महात्म्य

Livebharatsamachar धर्म-अध्यात्म: 2026-10-21 का विशेष धार्मिक दायित्व, आज के पूज्य देव भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा विधि और पावन व्रत कथा।

🙏 आज के पूज्य देव: भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी

आज का दिन भौतिक सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत मंगलकारी है। साधक को चाहिए कि वह परोपकार, दान-पुण्य और सत्संग में अपना समय व्यतीत करे। वाणी में संयम रखते हुए दीन-दुखियों की सहायता करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की असीम कृपा प्राप्त होती है।

🪔 प्रातःकाल पूजा विधान (Puja Vidhan & Mantras):

प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान आदि से निवृत्त होकर पवित्र पीले वस्त्र धारण करें। ईशान कोण में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित कर गंगाजल से छिड़काव करें। तत्पश्चात, पीले पुष्प, रो अक्षत, धूप, दीप और तुलसी दल अर्पित करते हुए ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जप करें। अंत में सात्विक भोग लगाकर आरती करें और क्षमा प्रार्थना करें।

📖 पावन व्रत कथा एवं महात्म्य (Vrat Katha & Sacred Legend):

पौराणिक कथा के अनुसार, कार्तिक मास के इस पावन काल में समुद्र मंथन के समय माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु का विशेष मिलन हुआ था। देवर्षि नारद के पूछने पर नारायण ने बताया कि जो भी भक्त इस दिन सच्चे मन से विष्णु-लक्ष्मी का पूजन और व्रत करता है, उसके जीवन से दरिद्रता हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है। इस व्रत के प्रभाव से राजा इंद्र को भी खोया हुआ वैभव पुनः प्राप्त हुआ था। विधि-विधान से पूजन करने वाले को आरोग्यता और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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