बस्ती में प्रस्तावित इथेनॉल फैक्ट्री पर बढ़ा विवाद कंपनी ने सभी आरोपों को बताया भ्रामक

पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर किसान संगठनों ने जताई चिंता, कंपनी ने सभी आरोपों को बताया भ्रामक; प्रशासन से निष्पक्ष समाधान की मांग
बस्ती 7 जुलाई | विशेष संवाददाता
उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद में प्रस्तावित इथेनॉल परियोजना को लेकर बहस तेज हो गई है। सल्टउवा गोपालपुर विकास खंड के दसिया गांव में स्थापित की जा रही इथेनॉल फैक्ट्री को लेकर एक ओर किसान संगठनों ने पर्यावरण और कृषि पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की है, वहीं दूसरी ओर परियोजना संचालित कर रही कंपनी ने सभी आशंकाओं को निराधार बताते हुए कहा है कि फैक्ट्री सभी वैधानिक मानकों के अनुरूप स्थापित की जा रही है।

स्थानीय स्तर पर शुरू हुआ यह विवाद अब क्षेत्रीय राजनीति और किसान संगठनों के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर फैक्ट्री के पक्ष और विपक्ष में लगातार दावे किए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों में भी भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
किसान संगठनों ने उठाए पर्यावरणीय सवाल
खेत मजदूर यूनियन, किसान सभा, सीटू और माकपा से जुड़े नेताओं ने स्थानीय किसानों के साथ दसिया क्षेत्र का दौरा किया। निर्माणाधीन परियोजना स्थल का निरीक्षण करने के बाद संगठनों ने कहा कि फैक्ट्री के संचालन से पर्यावरण, भूजल, कृषि भूमि तथा ग्रामीण जनजीवन पर संभावित प्रभावों का गंभीर अध्ययन आवश्यक है।

संगठनों का कहना है कि यदि स्थानीय नागरिकों और किसानों की आशंकाओं का समय रहते समाधान नहीं किया गया तो भविष्य में व्यापक जनआंदोलन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि विभिन्न संगठनों के साथ विस्तृत चर्चा के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।

‘जनहित सर्वोपरि’ का दिया संदेश
किसान नेताओं ने कहा कि ग्रामीणों द्वारा उठाए जा रहे पर्यावरणीय मुद्दों को केवल विरोध मानकर खारिज नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि किसी भी औद्योगिक परियोजना के साथ स्थानीय लोगों की सुरक्षा, कृषि और पर्यावरण का संरक्षण भी समान रूप से आवश्यक है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि सभी पक्षों को विश्वास में लेकर पारदर्शी समाधान निकाला जाए।
कंपनी ने आरोपों को बताया भ्रामक

इधर, परियोजना संचालित कर रही अनीता डिस्टलरी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक रोहन जायसवाल ने सभी आरोपों का खंडन किया है। उनका कहना है कि फैक्ट्री के लिए भूमि का क्रय-विक्रय सभी संबंधित पक्षों की सहमति से विधिसम्मत तरीके से किया गया है और पिछले चार वर्षों में भूमि खरीद को लेकर कोई विवाद सामने नहीं आया।
कंपनी का कहना है कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही कई जानकारियाँ तथ्यात्मक रूप से गलत हैं। निदेशक के अनुसार, परियोजना एक इथेनॉल उत्पादन इकाई है तथा इसे निर्धारित पर्यावरणीय और सरकारी मानकों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है।
प्रशासन के सामने संतुलन की चुनौती
विवाद के बीच प्रशासन के सामने विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि परियोजना से जुड़े सभी तकनीकी एवं पर्यावरणीय पहलुओं की पारदर्शी जानकारी सार्वजनिक की जाए और जनसुनवाई के माध्यम से लोगों की शंकाओं का समाधान किया जाए, तो विवाद कम हो सकता है।
रिपोर्ट ब्यूरो बस्ती|लाइव भारत समाचार