लाइव भारत समाचार में आपका स्वागत है धर्मेंद्र प्रधान ने भेजा इस्तीफ़ा, छात्र आंदोलन के दबाव के बीच बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सीजेपी का दावा— "हमने कर दिखाया"; NEET पेपर लीक विवाद के बाद शिक्षा सुधार पर राष्ट्रीय बहस तेज   [video width="568" height="320" mp4="https://livebharatsamachar.com/wp-content/uploads/2026/07/Video.Guru_20260725_183306857.mp4"][/video] विश्व सुर्ख़ी | भारत की शिक्षा राजनीति में बड़ा मोड़ धर्मेंद्र प्रधान ने भेजा इस्तीफ़ा, छात्र आंदोलन के दबाव के बीच बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम [caption id="attachment_15094" align="alignnone" width="300"] TOPSHOT - Cockroach Janta Party (CJP) supporters celebrate the resignation of India's Education Minister Dharmendra Pradhan, at Jantar Mantar in New Delhi[/caption] [video width="568" height="320" mp4="https://livebharatsamachar.com/wp-content/uploads/2026/07/Video.Guru_20260725_183440498.mp4"][/video] नई दिल्ली। भारत की शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई सप्ताह से जारी अभूतपूर्व छात्र आंदोलन के बीच शनिवार को देश की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफ़ा भेजने की घोषणा करते हुए कहा कि देश में बनी परिस्थितियों, छात्रों के भविष्य और राष्ट्रीय एकता को ध्यान में रखते हुए उन्होंने यह निर्णय लिया है। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक उनके इस्तीफ़े पर अंतिम निर्णय और औपचारिक स्वीकृति शेष थी। [video width="568" height="320" mp4="https://livebharatsamachar.com/wp-content/uploads/2026/07/Video.Guru_20260725_183736752.mp4"][/video] यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) पेपर लीक मामले को लेकर पूरे देश में व्यापक विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले लगभग एक महीने से कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हजारों छात्र, युवा और सामाजिक संगठनों का आंदोलन जारी था, जिसमें शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और व्यापक सुधार की मांग की जा रही थी। [video width="568" height="320" mp4="https://livebharatsamachar.com/wp-content/uploads/2026/07/Video.Guru_20260725_183839514.mp4"][/video]   "देश की एकता और छात्रों के भविष्य के लिए इस्तीफ़ा" : धर्मेंद्र प्रधान सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी अपने विस्तृत संदेश में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्होंने जीवन के चार दशक शिक्षा, छात्रों और शिक्षा सुधार को समर्पित किए हैं। उन्होंने लिखा कि किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य परीक्षा माफिया या कानूनी जटिलताओं के कारण प्रभावित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में बनी परिस्थितियों का राष्ट्र विरोधी शक्तियाँ लाभ न उठा सकें, छात्र अपनी ऊर्जा आंदोलनों के बजाय पढ़ाई और करियर निर्माण में लगा सकें तथा राष्ट्रीय एकता बनी रहे—इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना त्यागपत्र भेजा है। प्रधान ने यह भी कहा कि उन्होंने पहले दिन से ही इस पूरे विवाद की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की थी और परीक्षा प्रणाली को निष्पक्ष बनाने के लिए हर संभव प्रयास किए, लेकिन इस दौरान कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों द्वारा भ्रम फैलाने और बाधाएँ उत्पन्न करने से उन्हें गहरा दुःख पहुँचा। सीजेपी की प्रतिक्रिया : "लोकतंत्र में जनता की जीत" इस्तीफ़े की घोषणा के तुरंत बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इसे आंदोलन की बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक संघर्ष की जीत है। उन्होंने कहा कि यदि जनता भयमुक्त होकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज़ बुलंद करे तो सरकार को जवाबदेह बनाया जा सकता है। उनके अनुसार यह केवल एक मंत्री का इस्तीफ़ा नहीं बल्कि युवाओं की आवाज़ की जीत है। विपक्ष पहले से कर रहा था इस्तीफ़े की मांग कांग्रेस सहित अनेक विपक्षी दल लंबे समय से शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े की मांग कर रहे थे। विपक्ष का आरोप था कि परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है और इसके लिए सरकार को राजनीतिक तथा प्रशासनिक जवाबदेही तय करनी चाहिए। जंतर-मंतर आंदोलन बना राष्ट्रीय बहस का केंद्र 20 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन धीरे-धीरे राष्ट्रीय अभियान में बदल गया। आंदोलन को देशभर के विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों का समर्थन मिला। लद्दाख के शिक्षाविद् एवं सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी आंदोलन में शामिल हुए और उन्होंने छात्रों के समर्थन में अनशन किया। इसके अतिरिक्त देश के लगभग 100 प्रमुख लेखकों, कलाकारों और बुद्धिजीवियों ने संयुक्त बयान जारी कर सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और संस्थागत सुधार की मांग की। सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच कई दौर की वार्ता इस्तीफ़े से पहले केंद्र सरकार और सीजेपी प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की वार्ता हुई। बातचीत में सरकार की ओर से वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया, जबकि आंदोलनकारी छात्रों ने स्पष्ट कर दिया था कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा उनकी "नॉन-नेगोशिएबल" मांग है। वार्ता के बावजूद सहमति नहीं बन सकी और आंदोलन जारी रहा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठे सवाल भारत की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में से एक NEET से जुड़े विवाद ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता, परीक्षा सुरक्षा, डिजिटल निगरानी और सार्वजनिक संस्थानों की जवाबदेही पर चर्चा को तेज किया है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम केवल एक राजनीतिक बदलाव नहीं बल्कि भारत की परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की आवश्यकता का संकेत भी है। मुख्य बिंदु केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री को इस्तीफ़ा भेजने की घोषणा की। NEET पेपर लीक विवाद के बाद देशभर में छात्रों का आंदोलन तेज हुआ। सीजेपी ने इसे लोकतांत्रिक संघर्ष की जीत बताया। सोनम वांगचुक सहित कई सामाजिक हस्तियों ने आंदोलन का समर्थन किया। देशभर में परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग तेज। इस्तीफ़े की औपचारिक स्वीकृति समाचार लिखे जाने तक लंबित। रिपोर्ट ब्यूरो दिल्ली|लाइव भारत समाचार 
शनिवार, 25 जुलाई , 2026

धर्मेंद्र प्रधान ने भेजा इस्तीफ़ा, छात्र आंदोलन के दबाव के बीच बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम

धर्मेंद्र प्रधान ने भेजा इस्तीफ़ा, छात्र आंदोलन के दबाव के बीच बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम

सीजेपी का दावा— “हमने कर दिखाया”; NEET पेपर लीक विवाद के बाद शिक्षा सुधार पर राष्ट्रीय बहस तेज

 


विश्व सुर्ख़ी | भारत की शिक्षा राजनीति में बड़ा मोड़
धर्मेंद्र प्रधान ने भेजा इस्तीफ़ा, छात्र आंदोलन के दबाव के बीच बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम

TOPSHOT – Cockroach Janta Party (CJP) supporters celebrate the resignation of India’s Education Minister Dharmendra Pradhan, at Jantar Mantar in New Delhi

नई दिल्ली। भारत की शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई सप्ताह से जारी अभूतपूर्व छात्र आंदोलन के बीच शनिवार को देश की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफ़ा भेजने की घोषणा करते हुए कहा कि देश में बनी परिस्थितियों, छात्रों के भविष्य और राष्ट्रीय एकता को ध्यान में रखते हुए उन्होंने यह निर्णय लिया है। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक उनके इस्तीफ़े पर अंतिम निर्णय और औपचारिक स्वीकृति शेष थी।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) पेपर लीक मामले को लेकर पूरे देश में व्यापक विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले लगभग एक महीने से कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हजारों छात्र, युवा और सामाजिक संगठनों का आंदोलन जारी था, जिसमें शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और व्यापक सुधार की मांग की जा रही थी।

 

“देश की एकता और छात्रों के भविष्य के लिए इस्तीफ़ा” : धर्मेंद्र प्रधान

सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी अपने विस्तृत संदेश में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्होंने जीवन के चार दशक शिक्षा, छात्रों और शिक्षा सुधार को समर्पित किए हैं। उन्होंने लिखा कि किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य परीक्षा माफिया या कानूनी जटिलताओं के कारण प्रभावित नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि देश में बनी परिस्थितियों का राष्ट्र विरोधी शक्तियाँ लाभ न उठा सकें, छात्र अपनी ऊर्जा आंदोलनों के बजाय पढ़ाई और करियर निर्माण में लगा सकें तथा राष्ट्रीय एकता बनी रहे—इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना त्यागपत्र भेजा है।

प्रधान ने यह भी कहा कि उन्होंने पहले दिन से ही इस पूरे विवाद की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की थी और परीक्षा प्रणाली को निष्पक्ष बनाने के लिए हर संभव प्रयास किए, लेकिन इस दौरान कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों द्वारा भ्रम फैलाने और बाधाएँ उत्पन्न करने से उन्हें गहरा दुःख पहुँचा।

सीजेपी की प्रतिक्रिया : “लोकतंत्र में जनता की जीत”

इस्तीफ़े की घोषणा के तुरंत बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इसे आंदोलन की बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक संघर्ष की जीत है।

उन्होंने कहा कि यदि जनता भयमुक्त होकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज़ बुलंद करे तो सरकार को जवाबदेह बनाया जा सकता है। उनके अनुसार यह केवल एक मंत्री का इस्तीफ़ा नहीं बल्कि युवाओं की आवाज़ की जीत है।

विपक्ष पहले से कर रहा था इस्तीफ़े की मांग

कांग्रेस सहित अनेक विपक्षी दल लंबे समय से शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े की मांग कर रहे थे। विपक्ष का आरोप था कि परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है और इसके लिए सरकार को राजनीतिक तथा प्रशासनिक जवाबदेही तय करनी चाहिए।

जंतर-मंतर आंदोलन बना राष्ट्रीय बहस का केंद्र

20 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन धीरे-धीरे राष्ट्रीय अभियान में बदल गया। आंदोलन को देशभर के विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों का समर्थन मिला।

लद्दाख के शिक्षाविद् एवं सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी आंदोलन में शामिल हुए और उन्होंने छात्रों के समर्थन में अनशन किया। इसके अतिरिक्त देश के लगभग 100 प्रमुख लेखकों, कलाकारों और बुद्धिजीवियों ने संयुक्त बयान जारी कर सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और संस्थागत सुधार की मांग की।

सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच कई दौर की वार्ता

इस्तीफ़े से पहले केंद्र सरकार और सीजेपी प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की वार्ता हुई। बातचीत में सरकार की ओर से वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया, जबकि आंदोलनकारी छात्रों ने स्पष्ट कर दिया था कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा उनकी “नॉन-नेगोशिएबल” मांग है। वार्ता के बावजूद सहमति नहीं बन सकी और आंदोलन जारी रहा।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठे सवाल

भारत की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में से एक NEET से जुड़े विवाद ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता, परीक्षा सुरक्षा, डिजिटल निगरानी और सार्वजनिक संस्थानों की जवाबदेही पर चर्चा को तेज किया है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम केवल एक राजनीतिक बदलाव नहीं बल्कि भारत की परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की आवश्यकता का संकेत भी है।

मुख्य बिंदु

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री को इस्तीफ़ा भेजने की घोषणा की।

NEET पेपर लीक विवाद के बाद देशभर में छात्रों का आंदोलन तेज हुआ।

सीजेपी ने इसे लोकतांत्रिक संघर्ष की जीत बताया।

सोनम वांगचुक सहित कई सामाजिक हस्तियों ने आंदोलन का समर्थन किया।

देशभर में परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग तेज।

इस्तीफ़े की औपचारिक स्वीकृति समाचार लिखे जाने तक लंबित।

रिपोर्ट ब्यूरो दिल्ली|लाइव भारत समाचार 

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