मिशन सेफ फ्यूचर 2.0: बस्ती मंडल में अनफिट स्कूल वाहनों पर कड़ी कार्रवाई, 71 वाहनों का पंजीयन निलंबित

बस्ती, 17 अगस्त। लाइव भारत समाचार ब्यूरो।
स्कूली बच्चों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए परिवहन विभाग ने बस्ती मंडल में “मिशन सेफ फ्यूचर 2.0” अभियान के तहत कार्रवाई तेज कर दी है। 11 अगस्त से 25 अगस्त तक चलाए जा रहे 15 दिवसीय विशेष अभियान में बिना फिटनेस और मानकों के विपरीत संचालित स्कूल वाहनों को विशेष रूप से जांच के दायरे में लिया गया है। विभाग की कार्रवाई से अनफिट स्कूल वाहन संचालकों में हड़कंप की स्थिति है।

संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) फरीदउद्दीन ने कहा कि स्कूली बच्चों की सुरक्षा केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सभी का सामूहिक संकल्प है। विद्यालय प्रबंधन, वाहन चालक-परिचालक और अभिभावकों के सजग सहयोग से ही बच्चों को सुरक्षित यात्रा का अधिकार सुनिश्चित किया जा सकता है।

71 स्कूल वाहनों का पंजीयन निलंबित
आरटीओ प्रशासन ने बताया कि जांच के दौरान जिन विद्यालयों के वाहन अनफिट पाए गए हैं, उन्हें लाल सूची में शामिल किया गया है। जिन स्कूल वाहनों के संचालकों को बार-बार नोटिस देने और संपर्क स्थापित करने के बावजूद फिटनेस एवं परमिट संबंधी औपचारिकताएं पूरी नहीं की गईं, ऐसे 71 वाहनों का पंजीयन निलंबित किया जा चुका है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी वाहन का पंजीयन निलंबन छह माह तक जारी रहता है, तो उसके बाद नियमानुसार पंजीयन निरस्तीकरण की कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी। विभाग ने स्कूल प्रबंधन को चेतावनी दी है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मानकों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।
ऑनलाइन सेवाओं से परिवहन विभाग में पारदर्शिता
आरटीओ प्रशासन ने बताया कि नागरिकों की सुविधा और पारदर्शी व्यवस्था के लिए उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग की 54 सेवाएं पहले से ऑनलाइन उपलब्ध हैं। अब 35 से अधिक नागरिक सेवाओं को ऑटो-अप्रूव मोड में भी उपलब्ध कराया गया है। इसका उद्देश्य नागरिकों को अनावश्यक कार्यालयी चक्कर और बाहरी व्यक्तियों पर निर्भरता से मुक्त करना है।
उन्होंने कहा कि अभ्यर्थी स्वयं ऑनलाइन आवेदन कर संबंधित सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने के साथ-साथ समय की भी बचत होगी।
स्कूली वाहनों पर कार्रवाई लगातार जारी
एआरटीओ (प्रशासन) माला बाजपेई ने कहा कि शासन से प्राप्त निर्देशों के क्रम में स्कूली वाहनों की जांच और कार्रवाई लगातार जारी है। बच्चों की सुरक्षा के प्रति किसी भी प्रकार की लापरवाही को क्षम्य नहीं माना जाएगा।
उन्होंने कहा कि आम जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विभाग की विभिन्न सेवाओं को ऑनलाइन और ऑटो-अप्रूव मोड में उपलब्ध कराया गया है। अभ्यर्थी स्वयं ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी कर सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।
कार्यालय में बाहरी व्यक्तियों का दखल वर्जित
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) ने बताया कि परिवहन कार्यालय में बाहरी व्यक्तियों का दखल पूरी तरह वर्जित है। लाइसेंस धारक अथवा वाहन संबंधी कार्य कराने वाले अभ्यर्थी सीधे कार्यालय के संबंधित पटल पर संपर्क कर अपना कार्य करा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि ड्राइविंग लाइसेंस टेस्टिंग की प्रक्रिया डीटीआई परिसर में निर्धारित प्रक्रिया के तहत कराई जाती है। टेस्ट पास होने के बाद लाइसेंस आवेदन को स्वीकृति प्रदान की जाती है। टेस्टिंग प्रक्रिया में निजी फर्म के मारुति कर्मियों की सेवाएं ली जा रही हैं।
लापरवाही मिलने पर संबंधित लिपिक पर होगी कार्रवाई
परिवहन कार्यालय के सभी पटल लिपिकों को निर्देशित किया गया है कि कार्यालय में आने वाले अभ्यर्थियों के कार्यों का नियमानुसार और सुचारू रूप से निस्तारण किया जाए। किसी भी पटल पर कार्य में अनावश्यक विलंब, लापरवाही या अभ्यर्थी को परेशान किए जाने की शिकायत मिलने पर संबंधित लिपिक के विरुद्ध जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
परिवहन अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी बाहरी व्यक्ति या बिचौलिए के माध्यम से कार्य कराने के बजाय सीधे संबंधित कार्यालयी पटल अथवा ऑनलाइन माध्यम का इस्तेमाल करें।
बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
परिवहन विभाग का कहना है कि “मिशन सेफ फ्यूचर 2.0” का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि स्कूली परिवहन व्यवस्था को सुरक्षित, मानक अनुरूप और जवाबदेह बनाना है। विभाग ने विद्यालय प्रबंधन और अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने वाले वाहनों की फिटनेस, परमिट और सुरक्षा मानकों की जांच अवश्य करें, ताकि किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को समय रहते रोका जा सके।
रिपोर्ट : बस्ती ब्यूरो| लाइव भारत समाचार